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गुजरात नतीजों के दिन हार्दिक पटेल के घर पसरा सन्नाटा
- Author, विजय सिंह परमार
- पदनाम, संवाददाता, बीबीसी गुजराती
गुजरात चुनाव के नतीजों के बाद हार्दिक पटेल के घर के बाहर सन्नाटा पसरा है. पाटीदार अनामत आंदोलन समिति के नेता हार्दिक पटेल के परिजन, अहमदाबाद से कुछ 50 किलोमीटर दूर विरमगाम कस्बे में रहते हैं.
बीबीसी गुजराती की टीम ने सोमवार को हार्दिक के घर पहुंचकर उनकी मां से बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने बात करने से मना कर दिया. साथ ही उन्होंने कहा कि हार्दिक के पिता भरत पटेल भी घर पर मौजूद नहीं हैं.
हार्दिक की मां ऊषा पटेल ने बीबीसी से कहा, "मुझे नहीं पता कि हार्दिक कहां है. मैं कुछ और नहीं कहना चाहती. हार्दिक रविवार को सोमनाथ शहर में थे."
लेकिन हार्दिक अहमदाबाद में ही मौजूद थे, उन्होंने चुनाव नतीजों में हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ते हुए कहा, "ये चाणक्य की रणनीति नहीं है. विपक्षी दलों को ईवीएम हैक के ख़िलाफ एकजुट होना चाहिए. अगर एटीएम हैक हो सकता है तो ईवीएम क्यों हैक नहीं हो सकता."
24 वर्षीय हार्दिक पटेल ने गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए धुंआधार प्रचार किया. उन्होंने कई बड़ी रैलियां कीं, जिसमें भारी भीड़ उमड़ी. इन रैलियों में उन्होंने बीजेपी को हराने का आह्वान किया. कांग्रेस को उम्मीद थी कि हार्दिक की ये अपील उन्हें सत्ता दिलाने में मददगार साबित होगी. लेकिन अंत में कांग्रेस की ये उम्मीद टूट गई और बीजेपी ने बहुमत के साथ जीत हासिल की.
'स्थानीय राजनीति में सक्रिय नहीं'
सोशल मीडिया पर हार्दिक के बहुत से समर्थक हैं, लेकिन विरमगाम के लोगों का कहना है कि स्थानीय राजनीति में हार्दिक ने कभी बड़ी भूमिका नहीं निभाई. हार्दिक ने विरमगाम में कोई रैली नहीं की.
बीबीसी से बात करते हुए ब्लातंत ठाकोर ने कहा, "भले ही हार्दिक ने पूरे गुजरात में सैंकड़ों रैलियां की हों, लेकिन उन्होंने विरमगाम में कोई रैली नहीं की. उन्होंने विरमगाम के, के बी हाई स्कूल से पढ़ाई की है. विरमगाम विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में पटेल और ठाकोर समुदाय का प्रभुत्व है. स्थानीय नगर पालिका और विरामगम तालुका पंचायत का शासन बीजेपी के हाथ में है."
एक स्कूल टीचर, हार्दिक मेहता ने कहा, "हमें गर्व है कि हमारा छात्र हार्दिक पटेल आंदोलन का चेहरा बन गया है और भविष्य में वो एक बड़ा नाम होगा."
कांग्रेस विधायक डॉ तेजश्री पटेल ने 2012 के चुनाव में विरमगाम सीट जीती थी. हालांकि इस बार तेजश्री ने बीजेपी की टिकट पर चुनाव लड़ा. लेकिन वो कांग्रेस प्रत्याशी लाखाभाई भरवाड़ के हाथों हार गईं.
राजदीप सिंह चौहान ने कहा, "हम उम्मीद करते हैं कि नई सरकार विरमगाम के विकास पर ध्यान देगी. स्थानीय लोग कई तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं. इसके अलावा विरमगाम के युवाओं के लिए बेरोज़गारी एक बड़ा मुद्दा है."
एक स्थानीय नागरिक, लाखा भरवाड़ ने कहा, "हम चाहते हैं कि हमारी ऐतिहासिक मुनसर झील को संरक्षित और साफ़ किया जाए. इस ऐतिहासिक झील में गंदा पानी छोड़ा जाता है. अगर झील को अच्छे से विकसित और संरक्षित किया जाता है तो ये पर्यटकों को आकर्षित कर सकती है."
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