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'ईमानदार' अधिकारी के विरोध का अनोखा तरीका
- Author, इमरान कुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
कर्नाटक प्रशासनिक सेवा में अधिकारी के. मथाई बीते दो हफ्ते से जो काम कर रहे हैं, उसे उनकी कैडर के कुछ प्रशासनिक अधिकारी तिरछी नज़र से देख सकते हैं.
के. मथाई बीते दो हफ्तों से हेलमेट लगाकर साइकिल से दफ्तर जाते हैं. उनकी इस पहल को नौकरशाहों के बीच शर्मिंदगी की तरह देखा जा रहा है.
राज्य के एक बड़े प्रशासनिक अधिकारी का साइकिल से दफ्तर जाना कुछ नौकरशाहों को 'पागलपन' तो कुछ को 'हास्यास्पद' लग रहा है.
'विरोध का अजीब तरीका'
पहचान छिपाए रखने की शर्त पर एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने बीबीसी को बताया, ''अगर मथाई ये काम खुद को फिट रखने के लिए करते तब शायद अलग बात होती. लेकिन विरोध के चलते ये सब करना थोड़ा अजीब है.''
दिलचस्प ये है कि मथाई के साइकिल से दफ्तर जाने की बात पर लोग उंगली भले ही उठा रहे हों लेकिन ईमानदारी और काम को लेकर किसी को उन पर शक नहीं है.
मथाई को बंगलुरु के राजनकुंटे से अपने दफ्तर के बीच की 35 किलोमीटर की दूरी को तय करने में रोज़ करीब दो घंटे लगते हैं.
मथाई सकाल मिशन में एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर हैं. इस सरकारी प्रोजेक्ट के तहत एक तय वक्त में जनता को सेवाएं मुहैया कराई जाती हैं. अगर वक्त से सेवाएं न दी गईं, तो हर्जाना अधिकारी को अपनी सैलेरी का एक हिस्सा चुकाकर देना होता है.
9 साल में 27वीं पोस्टिंग
नियमों के मुताबिक, मथाई को सरकारी कार मिलनी चाहिए. मथाई अपने नौ साल के करियर में इस वक्त 27वीं पोस्टिंग पर तैनात हैं. इस पोस्टिंग के शुरू के 11 महीने में सरकार की तरफ से उन्हें कार की सुविधा मिली भी थी.
मथाई बताते हैं, "मुझे सरकार की तरफ से जो टैक्सी-कार की सुविधा मिली थी, उसका बिल विभाग ने नहीं भरा. ऐसे में कार की सुविधा बंद हो गई. मैंने साइकिल से दफ्तर जाना शरू किया, जो कि इको-फ्रेंडली भी है."
मथाई ही वो अधिकारी हैं, जिन्होंने सरकार को ये साबित करके बताया कि विज्ञापन से महानगरपालिका और बेंगलुरु सिटी कॉर्पोरेशन में विज्ञापन के ज़रिए अच्छी कमाई की जा सकती है.
मथाई ने सरकार के समक्ष आठ ऐसी रिपोर्ट्स पेश की, जिसमें अधिकारियों और विज्ञापनदातों की जालसाज़ी से बृहद बेंगलुरु महानगरपालिका (बीबीएमपी) को दो हज़ार करोड़ रुपये का नुकसान होने की बात सामने आई थी.
मथाई बताते हैं कि इस रिपोर्ट में कुछ वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के भी नाम थे.
चार करोड़ की जगह लिए 15 लाख
मथाई ने कहा, "सबसे पहले मुझसे कहा गया कि मेरी रिपोर्ट ग़लत है. आप इसे ऐसे समझिए कि एक कॉर्पोरेशन वार्ड में जहां चार करोड़ रुपये वसूले जाने थे, वहां अधिकारियों ने विज्ञापन के लिए सिर्फ 15 लाख रुपये लिए."
राज्य के मुख्य सचिव ने मथाई को राजस्व वसूलने की चुनौती दी. मथाई बताते हैं, "35 दिनों के भीतर हमने तीन करोड़ रुपये राजस्व के तौर पर जमा किए. इसके बावजूद मेरा ट्रांसफर कर दिया गया."
चार महीने के भीतर बीबीएमपी की विज्ञापन से होने वाला राजस्व 20-25 करोड़ से बढ़कर 331 करोड़ हो गया.
मथाई कहते हैं, "जब मेरी पोस्टिंग सकाल मिशन के लिए हुई, तब मुझसे तत्कालीन एडिशनल चीफ सेक्रेटरी ने कहा कि उन्होंने अपने आईएएस सहयोगियों से मेरे बारे में सुन रखा है. लेकिन पोस्टिंग के कुछ वक्त बाद मुझसे कहा गया कि आपकी टैक्सी के बिल नहीं भरे जाएंगे, क्योंकि आपको कार की सुविधा देने से इंकार किया गया है."
जिसकी रिपोर्ट को सीबीआई ने सही माना
मथाई ने एक दूसरे एडिशनल चीफ सेक्रेटरी रैंक के अधिकारी पर बदला लिए जाने का आरोप लगाया. मथाई इसकी वजह बताते हैं कि उन्होंने अपनी रिपोर्ट में उन अधिकारी का नाम भी लिखा था.
मांड्या शहरी विकास प्राधिकरण में भूमि-घोटाला को लेकर मथाई की एक रिपोर्ट को सीबीआई ने भी सही ठहराया था.
मथाई कहते हैं, "विकास प्राधिकरण ने जो ज़मीन 2000-2500 वर्गफुट की थी, उसे 60 से 70 रुपये वर्गफुट फीट के हिसाब से बेचा था."
वे कहते हैं, ''सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में 40 लोगों का नाम लिया, जिनमें कुछ आईएस अधिकारी, सांसद और विधायकों के नाम भी शामिल थे. इस चार्जशीट के बाद मेरा तबादला बीबीएमपी में कर दिया गया.''
ईमानदारी की सज़ा- तबादले, सैलरी कटौती
मथाई को अपनी ईमानदारी की सज़ा कई तबादलों और सैलरी या सुविधाओं में हुई कटौती से भुगतनी पड़ी.
राज्य की सिविल सेवा में आने से पहले मथाई इंडियन एयरफोर्स में थे, जहां से उन्होंने वॉलेंटियरी रिटायरमेंट लेकर कानून की प्रैक्टिस की.
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी को बताया, "मथाई और पूर्व विभाग प्रमुख के बीच कुछ दिक्कतें थीं. मुझे नहीं लगता कि ये विवाद ज़्यादा दिन चलेगा. जल्द ही इसका समाधान निकलेगा."
मथाई को यकीन है कि उनके नए बॉस एडिशनल चीफ सेक्रेटरी राजीव चावला इस समस्या का समाधान करेंगे. तब तक सेक्रेटरियट बिल्डिंग में मथाई की साइकिल उनके चैंबर में खड़ी नज़र आएगी.
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