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बाल ठाकरे की पसंदीदा कार्टून कैरेक्टर थी इंदिरा गांधी
शिवसेना के संस्थापक और कार्टूनिस्ट बाल ठाकरे की आज पुण्यतिथि है और यह साल इंदिरा गांधी का जन्मशताब्दी का भी साल है.
काँग्रेस के ख़िलाफ राजनीति करने वाले बाल ठाकरे ने अपनी कूची से इंदिरा गांधी पर कई बार निशाना साधा. लेकिन उसी बाल ठाकरे ने उनकी हत्या पर उन्हें श्रद्धांजलि भी कार्टून बनाकर दी.
बाल ठाकरे ने इंदिरा गांधी पर जो कार्टून बनाए, उनमें से 10 चुने हुए कार्टून बीबीसी पेश कर रही है. उनमें से कई कार्टून शायद आज भी प्रासंगिक है.
'गरिबी हटाव' (साल 1971)
वर्तमान सरकार में जिस तरह से 'अच्छे दिन' के नारे पर सरकार बनाई गई है, वैसे इंदिरा गांधी के जमाने में 'गरीबी हटाओ' का नारा गूंजता था.
इंदिरा गांधी ने 'गरीबी हटाओ' का नारा दिया तो सही, लेकीन उनके चुनावी दौरे शाही होते थे. जिसकी आलोचना विपक्ष ने की थी. इसी मुद्दे पर बाल ठाकरे ने यह कार्टून बनाया था.
'कश्मिरी गुलाब के काँटे' (साल 1975)
कश्मीर समस्या आज भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है. 1975 में कश्मीर में शेख अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी ने काँग्रेस के साथ हाथ मिलाया था.
इस पर बालासाहेब ने टिपण्णी की थी कि कश्मीरी गुलाब के काँटे लहूलुहान कर रहे है.
'मुश्किले बढ गयी' (साल 1967)
इंदिरा गांधी के काँग्रेस और सत्ता की कमान संभालने के बाद तुरंत हुए चुनावों में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडू के साथ करीब नौ राज्यों मे काँग्रेस विरोधी पार्टियों ने जीत दर्ज की थी.
उस पर बालासाहेब ने कहा 'नाकी नऊ आले' (इसका मतलब होता है कि परेशान हो गए).
वाह रे सदिच्छा! (साल 1975)
अमरीका भारत की तरफ है या पाकिस्तान की तरफ? इसका उत्तर आज भी स्पष्ट नहीं है.
1975 में तत्कालीन अमरीकी विदेश मंत्री हेन्री किसिंजर भारत दौरे पर आये थे. यह कार्टून उस वक्त बनाया गया था.
'मेरी बदनामी की साजिश' (साल 1977)
इमरजेंसी की जाँच करने के लिए जनता सरकार ने शाह आयोग का गठन किया गया था. इंदिरा गांधी ने दावा किया था की यह उनकी बदनामी की साजिश थी.
बाल ठाकरे ने कार्टून में दिखाया कि असल में इंदिरा गांधी के चेहरे पर संजय गांधी कालिख लगा रहे है.
'केक कहाँ है?' (साल 1978)
1978 मे काँग्रेस एक बार फिर विभाजन हुआ. यशवंतराव चव्हान और ब्रह्मानंद रेड्डी जैसे वरिष्ठ नेता भी यह विभाजन रोक नहीं पाए.
उस पर बाल ठाकरे ने कार्टून में दिखाया कि ये दोनों नेता जर्जर काँग्रेस को इंदिरा गांधी की तरफ लेकर आ रहे है.
हमारी स्वातंत्र्यदेवता (साल 1982)
निजी स्वतंत्रता का मुद्दा आज भी प्रसांगिक है. इंदिरा गांधी के जमाने में भी यह चर्चा का विषय था.
इंदिरा गांधी पॅलेस्टाईन की जनता के स्वतंत्रता का समर्थन कर रही थीं, जबकि यहां भारत में उनके ऊपर निजी स्वतंत्रता के दमन करने के आरोप लग रहे थे.
खुली हवा से अपने घर वापसी (साल 1983)
जनता पार्टी को हराकर इंदिरा गांधी फिर से सत्ता में आयीं. शुरु के कुछ दिन अच्छे गुजरें. लेकीन बाद में देश के हालात बदलने लगें.
जगह-जगह दंगे हुए, पंजाब में उग्रवाद बढ़ने लगा. इस पर बाल ठाकरे ने ये कार्टून बनाया था.
गरिबी हटाव और इंदिरा काँग्रेस हटाव (साल 1983)
'अच्छे दिन' का नारे की हवा जिस तरह आज कमजोर हो रही है वैसे ही हालात गरीबी हटाओ के नारे का 1983 में हुआ था.
इस पर बाल ठाकरे ने कार्टून बनाया था कि इंदिरा गांधी गरीबी हटाओ का नारा दे रही हैं तो लोग इंदिरा-काँग्रेस हटाओ की मांग कर रहे हैं.
नि:शब्द (साल 1984)
इंदिरा गांधी की 1984 में हत्या कर दी गई थी. उनकी आलोचना करने वाले बाल ठाकरे ने उन्हें अनोखे तरीके से श्रद्धांजली अर्पण की.
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