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गुजरात: व्यापारियों का जीएसटी पर ग़ुस्सा, चुनाव पर चुप्पी
गुजरात में विधानसभा चुनाव को लेकर रैलियों का दौर जारी है. बीजेपी के लिए ये चुनाव साख़ का सवाल है. वहीं, कांग्रेस के लिए ये राहुल गांधी को राजनीति में स्थापित करने का एक मौक़ा है .
लेकिन ये एक बड़ा सवाल है कि गुजरात की जनता ख़ासतौर पर वहां के व्यापारी क्या सोचते हैं. नोटबंदी और जीएसटी जैसे बड़े फ़ैसलों को जहां केंद्र सरकार अपनी उपलब्धि गिना रही है. वहीं, व्यापारी वर्ग इसे लेकर थोड़ी अलग राय रखता है.
बीबीसी संवाददाता विनीत ख़रे ने अहमदाबाद के पांच कुआं सिंधी मार्केट में कपड़ा कारोबारियों से बातचीत की और ये जानने की कोशिश की कि उनके लिए इस चुनाव के क्या मायने हैं.
इस बाज़ार में करीब 400 दुकानें हैं और इस बाजार से करीब 10 हज़ार लोगों को रोज़गार मिलता है.
सिंधी मार्केट के सेक्रेटरी राजेश भाई का कहना है कि नोटबंदी और जीएसटी इस बार चुनावों में एक बड़ा मुद्दा है. इस बाज़ार में ज़्यादातर सिंधी दुकानदार हैं.
राजेश बताते हैं कि जीएसटी के लागू हो जाने से असमंस की स्थिति बढ़ गई है. ये इतना घुमावदार और जटिल प्रक्रिया है कि इसे समझने में ही बहुत परेशानी हो रही है.
राजेश बताते हैं कि अगर कोई साड़ी 1000 रुपये की है तो उस पर 50 रुपये अतिरिक्त देना होता है जिसके लिए ग्राहक अभी तैयार नहीं है. इससे परेशानी हो रही है.
बाज़ार में ही एक दुकान के मालिक बताते हैं कि जीएसटी के ही विरोध में एक बार यहां 15 दिन के लिए दुकानें भी बंद रही थीं. दुकानदारों का कहना है कि उन्होंने बहुत से लोगों से अपनी परेशानी बताई लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ. उनका कहना है कि बड़े लोग हमारी परेशानी सुन नहीं रहे और ग्राहक कहता है कि हम ज़्यादा पैसे क्यों दें.
एक अन्य दुकानदार मुकेश का कहना है कि जीएसटी का चुनाव पर बहुत बड़ा असर होगा. इससे सिर्फ़ परेशानी ही हो रही है. कई बार लगता है कि दुकान बंद करके कुछ और शुरू करना होगा.
जेसाराम का कहना है कि ये मार्केट 1955 में शुरू हुआ था, लोगों को जीएसटी की सही जानकारी नहीं है, ऐसे में परेशानी बहुत ज़्यादा है. अगर यह टैक्स डायरेक्ट होता और इतना पेपर वर्क न होता तो परेशानियां न होती.
बाज़ार के लोगों में मीडिया को लेकर भी काफी नाराज़गी है. उनका कहना है कि मीडिया उनकी तकलीफ़ों पर बात ही नहीं करती. दुकानदारों का कहना है कि जब से जीएसटी लागू हुआ है बिज़नेस गिर गया है. पचास फ़ीसदी तक बाज़ार प्रभावित हुआ है.
एक अन्य दुकानदार राकेश कहते हैं कि जीएसटी के बाद से व्यापार एकदम गिर हो गया है.
हालांकि. वो नोटबंदी को इतना प्रभावी नहीं मानते हैं. दुकानदारों में ग़ुस्सा तो है लेकिन कोई भी खुलकर ये नहीं बोल रहा कि क्या असर पड़ेगा. पर वो ये भी समझते हैं कि चुनाव हैं इसलिए पार्टियां वादे कर रही हैं लेकिन वादे तो वादे ही होते हैं.
दुकानदार कहते हैं कि हमने हर किसी से बात की लेकिन किसी ने मदद नहीं की. ऐसे में ये चुनाव कांग्रेस के लिए एक बड़ा मौका साबित हो सकता है वहीं भाजपा को व्यापारियों की समस्याओं को समझना होगा.
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