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क्रिसमस पर क्यों मना रहे हैं तुलसी पूजन दिवस
आज जब पूरी दुनिया क्रिसमस का त्यौहार मना रही है तब भारत के एक वर्ग में आज तुलसी पूजन दिवस मनाया जा रहा है.
हिंदू धर्म में तुलसी की पूजा होती है और बहुत से लोग इसे अपने घर में भी लगाते हैं. हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले कई लोग हर दिन भी तुलसी के पौधे की पूजा करते हैं.
तो फिर क्रिसमस के दिन ये तुलसी पूजन दिवस क्यों मनाया जा रहा है?
दरअसल तुलसी पूजन दिवस की शुरुआत साल 2014 में धर्मगुरू आसाराम ने की थी. आसाराम इस समय बलात्कार के एक मामले में जेल में बंद हैं.
आसाराम की संस्था की वेबसाइट आश्रम डॉट ओआरजी पर बताया गया है, "25 दिसम्बर से 1 जनवरी के दौरान शराब आदि नशीले पदार्थों का सेवन, आत्महत्या जैसी घटनाएँ, युवाधन की तबाही एवं अवांछनीय कृत्य खूब होते हैं. इसलिए प्राणिमात्र का मंगल एवं भला चाहने और करने वाले पूज्य बापूजी ने वर्ष 2014 में आह्वान किया था कि 25 दिसंबर से एक जनवरी तक तुलसी-पूजन, जप-माला पूजन, गौ-पूजन, हवन, गौ-गीता-गंगा जागृति यात्रा, सत्संग आदि कार्यक्रम आयोजित हों."
भारत के संस्कृति मंत्री महेश चंद्र शर्मा ने ट्वीट किया, "तुलसी के महत्व का वर्णन हमारे शास्त्रों में भी है और विज्ञान में भी. स्कंद पुराण में कहा गया है कि जिस घर में तुलसी का बगीचा होता है एवं पूजन होता है उसमें यमदूत प्रवेश नहीं करते."
केंद्रीय राज्य मंत्री गिरीराज सिंह ने फ़ेसबुक पर लिखा, "आप सभी को तुलसी पूजा की बधाई. तुलसी का पौधा एक अभियान के तहत हर घर में लगाएँ."
तुलसी पूजन दिवस सोमवार को ट्विटर के ट्रेंड्स में भी शामिल रहा और कट्टर हिेंदुत्व की बात करने वाले कई लोगों ने इस बारे में फ़ेसबुक पर भी पोस्ट किए हैं.
ज्योति शेखावत ने ट्विटर पर लिखा, "मैं हिंदू हूं ईसाई नहीं जो में क्रिसमस मनाऊं...ये देश सैंटा का नहीं है ये देश संतों का है, ऋषि मुनियों का है. यहां कोई सैंटा नहीं आएगा, यहां तो विवेकानंद, दयानंद, दधीचि, शंकराचार्य आएंगे. यहां कोई जीसस नहीं आएगा बल्कि यहां राम, कृष्ण, माँ भवानी आएंगी."
फ़ेसबुक पर कई लोग 25 दिसंबर को क्रिसमस के बजाए तुलसी पूजन दिवस मनाने का आह्वान कर रहे हैं.
क्रिसमस का विरोध
हाल के दिनों में भारत में क्रिसमस पर्व का विरोध बढ़ा है. उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक हिंदूवादी समूह ने पत्र जारी कर स्कूलों को क्रिसमस न मनाने की धमकी दी है.
वहीं मध्यप्रदेश के सतना ज़िले में क्रिसमस कैरोल गा रहे ईसाई पादरियों को गिरफ़्तार कर लिया गया था.
भारत में कैथोलिक ईसाइयों के संगठन ने भी कहा है कि देश धार्मिक आधार पर बंट रहा है और लोगों का सरकार पर भरोसा कम हो रहा है.