गुजरात: दलितों के साथ हिंसा और भेदभाव के मामले बढ़ने की वजह क्या है?

उदित राज

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गुजरात में दलित उत्पीड़न की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं. गरबा से लेकर मूछें रखने तक में कथित उत्पीड़न के मामले भी आए हैं.

'बीबीसी हिन्दी रेडियो' के कार्यक्रम 'इंडिया बोल' में चर्चा के दौरान बीजेपी सांसद उदित राज ने जातिवाद को राजनीतिक समस्या बताया है. उन्होंने कहा कि कोई भी पार्टी जाति ख़त्म नहीं करना चाहती.

उदित राज ने कहा, ''क्या दलित इंसान नहीं हैं. दूसरे देश के लोग आज क्या सोचते होंगे ऐसी घटनाओं पर. क्या इतनी बड़ी आबादी को अलग-थलग कर देना, उनको अपमानित करना, उनको वंचित करके रखना सही है? यह राष्ट्रविरोधी काम है. छुआछूत करना, गरबा देखने पर मारपीट करना, अतीत में और भी ख़राब स्थिति रही है.''

जब तक पार्टी और सरकार से परे हटकर राजनीतिक दल इस मुद्दे पर काम नहीं करेंगे, तब तक यह समस्या नहीं सुलझ सकती. इस समस्या को दलगत राजनीति के चक्कर में नज़रअंदाज़ किया जाता रहा है.

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किस वजह से होता है भेदभाव?

एक सवाल के जवाब में उदित राज ने कहा, ''दलितों के साथ भेदभाव उनकी आर्थिक स्थिति की वजह से नहीं, मानसिकता की वजह से है. बड़े-बड़े अफसर जाति व्यवस्था के शिकार हैं. इस समस्या को राजनीति की भेंट न चढ़ाएं और सरकार से जोड़कर न देखें.''

उन्होंने कहा कि भारत स्वच्छ तभी हो सकता है जब जात-पात को खत्म कर दिया जाए. सभी समुदायों और जातियों के लोगों के बीच एकजुटता लाने के सवाल पर बीजेपी सांसद ने कहा, ''कोई भी पार्टी जाति समाप्त नहीं करना चाहती है. जिस तरह से यूरोप में जनतंत्र लागू है वैसे ही हमने भी लागू किया. जबकि हमारे यहां यूरोप के मुकाबले अलग समाज है. यही वजह है कि जाति व्यवस्था टूटी नहीं.''

गुजरात में दलितों के ख़िलाफ़ हिंसा के मामले में उदित राज ने कहा कि छिटपुट घटनाएं होती रहती हैं.

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'लोग खुद पैदा करते हैं भेदभाव'

हिंसा की ज़िम्मेदारी सरकार क्यों नहीं लेती? इस सवाल पर बीजेपी सांसद ने कहा कि यह सिर्फ़ सामाजिक सोच है. लोग भेदभाव खुद से पैदा करते हैं. जाति मिटाओ अभियान शुरू होने चाहिए, अभी तो बस छिटपुट अभियान होते हैं. उन्होंने कहा कि जब तक सवर्ण इस मुहिम में योगदान नहीं करेंगे, तब तक ऊंच-नीच का भेद नहीं ख़त्म होगा.

चर्चा में शामिल रहे स्वतंत्र लेखक सुनील वर्मा ने कहा कि जातिगत भेदभाव को ख़त्म करने के लिए सरकार कड़ा एक्शन नहीं ले पा रही है. अगर सरकार ऐसी मुहिम चलाए तो इन्हें रोका जा सकता है.

इस मुद्दे पर बदलाव के लिए राजनीति भूमिका के सवाल पर बीजेपी सांसद ने कहा कि सभी राजनीतिक पार्टियों को कभी न कभी इस पर सोचना पड़ेगा, सरकार को हस्तक्षेप करना होगा, रुढ़िवादी परंपराओं को तोड़ना होगा, जिसका कभी प्रयास नहीं हुआ.

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