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'मुसलमान हूं इसलिए भाजपा ने मुझे दे दिया तीन तलाक़'
- Author, दिलीप कुमार शर्मा
- पदनाम, गुवाहाटी से, बीबीसी हिंदी के लिए
बीजेपी ने कथित रूप से म्यांमार के रोहिंग्या शरणार्थियों के समर्थन में बोलने वाली अपनी एक मुस्लिम नेता बेनज़ीर आरफ़ान को पार्टी से निलंबित कर दिया हैं.
बेनज़ीर बीजेपी असम राज्य कार्यकारी समिति की सदस्य थी. इसके साथ ही 2012 में बीजेपी में शामिल होने वाली बेनज़ीर ने पार्टी के टिकट पर 2016 का असम विधानसभा चुनाव लड़ा था.
दरअसल कुछ दिन पहले बेनज़ीर ने अपने फ़ेसबुक पर एक पोस्ट अपलोड किया था जिसमें उन्होंने लोगों से म्यांमार सरकार द्वारा रोहिंग्यायों पर किए गए कथित अत्याचार के लिए विरोध करने का अनुरोध किया था.
हालांकि बेनज़ीर ने बाद में फ़ेसबुक से इस पोस्ट को डिलीट कर दिया था.
बीबीसी के साथ बातचीत में बेनज़ीर ने कहा, "मुझे बिना कारण बताए बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रंजीत दास ने पार्टी से निलंबित कर दिया. मेरी ग़लती सिर्फ़ इतनी थी कि मैंने रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर एक पोस्ट फ़ेसबुक पर डाली थी."
"लेकिन बाद में मैने उसे डिलीट कर दिया और माफी भी माग ली. मैंने अपने इस पोस्ट के लिए आरएसएस से भी माफी मांगी हैं. लेकिन मुझे स्पष्टीकरण देने का किसी ने मौका नहीं दिया."
प्रधानमंत्री से न्याय की उम्मीद
बेनज़ीर ने कहा, "मैं तीन तलाक़ की शिकार हो चुकी हूं और जिस कदर बीजेपी ने मुझे व्हाट्सऐप पर मैसेज भेजकर पार्टी से निलंबित किया है, यह एक तरह से तीन तलाक़ जैसी ही घटना है. शायद मैं मुसलमान महिला हूं, इसलिए मेरे ख़िलाफ़ ऐसी कार्रवाई की गई है."
वह आगे कहती हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन तलाक़ समेत बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसी अच्छी योजनाओं पर काम कर रहे हैं. इसलिए मुझे पूरी उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मेरे इस मामले में हस्तक्षेप कर मुझे इंसाफ़ दिलाएंगे.
संयुक्त अल्पसंख्यक पीपुल्स फोरम नामक एक गैर सरकारी संगठन ने म्यांमार से भागने वाले हज़ारों रोहिंग्या मुसलमानों को समर्थन देने के लिए 16 सितंबर को गुवाहाटी में एक कार्यक्रम का आयोजन किया था.
इस संदर्भ में बेनज़ीर ने कहा कि रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए संयुक्त अल्पसंख्यक पीपुल्स फोरम ने एक प्रार्थना सभा का आयोजन किया था. मुझे इस प्रार्थना सभा में आमंत्रित किया गया था लेकिन मैं वहां नहीं गई. जबकि पार्टी ने मुझे इस बात के लिए दोषी ठहराया हैं.
फ़ेसबुक पर बेनज़ीर के पोस्ट डालने के बाद स्थानीय बीजेपी नेताओं के बीच विवाद पैदा हो गया है. क्योंकि केंद्र और राज्य की बीजेपी सतारूढ़ सरकार म्यांमार से भागे रोहिंग्या शरणार्थियों को भारत में प्रवेश करने की अनुमति देने के ख़िलाफ़ है.
पार्टी के स्टैंड पर चलना होगा
ऐसे में गुरुवार को, बीजेपी प्रदेश इकाई के महासचिव दिलीप सैइकिया ने बेनज़ीर अरफ़ान को एक पत्र भेजा था, जिसमें उन्हें पार्टी से तत्काल प्रभाव के साथ निलंबित करने की बात कही गई थी. साथ ही पत्र में बेनज़ीर को तीन दिन का समय देते हुए यह स्पष्ट करने को कहा था कि उनके ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए.
प्रदेश बीजेपी के निलंबन पत्र में कहा गया है कि "आप एक सक्रिय भाजपा सदस्य होने के बावजूद, आपने पार्टी प्लेटफॉर्म पर कोई भी चर्चा किए बिना सोशल मीडिया में म्यांमार से संबंधित किसी समस्या के सिलसिले में किसी अन्य संगठन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में लोगों से समर्थन की मांग कैसे कर सकती हैं."
"पार्टी के नियमों और विचारधारा के ख़िलाफ़ अपने कार्य को ध्यान में रखते हुए, बीजेपी राज्य इकाई अध्यक्ष ने आपको सभी ज़िम्मेदारियों से मुक्त किया है और आपको पार्टी से निलंबित कर दिया है."
असम में बीजेपी के एकमात्र मुस्लिम विधायक अमीनुल हक लसकर ने बीबीसी से कहा कि, "बेनज़ीर पर कार्रवाई की संपूर्ण जानकारी तो नहीं है लेकिन हमने सुना है कि उन्होंने पार्टी विरोधी काम किया हैं. हम लोगों के हिसाब से पार्टी बड़ी है आदमी छोटा है."
"अगर कोई पार्टी के ख़िलाफ़ काम करेगा तो कार्रवाई तो होगी. सभी नेताओं को किसी भी मुद्दे पर पार्टी के रुख को ध्यान में रख कर बात करनी चाहिए. पार्टी के स्टैंड से सबको चलना पड़ेगा. आप पार्टी के स्टैंड के ख़िलाफ़ फ़ेसबुक पर बिना किसी अनुमति के कोई पोस्ट नहीं डाल सकते."
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