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कौन हैं 'अल्टरनेटिव नोबेल' जीतने वाले कोलिन गोंज़ाल्विस?
स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में मंगलवार को ह्यूमन राइट्स, पब्लिक हेल्थ और गुड गवर्नेंस में 'साहसिक काम' के लिए 'राइट लाइवलीहुड अवॉर्ड' की घोषणा की गई.
'राइट लाइवलीहुड अवॉर्ड' को 'अल्टरनेटिव नोबेल' के नाम से भी जाना जाता है. एक्टिविस्ट कोलिन गोंज़ाल्विस के साथ इस सम्मान के लिए तीन और लोगों को चुना गया है.
ये हैं अज़रबैजान की पत्रकार ख़दीजा इसमाइलोवा, इथियोपिया की वकील येत्नेबेर्श निग्वेसी और अमरीका के पर्यावरण मामलों के वकील रॉबर्ट बिलॉट.
कौन हैं कोलिन गोंज़ाल्विस
भारत में उन्हें मानवाधिकार मामलों, श्रम कानूनों और जनहित याचिकाओं के एक माहिर वकील के तौर पर जाना जाता है. कोलिन सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट हैं.
वे जनहित याचिकाओं के ज़रिए कई आर्थिक और सामाजिक मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट में इंसाफ़ की आवाज़ बुलंद कर चुके हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने तो कई बार उनकी दलीलों की बुनियाद पर नज़ीर बनाने वाले फ़ैसले दिए.
आईआईटी मुंबई से सिविल इंजिनियरिंग की पढ़ाई करने वाले कोलिन का झुकाव क़ानून की तरफ़ हो गया. वे मुंबई के कामगर यूनियनों से जुड़ गए.
1979 में उन्होंने क़ानून की पढ़ाई शुरू कर दी और अपना पहला मुकदमा नौकरी से निकाल दिए गए 5000 मजदूरों के लिए तब लड़े जब वे लॉ स्कूल में ही थे.
कोलिन के बड़े केस
- वे जम्मू के छह हज़ार रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस म्यांमार भेजने के सरकारी फैसले के ख़िलाफ़ कोर्ट में उनका बचाव कर रहे हैं.
- मणिपुर में फ़र्जी मुठभेड़ों के मामले की जांच के लिए उन्हीं की दलीलों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने विशेष जांच टीम के गठन का आदेश दिया था. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सेना को विशेषाधिकार देने वाले अफ़्स्पा क़ानून का बेजा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है.
- पश्चिम बंगाल में टाटा के नैनो प्रोजेक्ट के लिए ज़मीन अधिग्रहण केस में किसानों के हक़ के लिए कोलिन सुप्रीम कोर्ट में लड़े और उन्हें जीत दिलाई.
- भारत में ग़ैर हिंदुओं को बच्चा गोद लेने का अधिकार दिलाने वाले मुकदमे में भी कोलिन ने मुसलमानों, इसाइयों और दूसरे धार्मिक अल्पसंख्यकों को उनका हक़ दिलाया.
- बहरे लोगों को ड्राइविंग का अधिकार दिलाने के लिए भी कोलिन का नाम लिया जाता है. दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद भारत में पहली बार किसी बहरे आदमी को ड्राइविंग लाइसेंस दिया गया.
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