रहें तैयार, अगले कुछ महीने पड़ सकती है महंगाई की मार!

प्याज़

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महंगाई के कम होने के फ़िलहाल आसार नहीं हैं, बल्कि आने वाले छह महीनों में यह और बढ़ सकती है.

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (आरबीआई) ने ब्याज़ दरों में बदलाव न करते हुए यथास्थिति को बरक़रार रख ऐसे संकेत दिए हैं. ब्याज दरों में कटौती नहीं करने की जो वजह रिज़र्व बैंक ने बताई है, वो आम आदमी की चिंता बढ़ाने वाली है.

रिज़र्व बैंक का अनुमान है कि आने वाले महीनों में महंगाई बढ़ सकती है, हालांकि रिज़र्व बैंक ने अपने अनुमान में बहुत अधिक बदलाव नहीं किया है.

त्योहार के मौसम से पहले कम कीमत पर कर्ज़ मिलने की उम्मीदों को धक्का देते हुए रेपो रेट 6 फीसदी बरकरार रखा गया है. रेपो रेट वो दर है जिस पर रिज़र्व बैंक अन्य बैंकों को कर्ज़ देता है.

रिज़र्व बैंक का अनुमान है कि महंगाई दर मौजूदा स्तर से बढ़ सकती है और आने वाले छह महीनों में ये दर 4.2 से 4.6 फीसदी के बीच हो सकती है.

कम हुआ आर्थिक विकास का अनुमान

उर्जित पटेल

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आरबीआई ने 2017-18 के ग्रॉस वैल्यू ऐडेड ग्रोथ के अनुमान में भी कटौती कर ली है. पहले 7.3 फीसदी विकास का अनुमान था, अब इसे 6.7 फीसदी कर लिया गया है.

ग्रॉस वैल्यू ऐडेड ग्रोथ का मतलब होता है, उत्पादन में से खपत का ख़र्च घटाकर आंका जाने वाला विकास.

बुधवार को मौद्रिक नीति से जुड़ी प्रेस कॉन्फ़्रेंस में आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के कमज़ोर होने पर भी चिंता ज़ाहिर की.

इस साल जून से लेकर अगस्त तक महंगाई दर में दोगुनी से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई है. जून में यह 1.5 फीसदी, जुलाई में 2.36 फीसदी और अगस्त में 3.4 फीसदी थी. पिछले साल अक्टूबर और इस साल अगस्त में ब्याज़ दरों में कटौती की गई थी.

आज से ही घटे हैं डीजल-पेट्रोल के दाम

डीजल पेट्रोल

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आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल की अगुवाई वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति ने बढ़ती हुई महंगाई पर पैनी निगाह रखी हुई है. आरबीआई ने यह भी कहा है कि जीएसटी को अमल में लाने से जुड़ी दिक्कतों का भी बुरा असर पड़ा है, जिससे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कम अवधि के लिए अस्थिरता आ गई है.

उधर, डीज़ल पेट्रोल के दाम बढ़ने पर केंद्र सरकार पहले ही दबाव में है. इसे लेकर विपक्षी दल भी सरकार पर दबाव बनाने में लगे थे, जिसके बाद सरकार को मजबूरन मंगलवार को पेट्रोल-डीज़ल पर बुनियादी एक्साइज़ ड्यूटी घटाने का फ़ैसला करना पड़ा और बुधवार से ये दोनों 2-2 रुपये प्रति लीटर सस्ते हो गए.

साल 2014 में सत्ता संभालने वाली मोदी सरकार ने पहली बार एक्साइज़ ड्यूटी में कमी की है.

साल 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने राजकाज संभाला तो पेट्रोल पर एक्साइज़ ड्यूटी 9.48 रुपये प्रति लीटर थी जो 2 अक्टूबर, 2017 को बढ़कर 21.48 रुपये पर पहुंच गई थी और बुधवार को 2 रुपए घटने के बाद 19.48 रुपये प्रति लीटर पर रही.

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