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किम जोंग उन के बाद उत्तर कोरिया के दो सबसे ताक़तवर शख़्स
अमरीका और चीन समेत दुनिया के कई देशों ने उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम की वजह से उस पर कई प्रतिबंध लगाए हैं.
इसके बावजूद उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम आगे बढ़ रहा है. अमरीका ने सयुंक्त राष्ट्र में इस मुद्दे पर चिंता जाहिर की है.
सयुंक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत निकी हैली ने कहा, "बीते 24 सालों से, हमारी तमाम कोशिशों के बाद भी उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम पहले से भी ज़्यादा ख़तरनाक हो गया है."
ऐसे में सवाल उठता है कि आख़िर उत्तर कोरिया अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को आगे कैसे बढ़ा रहा है?
कौन बनाता है उत्तर कोरिया के लिए बम?
उत्तर कोरिया के लगातार आगे बढ़ते हुए परमाणु कार्यक्रम का श्रेय दो परमाणु विज्ञानी री होंग सोप (न्यूक्लियर वेपंस इंस्टीट्यूट के प्रमुख) और संग-मू (उप निदेशक) को जाता है.
किम जोंग उन की परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी महत्वाकांक्षाएं इन्हीं वैज्ञानिकों के कंधों पर टिकी हुई हैं.
जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के शोधार्थी माइकल मेडन बताते हैं कि इन दो वैज्ञानिक के पास असीम शक्ति है और ये पूरे उत्तर कोरियाई परमाणु वैज्ञानिक समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं.
वे बताते हैं कि दोनों वैज्ञानिक उत्तर कोरियाई न्युक्लियर फ़िजिक्स के पिता कहे जाने वाले सो संग-कक के स्टूडेंट थे.
ख़ास बात ये है कि सो संग-कक किम जोंग उन के पिता के क़रीबी सलाहकार थे.
प्रतिभा के कायल पश्चिमी वैज्ञानिक
स्टेनफॉर्ड यूनिवर्सिटी में परमाणु विज्ञान के प्रोफ़ेसर सेगफ्राइड हेकर उत्तर कोरियाई परमाणु संस्थानों में पहुंचने वाले गिने-चुने पश्चिमी वैज्ञानिकों में से एक हैं.
हेकर ने री होंग सोप के निदेशक पद पर रहते हुए साल 2004 से 2010 के बीच योंगब्योन न्यूक्लियर साइंटिफ़िक रिसर्च सेंटर की कई यात्राएं कीं.
हेकर ने अपने इंटरव्यू में कहा, "मैं री होंग सोप को ईमानदारी से मेरे सवालों का जवाब देख और उनकी तकनीकी सक्षमता से काफ़ी प्रभावित थे. इससे हमारी स्टेनफ़ॉर्ड टीम को काफ़ी फ़ायदा मिला."
हेकर आगे बताते हैं कि प्लूटोनियम की जटिलताओं पर बात करते हुए उन्हें हाल ही में पैदा किए गए प्लूटोनियम को पकड़ने का मौका दिया गया.
साल 2016 में दोनों वैज्ञानिकों चौथे परमाणु परीक्षण में सफलता के बाद किम जोंग उन मेडल से सम्मानित होने वाले पहले व्यक्ति बने हैं.
इसके बाद छठवें परमाणु परीक्षण में सफलता के बाद किम जोंग उन ने दोनों वैज्ञानिकों के सम्मान में आधिकारिक समारोह आयोजित किए थे.
यूएन से ब्लैक-लिस्ट हैं ये वैज्ञानिक
उत्तर कोरियाई परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने वाले इन वैज्ञानिकों को सयुंक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से ब्लैक लिस्ट किया जा चुका है.
साल 2009 में छपी सयुंक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, री होंग सोप ने परमाणु हथियार बनाने के लिए प्लूटोनियम के उत्पादन करने वाले तीन प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया.
सयुंक्त राष्ट्र संघ ने इसी साल री होंग सोप और संग मू को सयुंक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से ब्लैक-लिस्ट कर दिया था.
सयुंक्त राष्ट्र संघ ने इन वैज्ञानिकों पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि होंग संग मू ने अपने देश के परमाणु हथियारों में अहम भूमिका निभाई है और री होंग सामूहिक जनसंहार के हथियारों के विकास के प्रति समर्पित हैं.
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