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#BBCGujaratOnWheels 'असली गुजरात' दिखाने वाली चार महिलाएं
- Author, शालू यादव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
जब बीबीसी न्यूज़रूम में चर्चा हुई कि गुजरात चुनाव से पहले महिलाओं के मुद्दों की कवरेज चार महिला बाइकर्स से कराई जाए तो मैं और हमारी प्रोडक्शन टीम आइडिया सुनते ही बेहद उत्साहित हो गईं!
#BBCGujaratOnWheels नाम की इस सिरीज़ में हम चार महिला बाइकर्स के साथ चार अलग-अलग ज़िलों में उनकी बुलेट पर सवार हैं और आज इस सफ़र का चौथा दिन है.
जब मैंने पहली बार इन बाइकर्स से बात की तो मुझे तो एक ही ख़्याल आया कि यही है गुजरात! प्रगतिशील, महत्वाकांक्षी जो अपनी शर्तों पर अपनी कहानी तय कर रहा है.
लेकिन बीबीसी की इस सिरीज़ का मक़सद है इस गुजरात को उस दूसरे गुजरात से मिलवाना जिसकी सच्चाई मीडिया में सामने नहीं आती. सफ़र के दौरान हम आप तक वो कहानियां रोज़ ले कर आ रहे हैं.
बहरहाल, मिलिए इन रॉकस्टार महिलाओं से जो हमारे साथ हर दिन घंटों बुलेट चलाकर एक गांव से दूसरे गांव जाती हैं और ग्रामीण औरतों की आवाज़ आप तक लाती हैं.
ट्विंकल कापड़ी
32 साल की ट्विंकल एक बाइकर और सोलो ट्रैवलर होने के अलावा एक उद्यमी भी हैं. 15 साल की उम्र से ये अकेले ही अपना बस्ता उठा कर दुनिया के अलग-अलग कोनों में अकेले सफ़र पर निकल पड़ती हैं.
ये अपनी बुलेट पर 65 हज़ार किलोमीटर का सफ़र कर चुकी हैं. बुलेट, जो इन्हें इतनी प्यारी है कि उसका नाम इन्होंने प्यार से 'बेंज़ीन' रखा है.
ट्विंकल कहती हैं कि वो खानाबदोश की तरह हैं जिनके लिए मंज़िल से ज़्यादा सफ़र ख़ूबसूरत है. पिछले पांच सालों में इन्होंने पूरे भारत का सफ़र अपनी बुलेट पर किया है.
हिमालय से लेकर पश्चिमी घाट तक और गुजरात से लेकर पूर्वोत्तर तक इनकी ज़िंदगी बुलेट के इर्द-गिर्द ही घूमती है. इस बुलेट के साथ वो अकेले निकल पड़ती हैं और अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग संस्कृति और लोगों से कनेक्ट करती हैं.
जहां जाती हैं वहां नए दोस्त बना लेती हैं और और उनके बारे में हज़ारों ख़ूबसूरत कहानियों का पिटारा है इनके पास! महिलाओं से जुड़े मुद्दों में इनकी ख़ास रुचि है और इनका मानना है कि लड़कियों को शिक्षा ना मिलने की वजह से उन्हें उनके अधिकारों का एहसास नहीं होता.
लिंसी माइकल
लिंसी 41 साल की हैं और यामाहा FZ16 पर भारत की सड़कों पर घूमती हैं. यात्रा इनका जुनून है क्योंकि इन्हें दुनिया के हर रंग रूप को गहराई से जानने की जिज्ञासा है.
लिंसी कम शब्दों में ही अपनी बात कह जाती हैं, लेकिन साथ-साथ लोगों से घुलने-मिलने में इन्हें ज़्यादा वक़्त नहीं लगता. इन्होंने यात्रा इसलिए शुरू की क्योंकि ये कॉर्पोरेट दुनिया के मायाजाल से निकलना चाहती थीं.
इनका कहना है कि इनकी नौकरी में इन्हें काफी सफलता मिली, लेकिन इनकी आत्मा को कभी वो तृप्ति नहीं मिल पायी जो वो हमेशा से ढूंढ रही थीं. फिर एक दिन बस अचानक इन्होंने तय किया कि अगर इनके ख़्वाबों को पंख नही मिल सकते तो क्या हुआ, इन्हें पहिए तो मिल ही सकते हैं!
बस उस दिन के बाद से लिंसी ने वापस मुड़कर नहीं देखा और अपने अरमानों की सफ़ारी करते-करते 30 हज़ार किलोमीटर अपनी बाइक चलाई.
खुद को एक 'आधुनिक बंजारा' बताने वाली लिंसी जब सफ़र पर नहीं होतीं तो प्रोसेस मैनेजमेंट के प्रोजेक्ट में कंसल्टेंट की जॉब करती हैं. इन्होंने अपना स्वाभिमान वापस पाया, बाइकिंग के ज़रिए और इनके चेहरे पर उसकी संतुष्टि साफ दिखाई देती है.
श्लोका दोशी
श्लोका #BBCGujaratOnWheels सिरीज़ की सबसे युवा महिला हैं. उनके बात करने से पता चलता है कि वो एक आम 22 साल की भारतीय युवती हैं, लेकिन जब वो बुलेट पर अपना कंट्रोल जमाकर उसे तेज़ी से भगाती हैं तो वो छवि तेज़ी से बदल जाती है.
उन्होंने बताया कि उन्हें आम लड़कियों की तरह एक हिफाज़ती वातावरण में नहीं पाला गया. उनके माता-पिता ने उन्हें पूरी आज़ादी दी अपने मन की और दिल की सुनने की. 16 साल की उमर में उन्होंने पहली बार बुलेट चलाई और उन्हें उसका चस्का लग गया.
जब उनके डैड ने ये नोटिस किया तो उन्होंने उनके 18वें जन्मदिन पर उन्हें एक बुलेट खरीद कर दी. उस दिन के बारे में याद करते हुए श्लोका के चेहरे की मुस्कान दोहरी हो जाती है! अब तक अपनी बुलेट पर उन्होंने दीव, गुजरात, सूरत, मुंबई, गोवा, सिल्वासा और वडोदरा में 16 हज़ार किलोमीटर का सफर किया है.
उनका सपना है कि अपनी बुलेट के साथ लद्दाख जाना, जिसे दुनिया की सबसे ज़्यादा ख़तरनाक राइड्स में से एक माना जाता है. इनकी आंखों में चमक आ जाती है जब लद्दाख के बारे में बात करती हैं - 'शायद मेरी ज़िंदगी उस दिन रुक जाएगी, जब मैं लद्दाख पहुंचूंगी.'
मोनिका अस्वानी
42 वर्षीय मोनिका कच्छ में एक शिक्षक हैं जो 29 साल से बुलेट पर सवारी कर रही हैं और इनका अनुभव इनकी राइडिंग में साफ़ झलकता है.
पेशे से शिक्षक हैं और सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री भी ली हुई है. ये उन महिलाओं की काउंसलिंग करती हैं जो घरेलू हिंसा का शिकार हुई हैं.
अपने जॉब की ज़िम्मेदारी को वो कभी अपनी राइडिंग के आड़े नहीं आने देतीं. बस जब मन किया तो बुलेट ले कर निकल पड़ती हैं. इनके बिंदास रवैये का हर कोई फ़ैन बन जाता है.
#BBCGujaratOnWheels के सफ़र के दौरान इन्होंने कई दिल जीते और कई औरतों के मन की बात आप तक पहुंचाई.
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