'जज लोया की मौत किसी एक परिवार से जुड़ा मामला नहीं है'

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- Author, अभिमन्यु कुमार साहा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों ने इतिहास में पहली बार देश के सामने आकर कहा था कि देश की सबसे ऊँची अदालत में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है.
संवाददाता सम्मेलन में जब पूछा गया कि जज जिन संवेदनशील मुकदमों की बात कर रहे हैं क्या उनमें लोया का मामला भी है, इसके जवाब में जस्टिस गोगोई ने कहा, 'हाँ.'
जज लोया की मौत की जाँच के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में तीन याचिकाएं दायर हैं.
इनमें से एक बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन की तरफ से बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर की गई है और दो सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है.
सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला ने दायर की है और दूसरी महाराष्ट्र के पत्रकार बंधु राज लोने ने की है.
तहसीन पूनावाला के मुताबिक, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में जज लोया की मौत पर याचिका दिसंबर के महीने में दायर की थी, जबकि बंबई हाईकोर्ट में याचिका जनवरी के पहले हफ्ते में दायर की गई है.

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लोया मामले की सुनवाई
वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह का कहना है कि यह मामला किसी एक परिवार से जुड़ा नहीं है.
बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जब एक जज की मौत होती है तो ये न्यायपालिका का कर्तव्य होता है कि वो इस मामले की जाँच करे.
सुप्रीम कोर्ट ने बीते शुक्रवार को इस पर सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र सरकार से पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया था.
सोमवार को इस मामले की दोबारा सुनवाई होनी थी लेकिन सुनवाई कर रहे जजों में से एक जज के कोर्ट नहीं आने से ये टल गई.
इंदिरा जयसिंह की मांग है कि मौत के पूरे मामले से पर्दा हटना चाहिए.
उन्होंने कहा, "हम ये नहीं कह सकते हैं कि लोया को किसी ने मारा है लेकिन इतना कह सकते हैं कि जो परिस्थितियां रही हैं, उससे हमें लगता है कि यह एक अप्राकृतिक मौत थी."
उन्होंने अनुज के प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बात करते हुए कहा कि परिवार की बातों में विरोधाभास है इसलिए मौत की जांच और भी ज्यादा जरूरी हो गई है.
इंदिरा जयसिंह ने कहा, "उनकी बहन कहती हैं कि मेरे भाई की मौत प्रकृतिक नहीं है और 20 साल का उनका बेटा कहता है कि उन्हें कोई शंका नहीं है."

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'अनुज में आत्मविश्वास नहीं था'
इंदिरा जयसिंह आगे कहती हैं, "अगर आप उनकी बॉडी लैंग्वेज को देखें और उनके इर्द-गिर्द लोगों को देखें तो पाएंगे कि उनके पास कोई आत्मविश्वास नहीं था. ऐसे में मुझे लगता है कि मामला और गंभीर हो गया है."
मामले को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट में बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन ने याचिका डाली है, जिसकी सुनवाई 23 जनवरी को होनी है.
इंदिरा जयसिंह की आपत्ति है कि जब मामला मुंबई में चल रहा हो तो ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई करना सही नहीं है.
वो कहती हैं, "ये क़ानून है कि हर केस पहले हाई कोर्ट में चलना चाहिए. उसके बाद ही सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो सकती है. बॉम्बे हाई कोर्ट में यह केस पेंडिंग है और 23 जनवरी को इसकी सुनवाई होनी है."
वो कहती हैं, "सुप्रीम कोर्ट को इतनी जल्दी किस बात की है. कोर्ट इतनी ही चिंतित है तो जिस समय मौत हुई थी उस समय संज्ञान क्यों नहीं लिया जैसा जस्टिस कर्णन के मामले में लिया था."

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'शंकाएं दूर होनी चाहिए'
सुप्रीम कोर्ट मामले में कांग्रेसी नेता तहसीन पूनावाला और महाराष्ट्र के पत्रकार बंधु राज लोने की याचिका पर सुनवाई कर रहा है.
यह सुनवाई जस्टिस अरुण मिश्रा की कोर्ट में हो रही है.
कांग्रेसी नेता तहसीन पूनावाला का कहना है कि इंदिरा जयसिंह ने सुप्रीम कोर्ट को गुमराह किया है कि कोर्ट को इसकी सुनवाई रोक देनी चाहिए.
बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा, "बंबई हाई कोर्ट में याचिका 4 जनवरी को दायर की गई थी, जबकि मेरी याचिका सुप्रीम कोर्ट में 12 दिसंबर को दाखिल की गई."
तहसीन पूनावाला का दावा है कि उन्हेंने सबसे पहले याचिका दायर की थी, जबकि बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका की पहली सुनवाई 23 जनवरी को होनी है.
वो आगे कहते हैं, "मैं किसी व्यक्ति की मृत्यु की बात नहीं कर रहा, मैं एक जज की मौत के बारे में कह रहा हूं. जो शंकाएं हैं वो खत्म होनी चाहिए."
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