क्या शाहजहां आगरा में काला ताजमहल बनवाना चाहते थे?

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- Author, कमलेश
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
ताजमहल आजकल चर्चा में बना हुआ है. पहले इसे उत्तर प्रदेश के पर्यटन प्रसार से जुड़ी एक बुकलेट में जगह न देने पर विवाद हुआ था.
अब बीजेपी के विधायक संगीत सोम ने ताजमहल के ऐतिहासिक महत्व पर सवाल उठा दिया जिसे लेकर बवाल मच गया.
ताजमहल को लेकर होने वाले विवादों के बीच इस स्मारक का आकर्षण और भव्यता हमेशा बनी रहती है. यह वास्तुकला के बेहतरीन उदाहरण और प्यार की निशानी के तौर पर लोगों के दिलों को हमेशा छूता रहा है.
ताजमहल के विवादों के साथ ही किसी भी महान इमारत की तरह इससे जुड़े मिथक और कहानियां भी हैं.
कई ऐसी प्रचलित बातें हैं जो ज़बानी तौर पर एक से दूसरे तक पहुंचती गईं.
काले ताजमहल का सच

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इसी तरह की एक कहानी ये भी है कि शाहजहां एक दूसरा ताजमहल भी बनाना चाहते थे, जो एक काला ताजमहल होता.
उत्तर प्रदेश सरकार की ताजमहल पर बनी वेबसाइट पर दी गई एक कहानी के मुताबिक शाहजहां काले संगमरमर से एक और ताजमहल बनाने की इच्छा रखते थे.
यह काला ताज मौजूदा मकबरे के सामने यमुना नदी की दूसरी तरफ माहताब बाग में बनाने की योजना थी.
शाहजहां इसमें अपना मकबरा बनाने चाहते थे. लेकिन, शाहजहां का ये सपना पूरा नहीं हो सका क्योंकि अपने बेटे औरंगज़ेब के साथ उनका टकराव शुरू हो गया था.
औरंगज़ेब ने शाहजहां को घर में नज़रबंद कर लिया था.

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वेबसाइट के मुताबिक इस कहानी का ज़िक्र यूरोपीय लेखकर जेन-बैप्टाइज टेवरनियर ने किया था जो 1665 में आगरा गए थे.
कहा जाता है कि अपनी बीमारी और नज़रबंदी के दिनों में शाहजहां उनके कमरे की दीवार पर एक खास एंगल में लगे हीरे के ज़रिए लेटे हुए ही ताजमहल का दीदार किया करते थे.
हालांकि, कई इतिहासकार इस कहानी को काल्पनिक भी कहते हैं.
जेएनयू में मध्यकालीन इतिहास के प्रोफेसर नजफ हैदर बताते हैं, ''काले ताजमहल की कहानी में बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है. ये एक मनगढ़ंत कहानी है.''
उन्होंने कहा, ''विदेश से आने वाले पर्यटकों के बीच ताजमहल को लेकर बहुत सारी कहानियां हैं. दरअसल, उन्हें ताजमहल आकर्षक तो लगता था लेकिन उन्हें इसके बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं मिल पाती थी. इस कारण भी कई मिथक हैं. अंग्रेजी में होने के कारण उनकी किताबें आसानी से उपलब्ध हैं और इसलिए इनमें लिखी बातें ज्यादा प्रचलित हो जाती हैं.''
मज़दूरों के हाथ काटने की कहानी

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ताजमहल को लेकर यह कहानी भी सुनी जा सकती है कि शाहजहां ने इसे बनाने वाले मज़दूरों के हाथ काट दिए थे. ये किस्सा भी है कि एक मज़दूर ने हाथ काटने से पहले ताजमहल की छत पर छेद कर दिया था जिससे पानी टपकता है.
नजफ हैदर बताते हैं कि इस कहानी में बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है. वह कहते हैं, ''हम ये क्यों नहीं सोचते कि शाहजहां को अगर हाथ काटने होते तो वो उन लोगों के काटता जिनकी ताजमहल की कारीगरी में मुख्य भूमिका थी, जो उस्ताद थे. मजदूरों के हाथ काटकर क्या मिलने वाला था. जबकि उस समय मज़दूरों को पूरा मेहनताना देकर काम कराया गया था. इसके प्रमाण भी उपलब्ध हैं.''
उन्होंने बताया कि इस तरह की कहानियां गाइड की गढ़ी हुई हैं. उनके पास ताजमहल के बारे में बताने के लिए कुछ नया नहीं होता था, ऐसे में वो टूरिस्ट को आकर्षित करने के लिए नई-नई कहानियां गढ़ते थे.
मुमताज के चार वादे

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ताजमहल को मुमताज के जन्नत के घर की कल्पना पर आधारित बताया जाता है. इसे जन्नत की तरह ही खूबसूरत बनाने की कोशिश की गई और बनावट के खास तरीकों को अपनाया गया.
मुमताज जब जिंदा थीं तो उन्होंने शाहजहां से चार वादे लिए थे. वेबसाइट के मुताबिक पहला वादा था कि शाहजहां उनके लिए ताजमहल बनवाएंगे.
दूसरा वादा था कि वो दुबारा शादी करेंगे, तीसरा वादा था कि बच्चें को लेकर नरमी बर्तेंगे और चौथा वादा था कि हर बरसी पर उनके मकबरे पर जाएंगे.
लेकिन, बीमारी और नज़रबंद होने के कारण शाहजहां अपना चौथा वादा पूरा नहीं कर पाए.
ताजमहल की खासियतें

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ताजमहल को बनाने की शुरुआत 1631 में हुई थी और यह 1653 में पूरी तरह बनकर तैयार हुआ.
इस बनाने के लिए उत्तर भारत के करीब 20 हजार मज़दूरों को बुलाया गया था और ताजमहल को इंडो-इस्लामिक वास्तुकला का मेल बताया जाता है.
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