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'हिज़्बुल की कमान संभालने जा रहे चरमपंथी की मौत'
- Author, रियाज़ मसरूर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारत प्रशासित कश्मीर में सुरक्षा बलों ने नियंत्रण रेखा पर दो अलग-अलग घटनाओं में पाकिस्तान की बॉर्डर एक्शन टीम (बैट) के हमले को नाकाम करने और एक आला हिज़्बुल कमांडर की मुठभेड़ में मौत का दावा किया है.
भारतीय सेना के प्रवक्ता राजेश कालिया के मुताबिक केरन सेक्टर में भारतीय सेना ने बैट के हमले को नाकाम कर उन्हें वापस भागने पर मजबूर कर दिया.
स्थानीय नागरिकों से पता चला है कि इस इलाके में दो लाशें भी पड़ी है लेकिन अभी तक पुष्टि नहीं हो पाई है कि ये लाशें पाकिस्तान की बॉर्डर एक्शन टीम के सदस्यों की हैं .
वहीं, समाचार एजेंसी पीटीआई ने सेना सूत्रों के हवाले से बताया कि हमले की कोशिश मंगलवार दोपहर एक बजे की गई जिसे नाकाम कर दिया गया.
बैट सदस्य पाकिस्तानी सेना की तरफ़ से की जा रही गोलीबारी और शेलिंग के बीच घुसपैठ की कोशिश कर रहे थे .
इससे पहले भी नियंत्रण रेखा पर भारतीय पोस्ट पर बैट के हमले हो चुके हैं.
हिज़्बुल की कमान संभालने आ रहे नजार की मौत
उधर, भारत प्रशासित कश्मीर के बारामूला में एक चरमपंथी अब्दुल क़यूम नजार की मुठभेड़ में मौत हो गई है.
पुलिस ने मंगलवार को उड़ी में एक मुठभेड़ में नजार की मौत का दावा किया है. पुलिस का कहना है कि वो एक घुसपैठ की कोशिश के दौरान उन्हें मारा गया.
बताया जा रहा है कि नजार साल 2015 तक हिज़्बुल कमांडर थे लेकिन हिज़्बुल मुजाहिद्दीन के उच्च कमांडरों से अनबन हो गई जिसके बाद उन्होंने लश्कर-ए-इस्लाम के नाम से अपना गुट शुरू किया था.
अब्दुल क़यूम नजार को लश्कर-ए-इस्लाम के कारण ज़्यादा जाना जाता है, क्योंकि हिज़्बुल कमांडर के तौर पर उन्हें ज़्यादा पहचान नहीं मिल पाई थी.
2015 में इस गुट ने मोबाइल सेवा देने वाले सर्विस प्रोवाइडर के टावरों पर हमले किए थे. उनका मानना था कि मोबाइल फ़ोन की सुविधा की वजह से ही चरमपंथी कमांडर मारे जाते हैं.
बीते बरसों में नजार के एक साथी मुज़म्मिल उर्फ़ मौलवी की मौत हो गई थी जिसके बाद वो ज़्यादा ख़बरों में नहीं रहे और पाकिस्तान चले गए थे.
पुलिस महानिदेशक एस पी वैद्य के मुताबिक हिज़्बुल मुजाहिद्दीन ने संगठन की कमान संभालने के लिए नजार को नियुक्त किया था. उन्होंने कहा कि ख़ुफ़िया और रणनीतिक अभियान के तहत नजार को मारा गया है ताकि हिज़्बुल मुजाहिद्दीन के पुनर्गठन की प्रक्रिया को रोका जा सके.
समाचार एजेंसी पीटीआई ने बारामूला के एसएसपी इम्तियाज़ हुसैन के हवाले से बताया, '' नजार 2003 में हिज़्बुल कमांडर अब्दुल माजिद डार की मौत के बाद इस संगठन से जुड़े थे.''
कमान पर वार
भारत प्रशासित कश्मीर में हिज़्बुल मुजाहिद्दीन और लश्कर की जो कमांड है उस पर सेना और पुलिस ने ऑपरेशन ऑल आउट के तहत नियंत्रण किया है.
ऑपरेशन ऑल आउट के तहत उच्च स्तर के कमांडर जैसे अबू दुजाना की हाल ही में एक मुठभेड़ में मौत हो गई, हिज़्बुल कमांडर सबज़ार अहमद बट और बुरहान वानी की भी मौत हो गई थी. चरमपंथी गुटों के कई कमांडरों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया है और जो बचे हैं उनमें रियाज़ नाइकू, सद्दाम पडर हैं लेकिन पुलिस महानिदेशक एस पी वैद्य का कहना है कि बहुत सारे चरमपंथी भाग गए हैं.
पुलिस महानिदेशक के मुताबिक लश्कर-ए-तैयबा को अबु दुजाना की मौत के बाद कमांडर नहीं मिल रहे हैं और ये पुलिस के ऑपरेशन की कमायाबी है कि चरमपंथियों को संगठन की कमान को पटरी पर लाने के में दिक्कतें आ रही हैं.
पुलिस की खुफ़िया शाखा एसएसबी के सूत्रों के मुताबिक क़यूम नजार को पाकिस्तान से इसलिए भेजा गया था कि वो हिज़ुब्ल मुजाहिद्दीन की कमान को एकजुट कर सकें, लेकिन नजार की मौत हिज़्बुल के लिए एक बड़ा धक्का है.
ख़ुफ़िया तरीके से करता था काम
क़यूम नजार पहले ही काफ़ी विवादास्पद थे क्योंकि हिज़्बुल के साथ उनकी अनबन थी. मोबाइल टावरों पर हमलों को लेकर हिज़्बुल कमांडरों के बीच अनबन थी. क्योंकि हिज़्बुल का मानना था कि मोबाइल टावरों पर हमले किए जाएं क्योंकि इससे आम लोगों के नाराज़ होने का ख़तरा था.
क़यूम नजार बुरहान वानी, अबु दुजाना से बिल्कुल अलग थे. क़यूम नजार न फ़ेसबुक पर थे, न ट्विटर पर, वो बेहद ख़ुफिया किस्म के चरमपंथी गुरिला थे, न ही वीडियो या ऑडियो संदेश जारी करते थे.
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