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'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ फिर उनसे झाड़ू पोंछा कराओ'
- Author, नारायण बारेठ
- पदनाम, जयपुर से बीबीसी हिंदी के लिए
राजस्थान सरकार की एक मासिक पत्रिका में स्वस्थ रहने के लिए महिलाओं को आटा चक्की चलाने और घर में झाड़ू पोंछा करने का सुझाव देने पर विवाद हो गया है.
सरकार की शिक्षकों के लिए निकलने वाली पत्रिका 'शिविरा' में स्वस्थ रहने के सरल उपाय प्रकाशित किए गए हैं.
इन्हीं में सुझाव दिया गया है, "स्त्रियां चक्की पीसना, बिलौना बिलोना, पानी भरना, झाड़ू-पोंछा लगाना आदि घर के कामों में भी अच्छा व्यायाम कर सकती हैं."
लेकिन सरकारी पत्रिका में प्रकाशित इस सुझाव पर अब महिला संगठन सवाल उठा रहे हैं. महिला संगठनों ने सरकार से पूछा है कि क्या सरकार महिलाओं को फिर से चूल्हा-चौका के उस दौर में वापस भेजना चाहती है जहां से वे निकलकर आई हैं.
दकियानूसी सोच
महिला फ़ेडरेशन की निशा सिद्धू इसे दकियानूसी सोच बताते हुए कहती हैं, "ये तार्किक नहीं है, निश्चित तौर पर महिलाएं जिससे निकलकर आई हैं उन्हें वापस वहीं धकेलने की कोशिश है. जैसी सरकार है वैसा ही माहौल वो औरतों को देने की कोशिश कर रहे हैं. ये दकियानूसी सोच ग़लत है."
किसी ज़माने में राजस्थान में महिलाएं घर-घर चक्की चलाती थीं और गेहूं को पीसकर आटा बना देती थीं. ये रोज़मर्रा का काम था. लेकिन अब आमतौर पर घरों में चक्की नहीं चलाई जाती है.
विद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष राम कृष्ण अग्रवाल सवाल करते हैं कि शिक्षा विभाग किस युग की बात कर रहा है?
अग्रवाल कहते हैं, "हम बुलेट ट्रेन के युग में जा रहे हैं और वो तांगा गाड़ी में यात्रा करने की बात कर रहे हैं. इस तरह के विचारों को प्रकाशित होने से रोका जाना चाहिए."
वहीं शिक्षा निदेशक नथमल डीडेल कहते हैं कि न ही ये विभाग की राय है और न ही सरकार की. विवाद होने के बाद लेख पर स्पष्टीकरण देते हुए उन्होंने कहा, " न ही विभाग ने और न ही सरकार ने ये कहा है कि ये काम सिर्फ़ महिलाएं ही कर सकती हैं. कई क्षेत्रों में महिलाएं पुरुषों से बेहतर काम कर रही हैं."
नथमल डीडेल कहते हैं, "लेख में ये नहीं कहा गया है कि महिलाओं को ऐसा करना ही चाहिए बल्कि ये कहा गया है कि वो चाहें तो ऐसा कर सकती हैं."
आटा चक्की चलाना या पोंछा लगाना शारीरिक श्रम है जिसमें शरीर की ऊर्जा ख़र्च होती है. ऐसी शारीरिक गतिविधयों से शरीर स्वस्थ रहता है.
'पोंछा लगाना व्यायाम करने जैसा'
कई महिलाएं मानती हैं कि ऐसा करना व्यायाम करने जैसा ही है. दिल्ली निवासी नंदा काणयाल कहती हैं, "पोंछा लगाना व्यायाम करने जैसा है, मैं अपनी युवा बेटी को भी ऐसा करने की सलाह देती हूं."
राजस्थान सरकार के सुझाव पर टिप्पणी करते हुए वरयम कौर ने ट्विटर पर लिखा, "बेटी, बचाओ बेटी पढ़ाओ फिर उनसे झाड़ू पोंछा कराओ, घर में फ्री की नौकरानी बनाओ."