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नज़रिया: क्या गुजरात चुनाव को लेकर नर्वस हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी?
- Author, अजय उमट
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार
'गुजरात गौरव यात्रा' के समापान पर प्रधानमंत्री मोदी सोमवार को गांधीनगर में थे.
गुजरात चुनावों की तारीखों के ऐलान से पहले ये बीजेपी के कैम्पेन का एक तरह से आगाज़ था.
वे कांग्रेस पर तल्ख दिखे. उन्होंने कहा, "जब जब गुजरात का चुनाव आता है, कांग्रेस को बुख़ार ज़्यादा आता है, तकलीफ़ ज़्यादा होती है."
गुजरात में बीजेपी पिछले दो दशकों से सत्ता में है और विपक्ष की राजनीति में कांग्रेस का ग्राफ़ ऊपर-नीचे जाता रहा है.
इस बार के विधानसभा चुनावों को कांग्रेस अपने राजनीतिक वनवास से वापसी के मौके के तौर पर देख रही है.
बीबीसी हिंदी के संवाददाता कुलदीप मिश्रा ने वरिष्ठ पत्रकार अजय उमट से इस बारे में बातचीत की.
ये रहा उम्मट का नज़रिया
गांधीनगर की रैली में मोदी का जो लहज़ा था वो काफी आक्रामक था. उन्होंने पहली बार गुजरात में विकासवाद बनाम वंशवाद पर बात की.
उन्होंने राहुल गांधी, सोनिया गांधी, जवाहरलाल नेहरू पर जमकर टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि कांग्रेस तो पैदाइश से ही गुजरात के विकास के विरोध में है.
गुजरात में पहली बार ऐसा हुआ है कि भाजपा ने अपना एजेंडा बदला है. सबसे पहले तो उनके चुनाव का जो कैंपेन था वो शुरू हुआ था कि गुजरात में कांग्रेस नहीं चाहिए.
फिर बाद में जब लोगों ने कहा कि ये नकारात्मक कैंपेन है तो उसके बाद 'गरजे गुजरात' कैंपेन आया.
उसके बाद उसका भी ट्वीटर पर काफी मज़ाक होने लगा तो फिर भाजपा ने 'अड़ीखम गुजरात' कहा.
मोदी का भाषण अहम क्यों?
आज नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में जो आगे किया वो विकासवाद बनाम वंशवाद था. इस मुद्दे पर आक्रामक रहे लेकिन जीएसटी की बात आते ही बचाव मुद्रा में आ गए.
उनका कहना था कि जीएसटी को लेकर सिर्फ भाजपा या भारत सरकार को बदनाम नहीं करना चाहिए. कांग्रेस की सरकार भी इसमें शामिल है.
उन्होंने अपने व्यापारियों को साथ लेने की कोशिश की और कहा कि जीएसचटी आपको तंग करने के लिए नहीं है. जीएसटी हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था के विकास के लिए है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस को गुजरात, सरदार पटेल और जनसंघ पसंद नहीं था. तो एक तरह से गुजरात बनाम कांग्रेस की बहस बनाने की कोशिश की?
कांग्रेस पर आरोप क्या?
मोदी ने जवाहरलाल नेहरू की भर्त्सना की और कहा कि कांग्रेस ने सरदार पटेल के साथ अन्याय किया, मणिबेन पटेल के साथ अन्याय किया, मोरारजी देसाई के साथ अन्याय किया, बाबूभाई जसभाई पटेल के साथ अन्याय किया.
यहां तक कि वो कहते गए कि माधव सिंह सोलंकी जो गुजरात के पू्र्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं और जिनकी वजह से कांग्रेस को सबसे ज़्यादा 149 सीट मिली थीं, उनसे भी सोनिया गांधी ने बोफोर्स वाले मामले में इस्तीफ़ा ले लिया.
ये सब कह कर मोदी जी ने ये बताने की कोशिश की कि गुजरात का कोई भी नेता होता है तो उसके साथ कांग्रेस अन्याय करती है.
सत्ता विरोधी रुझान है?
साथ ही गुजरात का कोई भी विकास प्रोजेक्ट हो चाहे वो नर्मदा प्रोजेक्ट हो या डैम बनाने की कोशिश हो, कांग्रेस की केंद्र सरकार इजाज़त नहीं देती थी इसलिए कांग्रेस गुजरात विरोधी है.
तथ्यात्मक तौर पर क्या ये यकीन के काबिल है गुजरात की जनता के लिए कि कांग्रेस एक तरफ है और गुजरात एक तरफ?
सोशल मीडिया में जिस तरह से भाजपा का मखौल उड़ रहा है तो कहीं ना कहीं सत्ता विरोधी रुझान गुजरात में दिख रहा है.
प्रधानमंत्री जिस तरह एक महीने में 3 बार एक राज्य में आए हैं और 22-23 को फिर से आने वाले हैं तो ये कह सकते हैं कि भाजपा को भी ये चुनाव चुनौती भरा लग रहा है.
इसलिए भाजपा कोई कसर छोड़ना नहीं चाहती.
भाजपा संगठन का क्या हाल?
कई लोग कह रहे हैं कि योगी आदित्यनाथ या जो भाजपा के दूसरे नेता गुजरात में प्रचार के लिए पहुंच रहे हैं, उन्हें वहां अपेक्षित भीड़ नहीं मिल रही.
सही बात है. जब नरेंद्र मोदी और अमित शाह की सभा होती है तो भाजपा का पूरा संगठन लग जाता है.
जैसे आज भी गांधीनगर और अहमदाबाद के बीच जो घाटगाम था, वहां काफी भीड़ थी.
लेकिन योगी आदित्यनाथ का जो रोड शो था दक्षिण गुजरात में, उसे कोई खास प्रतिक्रिया नहीं मिली. यही हाल राजनाथ सिंह और बाकी नेताओं का है.
हार्दिक पटेल की भूमिका
बीच में एक बात उठी थी कि हार्दिक पटेल और कांग्रेस में तालमेल हो गया है.
एक बात साफ है कि हार्दिक पटेल भाजपा के खिलाफ अपने स्टैंड पर टिके हुए हैं और वो भाजपा को हराने में कांग्रेस की मदद भी करना चाहते हैं. ऐसा सभी आब्ज़र्व कर रहे हैं.
एक इंटरव्यू में मैंने हार्दिक पटेल से इस बारे में पूछा भी था कि अगर उनके संगठन के लोग कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहें तो उनका रुख क्या होगा.
इस पर हार्दिक का जवाब था कि वे इसका समर्थन करेंगे. जहां तक मेरी जानकारी है, हार्दिक के लोगों ने 20 टिकट मांगे हैं. लग रहा है कि 9-12 टिकट पर समझौता हो जाएगा.
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