You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
सोशल: 'तो अब न्यायपालिका भी देशविरोधी हो गई?'
गुरमीत राम रहीम को सज़ा सुनाए जाने के बाद जो हिंसा और तोड़फोड़ हुई है, क्या उसे रोका जा सकता था? यह सवाल बहुत लोगों के मन में हैं. इतना ही नहीं, चंडीगढ़ हाईकोर्ट ने तो राज्य सरकार को लताड़ भी लगाई है.
अदालत ने कहा, ''राष्ट्रीय एकता और क़ानून व्यवस्था सबसे ऊपर हैं. हम एक राष्ट्र हैं, किसी पार्टी का राष्ट्र नहीं हैं. नेताओं को समझने की ज़रूरत है कि राष्ट्र एक है. प्रधानमंत्री भारत का होता है, बीजेपी का नहीं. मुख्यमंत्री राज्य का है, बीजेपी का नहीं.''
हाईकोर्ट की इस टिप्पणी की चर्चा सोशल मीडिया में छाई हुई है. बीबीसी हिंदी ने 'कहासुनी' में अपने पाठकों से पूछा कि इस पर उनकी क्या राय है. सवाल के जवाब में हजारों लोगों ने अपनी बात रखी.
राजेश दुबे कहते हैं,''पंचकुला दुर्घटना को हरियाणा सरकार की नाकामी के अलावा और कुछ नहीं कहा जा सकता. पूरे देश और हाईकोर्ट ने भी यही माना है. पीएम मोदी से अनुरोध है कि मुख्यमंत्री मनोहर खट्टर का इस्तीफा तत्काल लिया जाये. खट्टर प्रशासन मामले की कमजोर कड़ी साबित हुई है.''
राहुल कुमार झा ने फ़ेसबुक पर कहा,''अभी ये लोग भारत विजय अभियान पर निकले हुए हैं. इन लोगों को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है. यह भी पता नहीं कि आज तक भारत को ना तो पूरा किसी ने जीता है, ना जीत सकेगा. पिछले 60 सालों में कांग्रेस भी पूरे भारत के राज्यों में जीत हासिल नहीं कर पाई लेकिन ये भारत विजय अभियान के नशे में चूर हैं.''
सूफ़ी साज़िद को लगता है कि वो दिन कब के फ़ाख़्ता हो चुके हैं जब प्रधानमंत्री देश का और मुख्यमंत्री राज्य के होते थे. अब तो सरकार सिर्फ पार्टी के लिए होती है. मनोज कहते हैं कि यह बात सिर्फ बीजेपी ही नहीं, दूसरे दलों पर भी लागू होती है लेकिन राजनीतिक दलों का आचरण उसके विपरीत ही रहता है.
नवीन जोशी थोड़ा हटकर सोचते हैं. उन्होंने ट्विटर पर लिखा,''कोर्ट को भी इस बात की मर्यादा रखनी चाहिए और ध्यान रखना चाहिए कि वह देश के प्रधानमंत्री हैं. अपने दायित्व का निर्वहन करना उन्हें आता ही होगा.'' चंद्रप्रसाद कहते हैं,''जब राजनेता देश और लोगों से ज्यादा पार्टी का हित करते है तो देश जलता है और लोग बेहाल होते हैं.''
इंस्टाग्राम पर भी लोगों की तरह-तरह प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. एक पाठक ने लिखा,''बिल्कुल सही. जब कोई जीत कर प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री बन जाये तो उसे पार्टीबाजी छोड़कर देश हित में काम करना चाहिए.''
फ़हीम ने कहा,''शर्म तो इनको मगर आती नहीं...अब न्यायपालिका भी देशविरोधी हो गई?''