नज़रिया: बदलाव का संदेश देने की कोशिश भर है फ़ेरबदल

    • Author, राधिका रामाशेषन
    • पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

केंद्रीय मंत्रिमंडल में रविवार को हुआ फेरबदल दरअसल प्रोफ़ेशनलिज़्म लाने की कोशिश है.

चुनाव के लिए दो साल से भी कम वक़्त बचा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार को कहीं न कहीं महसूस हो रहा है कि जो बड़े-बड़े वादे किए थे, जो लक्ष्य बनाए थे, उनपर वे खरे नहीं उतरे हैं. इसलिए फेरबदल करके सिस्टम में प्रोफ़ेशनलिज़्म लाने का प्रयास किया गया है.

पहले जातीय या क्षेत्रीय समीकरणों पर फ़ोकस किया जाता था. इस बार भी देखने को मिला कि कर्नाटक से अनंत कुमार हेगड़े को लिया गया, उत्तर प्रदेश और बिहार से दो-दो मंत्री बनाए गए हैं. ऐसा राजनीतिक आधार पर किया गया मगर चार प्रोफ़ेशनल लोगों को लेकर सकारात्मक संदेश देने की कोशिश की गई है.

नए मंत्रियों को काम दिखाना होगा

यह फेरबदल न सिर्फ़ एक प्रयोग है बल्कि 2019 की भी तैयारी हैं. सरकार दिखाना चाहती है कि तब तक कुछ दिखा सकें कि हमने इतने स्मार्ट सिटीज़ बनाए या इतने पावर कनेक्शन दिए.

पीयूष गोयल पावर सेक्टर में अच्छा काम कर रहे थे, अब यह मंत्रालय आरके सिंह को दिया गया है. अब वह पीयूष गोयल की गति में काम कर पाते हैं या नहीं, देखना पड़ेगा.

शहरी विकास मंत्रालय को पहले वेंकैया नायडू संभाल रहे थे. अब हरदीप पुरी के पास यह मंत्रालय होगा. स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट इस सरकार का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है और प्रधानमंत्री का पसंदीदा भी है.

यह सीधा इस मंत्रालय से जुड़ा प्रोजेक्ट है. अब तक आई रिपोर्ट्स के मुताबिक स्मार्ट सिटी का काम बहुत धीमा चल रहा है. इसलिए यह देखना होगा कि हरदीप पुरी इसपर कैसे काम करते हैं.

सरकार ने संकेत देने की कोशिश की है

मुझे नहीं लगता कि रक्षा क्षेत्र में निर्मला सीतारमण का कोई अनुभव रहा है. मगर सरकार ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि हम एक महिला को ज़िम्मेदारी दे रहे हैं क्योंकि बीजेपी संकेत देने की राजनीति में बहुत विश्वास करती है.

बीजेपी में टैलंट की कमी तो है ही, यह बदलाव पार्टी के आंतरिक समीकरणों से भी जुड़ा हुआ है. आप रक्षा मंत्री बनते ही सीधे सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी के सदस्य बन जाते हैं. यह सरकार की फ़ैसले लेने वाली शीर्ष कमेटी है. डिफेंस का तो रुतबा ही अलग है.

सिर्फ़ बीजेपी का अपना फेरबदल था

शिवसेना और बीजेपी अब उतने मीठे नहीं रहे हैं जितने बाल ठाकरे के ज़माने में थे. परसों तक सुनने में आया था कि जेडीयू के दो मंत्री बनेंगे. मगर ऐसी कोई ख़बर नहीं आई कि प्रधानमंत्री और नीतीश कुमार के बीच बात हुई हो. इससे पता चलता है कि बीजेपी अभी जेडीयू को सरकार में शामिल करने के मूड में नहीं है.

ऐसे ही कहा जा रहा था कि अशोक गजपति राजू का पोर्टफ़ोलियो बदलकर टीडीपी से एक और मंत्री आएगा. मगर ऐसा नहीं हुआ. तो यह बीजेपी का ही फेरबदल है और इसमें सहयोगियों की कोई भूमिका नहीं थी.

(बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय से बातचीत पर आधारित)

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