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सीडी बनाने वाले पर कभी बात क्यों नहीं होती?
- Author, सरोज सिंह
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाटीदार नेता हार्दिक पटेल की कथित सीडी सोमवार देर शाम मीडिया के सामने आई है.
गुजरात विधानसभा चुनाव में जब एक महीने से भी कम समय बचा है, ऐसे में सीडी के सामने आने के बाद विरोधियों को इस कथित सीडी से फ़ायदा होगा या नुकसान इस पर चर्चा हर तरफ हो रही है.
हालांकि सीडी पर हार्दिक पटेल ने ट्वीट करके अपना पक्ष भी रखा है.
लेकिन इस चर्चा के बीच कई ऐसे मुद्दे हैं जिस पर बात नहीं होती. आखिर इस सीडी को किसने बनाया? सीडी को बनाने के पीछे की मंशा क्या थी? इस तरह की सीडी बनाने पर क़ानून क्या कहता है? सीडी में फिल्माए गए लोगों के पास क्या अधिकार होता है और क्या इस तरह की सीडी का नेताओं के इमेज पर कोई असर पड़ता है?
सीडी पर क्या कहता है क़ानून?
इन्हीं सवालों पर हमने बात की सुप्रीम कोर्ट की वकील रेखा अग्रवाल से.
• रेखा अग्रवाल के मुताबिक इस तरह की सीडी सामने आने पर सबसे पहले सीडी को फोरेंसिक लैब में जांच के लिए भेजना चाहिए ताकि ये पता लगाया जा सके कि सीडी असली है या फ़र्जी.
• अगर सीडी फ़र्जी है तो मामला साइबर क्राइम का बन जाता है. जिसमें आईटी एक्ट की धारा 66 और 67 के तहत ही कार्रवाई होती है.
• अगर सीडी में फिल्माए गए दोनों लोग वयस्क हैं और उन्हें कोई बिना बताए फिल्माता है, तो दोनों में से कोई भी कोर्ट जा सकता है. ऐसे मामले में निजता के क़ानून के हनन की शिकायत की जा सकती है. मानहानि का मुक़दमा भी दायर किया जा सकता है.
• इस पूरे मामले में एक तीसरा पहलू भी है. अगर फ़िल्माए गए दोनों लोगों में से किसी ने इसकी शिकायत नहीं की तो कोई तीसरा आदमी भी इसकी शिकायत कर सकता है. तब मामला अश्लीलता का बनता है. इसके तहत आईपीसी की धारा 599 के तहत कार्रवाई हो सकती है.
क्यों मुश्किल है सीडी बनाने वाले को पकड़ना?
आईटी एक्ट के तहत ऐसे सीडी मामलों में भी कई तरह की कार्रवाई हो सकती है. साइबर लॉ एक्सपर्ट पवन दुग्गल कहते हैं:
• ऐसे मामलों में सीडी बनाने वाले का पता लगाना बहुत मुश्किल काम होता है. वो बच निकलते हैं क्योंकि सीडी पर डिजिटल डाटा होता है, कोई नाम नहीं होता.
• सीडी बनाने के बाद कई ऐसे तरीके हैं जिससे ये सबूत मिटाए जा सकते हैं कि किसने सीडी बनाई है. इन तरीकों को मास्किंग तकनीक कहते हैं. गूगल पर ये तकनीक उपलब्ध हैं.
• आईटी एक्ट में सेक्स सीडी देखना अपराध नहीं है.
• लेकिन उसका प्रकाशन करना या उसमें सहायता करना अपराध है.
• पुलिस चाहे तो इस मामले में सोर्स से मिली जानकारी के आधार पर मामला दर्ज़ कर सकती है.
• आईटी एक्ट के तहत किसी भी जगह इस तरह के वीडियो को सेव कर कर रखना अपराध माना जाता है.
• इसके तहत दोषी पाए जाने पर अधिकतम पांच साल की सज़ा हो सकती है.
