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राज्यसभा न भेजने पर विश्वास का छलका दर्द, 'शहीद तो कर दिया अब मेरे साथ...'
आम आदमी पार्टी ने बुधवार को राज्यसभा की तीन सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी. पार्टी ने इसके लिए अपने राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय सिंह, नारायण दास गुप्ता और सुशील गुप्ता का नाम तय किया है.
वहीं, पार्टी के दूसरे वरिष्ठ नेता कुमार विश्वास का पत्ता कट गया है. राज्यसभा में पार्टी के दूसरे वरिष्ठ नेता कुमार विश्वास के जाने पर भी चर्चा थी.
इसको लेकर उनके समर्थकों ने पार्टी कार्यालय में भी धरना दिया था और वहीं गुजरात के पाटीदार आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल ने भी विश्वास को राज्यसभा भेजने को लेकर ट्वीट किया था.
राज्यसभा में न भेजने को लेकर कुमार विश्वास का दर्द भी छलक उठा है. उन्होंने सोशल मीडिया फ़ेसबुक पर इसको लेकर एक पोस्ट शेयर किया है. इसमें उन्होंने पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल पर तंज़ कसा है.
फेसबुक पर अपलोड किए गए वीडियो में कुमार विश्वास ने कहा, "पिछले डेढ़ वर्ष से हमारी पार्टी में पीएसी के अंदर शीर्ष नेतृत्व हमारे नेता और हमारे मित्र अरविंद भाई के कई निर्णय चाहे वो सर्जिकल स्ट्राइक के हों, आंतरिक भ्रष्टाचार से आंख फेरना हो, चाहे पंजाब में अतिवादियों के प्रति सॉफ्ट रहना हो, चाहे टिकट वितरणों में जो गड़बड़ियां मिलीं उसकी शिकायत हो, कार्यकर्ता हो चाहे सैनिकों की उपेक्षा हो, चाहे जेएनयू का विषय हो. मैंने जो सच बोला आज उसका पुरस्कार दंड स्वरूप मुझे दिया गया जिसके लिए मैं स्वयं का आभार व्यक्त करता हूं."
कवि और आम आदमी पार्टी नेता कुमार विश्वास का 'दर्द' यहीं ख़त्म नहीं हुआ. उन्होंने आगे कहा कि वह यह मानते हैं कि नैतिक रूप से यह एक कवि की, एक मित्र की, एक सच्चे आंदोलनकारी और क्रांतिकारी की जीत है.
इसके अलावा विश्वास ने आम आदमी पार्टी के राज्यसभा के उम्मीदवार सुशील गुप्ता के योगदान पर कुछ इस अंदाज़ में तंज कसा, इसमें उन्होंने आम आदमी पार्टी में अपने योगदान के बहाने सुशील गुप्ता पर कुछ इस अंदाज़ में निशाना साधा.
उन्होंने कहा, "मैं पिछले 40 वर्ष से मनीष के साथ काम कर रहे, 12 वर्ष से अरविंद के साथ काम कर रहे, सात साल से कार्यकर्ताओं के लिए काम कर रहे और पांच साल से लगातार आम आदमी पार्टी के हर विधायक के लिए रैलियां कर करके, ट्वीट कर करके, मीडिया में बहस कर करके जिन्होंने आज पार्टी को खड़ा किया है. ऐसे महान क्रांतिकारी श्री सुशील गुप्ता जी को आंदोलनकारियों की आवाज़ राज्यसभा में भेजने के लिए अरविंद जी ने चुना है. इसके लिए मैं अरविंद जी को बधाई देता हूं कि उन्होंने क्या शानदार चयन किया है. कार्यकर्ताओं को लाखों-लाखों बधाई. एक महानतम व्यक्ति को बधाई जिसने लगातार काम किया."
विश्वास यहीं भी शांत नहीं हुए. उन्होंने 'आप' के दूसरे उम्मीदवार एनडी गुप्ता पर भी उन्होंने अपने लफ़्ज़ों के 'तीर' छोड़े.
विश्वास ने कहा, "दूसरे गुप्ता जी को भी बधाई. इसके लिए भी कार्यकर्ताओं को बधाई."
केजरीवाल को भी नहीं 'बख़्शा'
दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को भी उन्होंने नहीं बख़्शा. कुमार विश्वास ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी के क़िस्से का भी ज़िक्र किया.
विश्वास ने कहा कि उन्हें कुछ महीनों पहले 22 लोगों की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में बुलाकर अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि वह उन्हें मारेंगे पर शहीद नहीं होने देंगे.
उन्होंने केजरीवाल को बधाई देते हुए कहा कि वह अपनी शहादत स्वीकार करते हैं.
केजरीवाल पर पार्टी के अंदर अपनी मनमानी के आरोप लगते रहे हैं. विश्वास ने इसका भी ज़िक्र मीडिया से किया. उन्होंने कहा कि केजरीवाल की इच्छा के बिना दल में कुछ होता नहीं है और उनसे असहमत रहकर जीवित रहना बहुत मुश्किल है.
विश्वास ने कहा, "मैं केजरीवाल जी से कहना चाहूंगा कि वह कृपया अपने मंत्रियों, ट्विटर के योद्धाओं को लोगों को ये कह दें कि शहीद तो कर दिया पर शव के साथ छेड़छाड़ न करें क्योंकि यह युद्ध के नियमों के विपरीत है."
कुमार विश्वास ने अंत में केजरीवाल और पार्टी नेताओं को बधाई देते हुए कहा कि, "सबको लड़ने ही पड़े अपने-अपने युद्ध, चाहे राजा राम हो चाहे गौतम बुद्ध. सबकी लड़ाईयां अकेली हैं, मैं अपनी लड़ रहा हूं, आप अपनी लड़ रहे हैं."
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