प्रेस रिव्यू: मालदीव से क्यों गुस्से में है भारत?

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार दो महीने से भारत और मालदीव के बीच जारी राजनयिक कशमकश के बाद आख़िरकार अब्दुल्ला यामीन सरकार ने अपने विदेश मंत्री मोहम्मद असीम को तनाव कम करने के उद्देश्य से नई दिल्ली भेजा है. मोहम्मद असीम बुधवार से तीन दिवसीय भारत दौरे पर आ रहे हैं.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, ''तत्कालीन विदेश सचिव एस जयशंकर ने भारत में मालदीव के राजदूत अहमद मोहम्मद से मुलाक़ात की थी. जयशंकर ने भारतीय चिंताओं से मालदीव को अवगत करा दिया था.''

भारत के दौरे पर आ रहे असीम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से भी मुलाक़ात करेंगे.

दोनों देशों के बीच तनाव तब चरम पर पहुंच गया था जब मालदीव सरकार समर्थित एक अख़बार ने पीएम मोदी को मुस्लिम विरोधी और भारत को शत्रु देश क़रार दिया था. हालांकि बाद में अब्दुल्ला यामीन ने कहा था कि संपादकीय उनकी सरकार की नीतियों का मुखपत्र नहीं थी. उन्होंने भारत को मित्र और क़रीबी देश क़रार दिया था. मालदीव ने हाल ही में चीन के साथ फ्री ट्रेड समझौते पर हस्ताक्षर किया था.

हिन्दुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार अमरीका ने कहा है कि वो एच-1बी वीज़ा में किसी भी तरह के बदलाव पर विचार नहीं कर रहा है. अख़बार का कहना है कि जो अमरीका में एच-1बी वीज़ा पर रह रहे हैं उनके लिए बड़ी राहत की ख़बर है. अब उनके ऊपर अमरीका से निकाले जाने का ख़तरा टल गया है. इससे पहले कहा जा रहा था कि ट्रंप प्रशासन एच-1बी वीज़ा के नियमों में बदलाव करने जा रहा है. अगर ऐसा होता को लाखों भारतीय प्रभावित होते.

यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विस के मीडिया प्रमुख जोनाथन विथंगटन ने कहा है कि ऐसे किसी बदलाव पर फिलहाल विचार नहीं किया जा रहा है. अगर अमरीका ऐसा कुछ करने वाला भी होता तो इसका यह मतलब नहीं कि लोगों को नौकरियां छोड़ अपने देश लौटना होगा. इस ख़बर को भी कई अख़बारों ने प्रमुखता से पहले पन्ने पर छापा है. एच-1बी वीज़ा कार्यक्रम के तहत अमरीकी कंपनियां दूसरे देशों से हाई स्किल्ड प्रोफेशनल्स को नौकरी पर रखती हैं और उन्हें अस्थाई वीज़ा मिलता है.

इससे अमरीका में काम करने वाले साढ़े सात लाख आईटी इंजीनियरों की नौकरी संकट में पड़ने का ख़तरा पैदा हो गया था. अमरीका के तमाम उद्योगों और क़ानूनविदों ने इस फ़ैसले का विरोध किया. नैस्कॉम ने भी कहा कि इसके नतीजे अमरीका और भारत दोनों को भुगतने होंगे.

दैनिक जागरण की ख़बर के अनुसार चारा घोटाले में रांची की जेल में बंद आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव के जेल जाने से ठीक पहले उनके दो नजदीकी मदन यादव और लक्ष्मण कुमार के जेल जाने की घटना से विवाद खड़ा हो गया है. अख़बार का कहना है कि पुलिस ने दोनों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज़ करने में जैसी तेज़ी दिखाई थी, वैसी ही तेज़ी शिकायतों को फ़र्ज़ी क़रार देने में दिखाई.

दैनिक जागरण ने लिखा है कि 23 दिसंबर को जब लालू को सीबीआई की विशेष अदालत में दोषी क़रार देने की तैयारी चल रही थी, तभी फ़र्ज़ी मुक़दमा दर्ज़ कर मदन यादव और लक्ष्मण कुमार को जेल में आरजेडी प्रमुख के साथ रखने की व्यवस्था की गई. कहा जा रहा है कि ऐसा लालू यादव का ख़्याल रखने के लिए किया गया था.

अमर उजाला की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ सेंसर बोर्ड ने विवादों में घिरी संजय लीला भंसाली की फ़िल्म 'पद्मावत' में पांच बदलाव के सुझावों के बाद हरी झंडी दी थी. 25 जनवरी को फ़िल्म रिलीज होने जा रही है. इस बीच ख़बर है कि निर्माता ने विवादित पद्मावत को काल्पनिक बनाने के लिए 300 कट लगाए हैं. इससे किरदारों के समझना मुश्किल होगा. इसके मुताबिक फ़िल्म से दिल्ली, मेवाड़ और चित्तौड़गढ़ से जुड़े तथ्यों को भी काट दिया गया है.

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