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प्रेस रिव्यूः गुरमीत राम रहीम के बाद डेरा का वारिस कौन?
गुरमीत राम रहीम को यौन अपराध की सज़ा सुनाने के लिए आज रोहतक जेल में विशेष अदालत लगाई जाएगी. सिरसा में बाबा के डेरा सच्चा सौदा के मुख्यालय के पास सुरक्षा के बेहद सख़्त इंतज़ाम किए गए हैं.
गुरमीत राम रहीम के बाद डेरा सच्चा सौदा के अगले प्रमुख को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है. इंडियन एक्सप्रेस अख़बार की एक रिपोर्ट के मुताबिक डेरा सच्चा सौदा में उत्तराधिकारी के सवाल पर संकट खड़ा हो सकता है.
अख़बार कहता है कि गुटबाजी की वजह से इस बात को लेकर अनिश्चितता है कि अगला डेरा प्रमुख कौन होगा. ये सवाल भी पूछा जा रहा है कि क्या गुरमीत राम रहीम को डेरा प्रमुख का पद छोड़ना चाहिए या नहीं?
अख़बार सूत्रों के हवाले से कहता है कि अगर मुमकिन हुआ तो गुरमीत राम रहीम डेरा सच्चा सौदा की जिम्मेदारी अपने करीबी सहयोगी हनीप्रीत कौर को सौंप सकते हैं. हनीप्रीत 30 साल की हैं. लेकिन इसके साथ ही राम रहीम के इकलौते बेटे जसमीत इंसान का भी नाम वारिस के तौर पर लिया जा रहा है.
35 वर्षीय जसमीत पूर्व कांग्रेसी विधायक हरमिंदर सिंह जस्सी के दामाद हैं. जसमीत के अलावा राम रहीम की दो बेटियां भी हैं, चरणप्रीत और अमरप्रीत.
सेना की ख़ुफ़िया सेवा की रिपोर्ट
'टाइम्स ऑफ़ इंडिया' की एक रिपोर्ट के मुताबिक सेना की ख़ुफ़िया सेवा ने दिसंबर 2010 में डेरा सच्चा सौदा में बाबा के समर्थकों को हथियारों का प्रशिक्षण दिए जाने का मुद्दा उठाया था.
आर्मी इंटेलिजेंस की रिपोर्ट में कहा गया था कि पूर्व सैनिक प्रशिक्षण देने में शामिल हो सकते हैं. सैनिकों को डेरे से दूर रहने की सलाह भी दी गई थी. हालांकि जब पुलिस ने डेरे की जांच पड़ताल की तो हथियार इकट्ठा किए जाने या समर्थकों को सैन्य प्रशिक्षण दिए जाने के कोई सबूत नहीं मिल सके.
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने 4 दिसंबर 2014 को कथित हथियार प्रशिक्षण की रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान लेकर हरियाणा सरकार को नोटिस जारी किया था. जस्टिस एम जयापॉल ने कहा था कि हालात को ख़राब होने से रोकने के लिए डेरे की गतिविधियों पर नज़र रखना ज़रूरी है.
डॉक्टर बनकर जेल जाना चाहती थीं हनीप्रीत कौर
वहीं हरियाणा के डीजीपी बीएस संधु के मुताबिक राम रहीम की क़रीबी और मुंहबोली बेटी हनीप्रीत कौर बाबा की डॉक्टर के तौर पर जेल में उनके साथ जाना चाहती थीं लेकिन उन्हें अनुमति नहीं दी गई.
हनीप्रीत के बाबा के साथ हेलीकॉप्टर में बैठने और अदालत में पेश होने के लेकर उठे सवालों का जवाब देते हुए डीजीपी ने कहा कि उन्हें अदालत की अनुमति के बाद ही अदालत में राम रहीम के साथ आने दिया गया था.
डीजीपी ने बताया, "दोषी करार दिए जाने के बाद हरप्रीत कौर ने जज से कहा था कि वो उनके साथ डॉक्टर के तौर पर जेल जाना चाहती हैं क्योंकि राम रहीम बीमारी से पीड़ित हैं लेकिन जज ने इसकी अनुमति नहीं दी."
हाई कोर्ट में बाबा की 30 से ज़्यादा याचिकाएं
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक बाबा राम रहीम ने सीबीआई की अदालत के आदेशों के ख़िलाफ़ हाई कोर्ट में तीस याचिकाएं दायर की थीं.
पांच जुलाई को दिए अपने एक आदेश में हाई कोर्ट ने कहा था ये मुक़दमे को लंबा खींचने की कोशिश है. हाई कोर्ट ने सीबीआई जज को जल्द से जल्द मामले की सुनवाई पूरी करने के आदेश भी दिए थे.
गुरमीत राम रहीम पर सितंबर 2008 में बलात्कार मामले में आरोप तय कर लिए गए थे और तब से हर तीन महीने बाद बाबा की ओर से हाईकोर्ट में सीबीआई अदालत के आदेशों के ख़िलाफ़ याचिकाएं दायर की गईं.
डेरा ने क्रिमनल लॉ के अलग अलग प्रावधानों के तहत कुल तीस से ज़्यादा याचिकाएं हाई कोर्ट में दायर कीं.
डटी रही महिला अधिकारी
'इकोनॉमिक टाइम्स' एक रिपोर्ट के मुताबिक पंचकुला की डीसी गौरी पराशर जोशी ने हिंसा के दिन अपने गार्डों के साथ छोड़कर चले जाने के बावजूद मोर्चा संभाले रखा और उग्र उपद्रवियों से बातचीत करने की कोशिश की.
गौरी पराशर को इस दौरान चोटें आईं और उनके कपड़े भी फट गए.
अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक जब भीड़ ने उपद्रव शुरू किया तब पुलिसकर्मी भाग खड़े हुए और 11 महीने के बच्चे की मां गौरी पराशर जोशी के साथ सिर्फ़ एक सुरक्षाकर्मी ही रह गया.
गौरी पराशर ने किसी तरह दफ़्तर पहुंचकर सेना बुलाने का आदेश दिया और सेना के आने के बाद शहर के हालात काबू में आ सके.
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