क्या भगोड़े मुशर्रफ़ पाकिस्तान लौटेंगे?

    • Author, हारून रशीद
    • पदनाम, बीबीसी उर्दू संवाददाता, इस्लामाबाद

बेनज़ीर भुट्टो हत्याकांड में पाकिस्तान की अदालत ने दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सज़ा सुनाई है जबकि पांच अभियुक्तों को बरी कर दिया.

फ़ैसले में जज मोहम्मद अज़हर ख़ान ने पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को भगोड़ा घोषित कर दिया है.

मुशर्रफ़ अभी देश से बाहर हैं और इस अदालती फैसले के बाद उनका वापस लौटना और मुश्किल हो गया है.

दो मामलों में पहले से वांटेंड हैं मुशर्रफ़

अदालत पहले ही जनरल मुशर्रफ़ की संपत्ति ज़ब्त करने के आदेश दे चुकी है और वो पिछले साल से ही पाकिस्तान के बाहर रह रहे हैं.

ऐसा ये पहला फैसला नहीं है जिसमें मुशर्रफ़ को भगोड़ा घोषित किया गया है, बल्कि इससे पहले के दो और मुक़दमे हैं, जिसमें उनसे कहा गया था कि वो अदालत में पेश हों.

एक मामला इस्लामाबाद के लाल मस्जिद का है और दूसरा पाकिस्तान में मॉर्शल लॉ लगाने का मुक़दमा है. दोनों में वो वांटेड हैं.

बेनज़ीर हत्याकांड बेहद संगीन मामला

लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर हत्याकांड का मामला काफ़ी संगीन था.

इसमें जज ने उनके ख़िलाफ़ वारंट जारी करते हुए, उनकी संपत्ति ज़ब्त करने का भी आदेश दिया है.

इस लिहाज़ से मुशर्रफ़ के लिए पाकिस्तान में क़ानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं.

अगर अगले कुछ सालों तक हालात ऐसे ही रहे तो उनके लिए पाकिस्तान लौटना और दोबारा सियासी पारी खेलना मुमकिन नहीं हो पाएगा.

जिस तरह वो मीडिया के ज़रिए पाकिस्तान में अपनी सियासत चलाते रहे हैं, लगता है कि विदेश में रहते हुए उन्हें वैसे ही करते रहना होगा.

उन्होंने पाकिस्तान में एक राजनीतिक पार्टी भी बनाई है और लगातार पाकिस्तानी चैनलों को अपना इंटरव्यू देकर सुर्खियों में बने रहते हैं.

भागने में सेना ने की मुशर्रफ़ की मदद

जहां तक पाकिस्तानी आर्मी का सवाल है, तो मुशर्रफ़ ने खुद ये स्वीकार किया है कि पाकिस्तान से निकलने में सेना के तात्कालिक प्रमुख राहील शरीफ़ ने उनकी मदद की थी.

वो पाकिस्तानी फ़ौज के मुखिया रहे हैं और फ़ौज को बदनामी से बचाने के लिए वो एक दो बार अदालत में पेश होने गए. लेकिन बीमारी के बहाने से आर्मी अस्पताल में भर्ती हो गए और लंबे समय तक वहीं रहे.

कुल मिलाकर सेना ने उनकी मदद ही की है.

लेकिन पाकिस्तान में मौजूदा सरकार का रवैया थोड़ा अलग है. वो लगातार कहती रही है कि जो भी मामले मुशर्रफ़ पर हैं, उन्हें खुद आकर उनका सामना करना चाहिए.

मुश्किल है मुशर्रफ़ का पाकिस्तान लौटना

इस लिहाज़ से देखें तो सरकार उन्हें देश में लाना चाह रही है. लेकिन अगर वो अपनी सियासत के लिए स्वदेश लौटना चाहते हैं तो सरकार उसकी इजाज़त नहीं देगी.

गुरुवार को फैसले के तुरंत बाद पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की ओर से प्रतिक्रिया आई है कि जो असली मुल्जिम हैं वो आज़ाद घूम रहे हैं.

इससे तो यही लगता है कि उनका पाकिस्तान लौटना फिलहाल बहुत मुश्किल है.

(बीबीसी संवाददाता मोहम्मद शाहिद से बातचीत पर आधारित)

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