क्या सीडी में मौजद लोगों की छवि ख़राब होती है?
आखिर ऐसी सीडी क्यों बनाते हैं लोग? इस सवाल पर समाजशास्त्री आशीष नंदी कहते हैं, 'इस पर हालांकि कोई स्टडी नहीं हुई है, लेकिन महज कुछ वोट पाने के लिए लोग ऐसा करते हैं.'
सीडी में फिल्माए गए लोगों की छवि कितनी ख़राब होती है? इस सवाल के जवाब में नंदी कहते हैं, "आजकल नेताओं की इतनी ज़्यादा सीडी बाज़ार में आ गई है कि लोगों को कुछ दिन बाद नाम भी याद नहीं रहता. चुनाव आते आते ये सब बातें लोगों के जेहन से निकल जाती है. पर कोशिश ज़रूर होती है कि ऐसी सीडी सही टाइम पर रिलीज़ हो. पांच वोट भी विरोधियों को इस वजह से ज़्यादा मिल जाएं तो बहुत बड़ी बात होती है."
सीडी से जुड़े पिछले मामले
हालांकि ये पहला मौका नहीं है जब किसी नेता की कोई कथित सीडी सामने आई है. देश में कई ऐसे नेता हैं जिनकी इस तरह की सीडी ने करियर ख़राब कर दिया लेकिन कई नेता ऐसे हैं जिनकी ऐसी सीडी आई पर करियर पर असर नहीं हुआ.
सबसे ताज़ा मामला है छत्तीसगढ़ के लोक निर्माण मंत्री राजेश मूणत की कथित सेक्स सीडी का. इस साल अक्टूबर के महीने में उनकी कथित सेक्स सीडी लीक हो गई.
इस मामले में आज भी पत्रकार विनोद वर्मा सलाखों के पीछे ही हैं. उन पर सीडी की नकल बनावाने का आरोप लगा है.
छत्तीसगढ़ सरकार ने पूरे मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं. हालांकि मंत्री राजेश मूणत ने कथित सीडी के सामने आने पर उसे प्रेस कांफ्रेंस कर फ़र्जी क़रार दिया.
पिछले साल दिल्ली सरकार में महिला कल्याण मंत्री संदीप कुमार की कथित सेक्स सीडी सामने आई थी. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सीडी सामने आने के तुंरत बाद उन्हे मंत्रिमंडल से हटा दिया.
संदीप कुमार की इसके बाद गिरफ़्तारी भी हुई लेकिन बाद में रिहा हो गए. मामला सामने आने के बाद संदीप कुमार को पार्टी ने प्राथमिक सदस्यता से निलंबित भी कर दिया था.
साल 2013 में मध्यप्रदेश में पूर्व वित्त मंत्री राघव भाई जी की एक सीडी ने वहां की राजनीति में भूचाल ला दिया था, जिसके बाद वो अपने पद से हाथ धो बैठे थे.
ऐसी ही एक सीडी कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी की साल 2012 में सामने आई थी. इसके कुछ दिन बाद अभिषेक मनु सिंघवी ने पार्टी के प्रवक्ता पद और क़ानून और न्याय मामलों की स्टैडिंग कमेटी से इस्तीफ़ा दे दिया था. हालांकि प्रवक्ता पद पर उनकी कुछ साल बाद दोबारा वापसी हो गई है.
साल 2009 में आंध्र प्रदेश के पूर्व राज्यपाल नारायण दत्त तिवारी का भी एक तथाकथित वीडियो एक टीवी चैनल पर प्रसारित हुआ था. आंध्र ज्योति नाम के अख़बार से जुड़े टीवी चैनल ने वो वीडियो प्रसारित किया था, जिसके बाद नारायण दत्त तिवारी को इस्तीफ़ा देना पड़ा था.
2005 में भाजपा नेता संजय जोशी भी सेक्स सीडी सामने आई थी, लेकिन बाद में मध्य प्रदेश पुलिस ने उन्हें निर्दोष क़रार दिया था.
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