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क्या युद्ध में भी जेट हाइवे पर उतर सकते हैं?
मंगलवार सुबह उत्तर प्रदेश के जिस हाइवे पर गाड़ियां और बस दौड़ा करती हैं, वहां विमान रफ़्तार भर रहे थे. भारतीय वायु सेना के 16 विमानों ने लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर टच एंड गो और लैंड किया.
विमानों की भाषा में टच एंड गो का मतलब ज़मीन के बेहद करीब आना या पल भर के लिए छूना और फिर उड़ जाना होता है. लैंडिंग में विमान ज़मीन पर उतरने की प्रक्रिया पूरी करता है.
स्पेशल ड्रिल के तहत 35 हज़ार किलो का सी-130 जे सुपर हरक्यूलीज़ एयरक्राफ़्ट हाइवे पर उतरा जबकि सुखोई 30 और मिराज 30 ने पट्टी पर टच डाउन करने के बाद दोबारा उड़ान भरी.
पहले भी उतरे हैं हाइवे पर विमान
मिराज 2000 फ़ाइटर प्लेन और सुखोई-30 उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेसवे पर दो बार उतरे हैं. साल 2015 में मिराज 2000 पहली बार उतरा था. पिछले साल नवंबर में सुखोई-30 लखनऊ-एक्सप्रेसवे के 3.3 किलोमीटर लंबे हिस्से पर उतरा था.
देश भर में ऐसे करीब 12 हाइवे चुने गए हैं जिनकी चौड़ाई काफ़ी है और उन्हें फ़ाइटर जेट विमान उतरने के काबिल माना जाता है. इन्हें आपातकालीन स्थिति में विमान उतारने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.
लेकिन आख़िर इस पूरी कवायद का मक़सद क्या है? ऐसा बताया जा रहा है कि तीन घंटे चली इस प्रक्रिया का उद्देश्य ये जांचना है कि क्या किसी आपात स्थिति में जब एयरबेस को बम या मिसाइल से निशाना बना दिया जाए और वो उपलब्ध ना हो तो हाइवे को लैंडिंग स्ट्रिप के रूप में इस्तेमाल किया जा सके.
किन मुल्क़ों ने उतारे सड़क पर विमान?
लेकिन क्या वाकई ऐसा हो सकता है? क्या कभी किसी जंग के दौरान ऐसा किया गया है? भारत के अलावा और कौन से ऐसे देश हैं जो हाइवे पर विमान उतारने में दक्षता रखते हैं?
यूरोप और अमरीका से लेकर पाकिस्तान और ताईवान तक, सभी मुल्क़ों में इस तरह के प्रयोग किए गए हैं. लेकिन क्या हाइवे को ख़ास तौर पर इस तरह डिज़ाइन किया जाता है कि उस पर फ़ाइटर जेट उतर सकें?
news.com.au में बेनेडिक्ट ब्रूक ने लिखा है, ''मध्य जर्मनी के ए44 ऑटोबान को देखिए तो पहली नज़र में पता नहीं चलता कि वो क्या सीक्रेट छिपाए है. लेकिन बुरन के क़रीब सड़क बदलने लगती है. यहीं पर ए44 सीक्रेट मिलिट्री रनवे भी बन जाती है.''
जर्मनी की सड़क में क्या ख़ास?
उन्होंने कहा, ''मुड़ती हुई सड़कें अचानक सीधी हो जाती हैं, दोनों तरफ़ की सड़कों के बीच में दौड़ने वाली हरियाली पट्टी गायब हो जाती है. और साइड में जो बड़ी कार पार्किंग दिख रहा है, वो असल में एयरक्राफ़्ट पार्किंग बे है.''
ब्रूक ने कहा, ''जर्मनी अकेला देश नहीं है जहां सड़क के रूप में हाइवे पट्टी है. स्विट्ज़रलैंड, पोलैंड, सिंगापुर, ताईवान और फ़िनलैंड भी ऐसे मुल्क़ हैं जहां रनवे बनने वाली सड़कें मौजूद हैं लेकिन पता नहीं चलता. ऑस्ट्रेलिया भी पीछे नहीं है.''
ऐसा कहा जाता है कि हाइवे स्ट्रिप पहली बार कोल्ड वॉर के दौरान बनाई गई थी. इसमें लड़ाकू विमानों को हाइवे के बराबर में झाड़ियों में छिपाया जाता था ताकि वो पल भर में उड़ान भर सकें.
कहां उतर सकते हैं विमान?
ब्रूक के मुताबिक, ''एक मामले में सरकार तो काफ़ी बढ़ गई और ये गाइडलाइंस भी छापी कि कौन सी सड़कों को अच्छा रनवे बनाया जा सकता है.''
इन गाइडलाइंस में कहा गया, ''ये सपाट होनी चाहिए जहां आसपास कोई भी 45 मीटर ऊंचा ढांचा ना हो, ना कोई इंटरसेक्शन हो. ऐसे इलाके में कभी बाढ़ का ख़तरा ना हो और ना ही यहां पशु चराए जाते हों.''
कई ख़बरों में ये भी कहा जाता है कि अमरीका में इंटरस्टेट हाइवे को इस तरह बनाया गया है कि वो जंग के दौरान ज़रूरत पड़ने पर हवाई पट्टी का काम कर सकें. हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि कोई नहीं करता.
क्या हुआ था भारत-पाक युद्ध में?
भारत के लिए इन हाइवे पर लड़ाकू विमान उतारने के क्या मायने हैं? भारत का पाकिस्तान के साथ तनाव बना ही रहता है और अतीत में दोनों के बीच हुए युद्ध में पाकिस्तान ने भारत के हवाई ठिकानों पर कई बार हमला भी बोला था.
ऐसे में हाइवे को रनवे की तरह इस्तेमाल करना सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है.
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