प्रेस रिव्यू: मोदी कैबिनेट में 15 नए मंत्रियों के लिए जगह है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट विस्तार की तारीख तय हो गई है. रविवार को सुबह दस बजे कैबिनेट के नए मंत्री शपथ लेंगे.

'हिंदुस्तान टाइम्स' में छपी एक ख़बर के अनुसार कैबिनेट में सर्वाधिक 81 सदस्यों के लिए जगह है और ऐसे में मोदी के पास मौका है कि वो 15 नए चेहरों को कैबिनेट में शामिल कर सकें.

हालांकि अख़बार कहता है कि वो सभी पदों को नहीं भरेंगे. अख़बार के अनुसार हाल में एनडीए में शामिल हुए जदयू को कैबिनेट में दो पद दिए जा सकते हैं.

'जनसत्ता' में छपी ख़बर के अनुसार भाजपा महासचिव भूपेंद्र यादव, पार्टी उपाध्यक्ष विनय सहस्रबुद्धे, प्रहलाद पटेल, सुरेश अंगडी, सत्यपाल सिंह और प्रहलाद जोशी को मंत्री बनाया जा सकता है.

अमित शाह राजीव प्रताप रूडी को भूपेंद्र यादव की जगह संगठन में शामिल कर सकते हैं.

'इंडियन एक्सप्रेस' के अनुसार शु्क्रवार को देर रात गृह मंत्री राजनाथ सिंह के घर पर बैठक हुई जिसके बाद अटकलें लगाई जा रही हैं कि सुरक्षा पर कैबिनेट कमेटी में भी कोई नया चेहरा शामिल किया जा सकता है.

दलित छात्रा ने की आत्महत्या

इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक अन्य ख़बर के अनुसार नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट यानी नीट के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट याचिका दायर कर तमिलनाडु को नीट परीक्षा से छूट दिए जाने की मांग करने वाली दलित लड़की अनीता ने आत्महत्या कर ली है.

अख़बार के अनुसार उनकी आत्महत्या के नौ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में एमबीबीएस और बीडीएस पाठ्यक्रमों में नामांकन के लिए तमिलनाडु सरकार को नीट के तहत मेडिकल काउंसलिंग का काम पूरा करने का निर्देश दिया था.

अरियालुर ज़िले की रहने वाली अनीत ने तमिलनाडु स्टेट बोर्ड की बारहवीं की परीक्षा में 1200 में से 1176 नंबर पाए थे. जिसके आधार पर उनका एडमिशन एमबीबीएस में हो जाता लेकिन नीट परीक्षा के चलते ऐसा संभव नहीं हुआ.

जाट आरक्षण पर लगी 'रोक'

'हिंदुस्तान टाइम्स' के पहले पन्ने पर छपी एक ख़बर के अनुसार पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने जाट आरक्षण पर लगी रोक को बरकरार रखा है. ये रोक 31 मार्च 2018 तक जारी रहेगी.

हाईकोर्ट ने नेशनल बैकवर्ड कमिशन को 2018 तक इस मामले पर रिपोर्ट देने को कहा है जिसके बाद ही कोर्ट अपना फ़ैसला सुनाएगा.

प्रदेश सरकार ने जाटों समेत छह जातियों को विशेष पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में लाते हुए दस फ़ीसदी आरक्षण दिया था, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी.

'चूहों के कारण आई बाढ़'

'द हिंदू' में छपी एक ख़बर के अनुसार बिहार में हाल में आई के पीछे चूहों की बड़ी भूमिका है और इनकी वजह से ही ये तबाही आई थी. ये कहना है प्रदेश के जल संसाधन मंत्री ललन सिंह और आपदा प्रबंधन विभाग के मंत्री दिनेशचंद्र यादव का.

ललन सिंह का कहना है कि नदी के तटबंधों को चूहे खोखला कर देते हैं जिससे बाढ़ की पानी नहीं रुक पाता है.

दिनेशचंद्र यादव का भी कहना है कि चूहों की वजह से हर साल तटबंध टूटता है और सरकार चाहकर भी कुछ नहीं कर पाती क्योंकि चूहे और मच्छरों का इलाज संभव नहीं है.

फिर खुलेगा बोफ़ोर्स घोटाले का मामला

'जनसत्ता' में छपी एक ख़बर के अनुसार राजनीतिक रूप से संवेदनशील बोफ़ोर्स घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट हिंदुजा बंधुओं के खिलाफ 12 साल पुरानी एक याचिका पर सुनवाई करेगा.

अख़बार के अनुसार हिंदुजा ब्रदर्स को दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा 2005 में आरोप मुक्त किए जाने के फ़ैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है. ये याचिका भाजपा नेता अजय अग्रवाल ने दायर की थी.

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने इस याचिका पर जल्द सुनवाई के लिए अंतरिम अर्जी का संज्ञान लेते हुए कहा कि इस मामले को 30 अक्तूबर से शुरू हो रहे सप्ताह में सूचीबद्ध किया जाए.

सिख दंगों के बंद फ़ाइलों की होगी जांच

'दैनिक भास्कर' में छपी एक ख़बर के अनुसार 1984 के सिख दंगों से जुड़े 199 केस बंद करने संबंधी स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम के फ़ैसले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दो रिटायर्ड जजों का सुपरवाइज़री पैनल बनाया है.

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज केएसपी राधाकृष्णन और जेएम पांचाल का पैनल पांच सितंबर से काम शुरू करेगा. पैनल को तीन महीनों में अपनी रिपोर्ट सौंपनी है.

पैंनल को इस मामले की जांच करनी है कि केस बंद करने की फ़ैसला सही है या नहीं? इन मामलों की दोबारा जांच शुरू करने की ज़रूरत है या नहीं?

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)