You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
BBC IMPACT: चीनी सैनिक वांग छी उड़ चले 'अपने घर'
- Author, विनीत खरे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
भारत में पिछले 54 साल से फंसे चीनी सेना के 77 वर्षीय वांग छी लंबे इंतज़ार के बाद आख़िरकार वापस चीन लौट रहे हैं.
उनके साथ उनके बेटे और बेटी भी चीन जा रहे हैं. उन्होंने 11 फरवरी सुबह 3 बजे चीन के लिए उड़ान भरी.
उन्होंने बताया है कि इसके लिए उनके पिता को ज़रूरी एक्ज़िट पेपर्स मिल गए हैं.
शुक्रवार रात को वांग छी के परिवार को चीनी दूतावास में बुलाया गया जहां उनकी मुलाकात चीनी राजदूत से हुई और उनके सम्मान में कार्यक्रम हुए.
बीबीसी में वांग छी पर कहानी छपने के बाद भारत और चीन के विदेश मंत्रालयों ने उम्मीद जताई थी कि इस मुद्दे को जल्द सुलझा लिया जाएगा.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने नौ फ़रवरी को हफ़्तावार प्रेस ब्रीफ़िंग में कहा था, "हमें जब से इस बारे में पता चला, हम इसका फॉलोअप कर रहे हैं. मंत्रालय वांग छी और उनके परिवार को, जिनमें उनके बेटे विष्णु वांग, बेटी अनीता वानखेड़े, बहू नेहा वांग और पोती खनक वांग शामिल हैं, चीन जाने में मदद कर रही है."
विकास स्वरूप ने कहा था कि वो इस बारे में भारत में चीनी दूतावास और चीन में भारतीय दूतावास के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और वो जल्द ही चीन जा पाएंगे.
वांग छी के परिवार को गुरुवार को बालाघाट सरकारी दफ़्तर बुलाया गया था जहां उन्होंने तत्काल व्यवस्था से पासपोर्ट के लिए अप्लाई किया. फिर वो भोपाल पहुंचे जहां उन्हें पासपोर्ट दिया गया.
फिर सड़क के रास्ते उनका परिवार दिल्ली पहुंचा जहां उनकी मुलाकात चीनी दूतावास के अधिकारियों से हुई.
चीनी मीडिया में इस ख़बर पर काफ़ी चर्चा हुई.
आइए जानते हैं वांग छी के जीवन के बारे में 10 बातें
- वांग छी के मुताबिक 1963 में वो ग़लती से भारत में घुस गए और पकड़े गए, उधर भारतीय अधिकारियों के अनुसार वो भारत में बिना कागज़ात के घुसे. वांग छी जासूस होने के आरोपों से इनकार करते हैं.
- वांग छी विभिन्न जेलों में छह से सात साल रहे और उसके बाद उन्हें मध्य प्रदेश के एक गांव तिरोड़ी में छोड़ दिया गया
- वहां उन्होंने एक आटे की चक्की पर काम करना शुरू किया.
- 1975 में उन्होंने 'दबाव' में सुशीला से शादी की.
- परिवार से दूरी के कारण वो घंटों रोते थे और परिवार को याद करते थे.
- 80 के दशक में पहली बार पत्रों के माध्यम से चीन में परिवार के साथ उनका संपर्क हुआ.
- 40 साल में पहली बार 2002 में फ़ोन पर उनकी बात उनकी मां से हुई. 2006 में उनकी मां की मृत्यु हो गई.
- उनके एक बेटा और दो बेटियां हैं.
- वांग छी के मुताबिक़ उन्होंने मदद के लिए सभी को पत्र लिखे लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की.
- बीबीसी में कहानी छपने के बाद चीनी दूतावास के अधिकारी उनसे मिलने उनके गांव गए थे और मदद का भरोसा दिलाया था.