You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
'मोदीजी 68 पैसे आपके अपमान के लिए नहीं भेजे'
- Author, मुरली रवि कृष्णन
- पदनाम, बीबीसी तेलुगू
"हम आर्थिक रूप से बहुत कमज़ोर हैं, इसलिए आपके जन्मदिन पर 68 पैसे का चेक ही भेज पा रहे हैं. इतनी विनम्रता से भेजे जाने वाले इन चेकों को कृपया स्वीकार करें और रायलसीमा क्षेत्र की जनता के लिए दुआएं कीजिए." आरएसएसएस ने चेक भेजने के बाद यह अपील की है.
आरएसएसएस का मतलब "रायलसीमा सागुनीटी साधना समिति" है. रायलसीमा आन्ध्र प्रदेश का एक पिछड़ा इलाक़ा माना जाता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आरएसएसएस की तरफ़ से भेजे गए 68 पैसों के चेक्स अब सोशल मीडिया में ख़ूब वायरल हो रहे हैं.
आरएसएसएस ने कहा कि पीएम इसे अपना अपमान न समझें और उनकी ख़राब स्थिति को समझें.
रायलसीमा में सिंचाई परियोजनाएं अमल में लाने की मांग करते हुए आरएसएसएस पिछले कई सालों से काम कर रही है.
आरएसएसएस इस बात पर भी मांग करती है कि आन्ध्र प्रदेश राज्य विभाजन अधिनियम द्वारा किए गए वादों को अमल में लाया जाए.
अपनी समस्याओं को पीएम नरेंद्र मोदी की निगाह में लाने के लिए आरएसएसएस से जुड़े कई सौ किसानों ने 68 पैसों के चेक पीएम के नाम भेजे.
आरएसएसएस के अध्यक्ष बोज्जा दसराधा रामिरेड्डी ने बताया, "हम चाहते हैं कि पीएम मोदी को और भी ज़्यादा रकम उपहार में दें, लेकिन हमारी आर्धिक स्थिति इसकी इजाज़त नहीं दे रही है. हम मांग करते हैं कि आन्ध्र प्रदेश राज्य विभाजन अधिनियम में किए गए तमाम वादों को पूरा करें और रायलसीमा इलाक़े में दूसरे इलाक़ों के बराबर विकास कराएं. हम वादा करते हैं कि आर्थिक रूप से मज़बूत होने पर बड़ी रकम तोहफ़े में देंगे."
आरएसएसएस ने कहा की कडप्पा में स्टील प्लांट के साथ कई चीज़ों का वादा किया गया था, लेकिन किसी पर भी अमल नहीं हुआ है. आरएसएसएस ने ये भी कहा कि रायलसीमा में कृष्णा, तुंगाभद्रा, पेन्ना, चित्रावती जैसी नदियां होने के बावजूद भी सूखे की समस्या का हल नहीं हुआ है.
आरएसएसएस ने चेक के साथ अपने एक पत्र में कहा कि 'आन्ध्र प्रदेश राज्य विभाजन अधिनियम में रॉयलसीमा को बुंदेलखंड की तरह एक स्पेशल पैकेज देने का वादा किया गया था, लेकिन उसको देने की बजाय सिर्फ़ 50 करोड़ ही दिए गए.'
आरएसएसएस के प्रतिनिधि डॉ. सीलम सुरेंद्र ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन करने पर वे गिरफ़्तार हो सकते हैं, इसीलिए गांधीगिरी की तर्ज़ पर इस अंदाज़ में विरोध कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के किसानों ने दिल्ली में भी विरोध प्रदर्शन किया पर केंद्र सरकार ने कोई तवज्जो नहीं दिया. इसीलिए वे अलग अंदाज़ में अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं.