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सोशल: किसानों ने 'पेशाब पिया,' मोदी से मिलेंगे तमिलनाडु के सीएम
दिल्ली के जंतर-मंतर में पिछले 39 दिनों से तमिलनाडु के किसान अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हुए हैं.
किसानों का दावा है कि गुरुवार को उनके दो साथियों ने सांकेतिक तौर पर अपना पेशाब पीकर विरोध जताया था. इस घटना के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पलनीसामी ने किसानों से मुलाकात की.
सीएम पलनीसामी से मुलाकात के बाद, किसानों को आश्वासन दिया गया कि सीएम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर किसानों की बात रखेंगे.
किसानों के इस प्रदर्शन और सांकेतिक तौर पर पेशाब पीने की चर्चा सोशल मीडिया पर भी है.
सोशल मीडिया पर क्या बोले लोग?
प्रियभांशु रंजन लिखते हैं, ''राहुल जी, पेशाब पीने को मजबूर किसानों के साथ धरना दीजिए. मुद्दा बुरा नहीं है!''
अविनाश ने फेसबुक पर लिखा, ''जंतर मंतर पर किसान पेशाब पी रहे हैं और हम धर्म का धतूरा पीकर सो रहे हैं.''
राहुल पांडे ने लिखा, ''पेशाब पिए किसान....फिर भी बोलें भक्त, मेरा मोदी महान.''
रवि रावत ने फेसबुक पर लिखा, ''तमिलनाडु के किसानों के पेशाब पीने पर सारे मोदी अंधविरोधी तमिलनाडु सरकार को क्लीन चिट देकर मोदी को घेर रहे हैं. सब जानते हैं कि किसान राज्य की जिम्मेदारी पहले होता है, केंद्र की बहुत बाद में.''
महेश लिखते हैं, ''ये षडयंत्र के अंग हैं. किसी किसान के पास इतनी फुर्सत नहीं कि घर छोड़कर महीनों दिल्ली में डेरा डाले रहें.''
रविंद्र कुमार ने लिखा, ''2022 तक अगर आधे किसान जब मर जाएंगे, तब बचे किसानों की आमदनी वैसे ही दोगुनी हो जाएगी.''
त्रिलोक सिंह परमार ने लिखा, '' यूपी में किसानों का कर्ज़ राज्य सरकार ने माफ किया. तमिलनाडु सरकार से कहने की बजाय ये किसान केंद्र सरकार से कर्ज़ माफी क्यों चाह रहे हैं? शायद इन किसानों को तमिलनाडु की सरकार से ज्यादा बीजेपी की सरकार पर यकीन है.''
राज्य में भारी सूखे की मार और कर्ज़ के बोझ के तले दबे क़रीब 100 किसान दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे हैं. इनका दावा है कि पिछले साल कर्ज़ के बोझ तले दबे राज्य में 400 किसानों ने आत्महत्या की थी.
किसानों के मुताबिक, उनके लिए खेती के लिए लिया गया कर्ज़ चुकाना भी एक बोझ है और सरकार को कर्ज़ माफ करना चाहिए.