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'आधार' वाले निलेकणी की इंफ़ोसिस में बतौर चेयरमैन वापसी
इंफ़ोसिस ने नंदन निलेकणी को अपना नया चेयरमैन चुन लिया है.
इसके साथ ही कंपनी ने एक बयान जारी कर इंफ़ोसिस बोर्ड से आर शेषासयी के इस्तीफ़े की जानकारी भी दी. नंदन कंपनी के चेयरमैन पद पर उनकी जगह लेंगे.
नंदन निलेकणी यूपीए सरकार के दौरान यूनीक आइडेंटिफ़िकेशन अथोरिटी ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन भी रहे.
हफ्ते भर पहले कंपनी के सीईओ और एमडी विशाल सिक्का ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.
तब उनकी जगह इंफ़ोसिस के चीफ़ ऑपरेटिंग ऑफ़िसर यूबी प्रवीण राव को अंतरिम सीइओ और एमडी पद की ज़िम्मेदारी संभालने के लिए कहा गया था.
सिक्का ने अपने पद से इस्तीफ़ा देने के बाद ब्लॉग लिखकर उन कारणों पर रोशनी डाली थी जिनके चलते उन्होंने अपने पद से इस्तीफ़ा दिया.
सिक्का ने कहा था, "मेरे लिये ये साफ़ हो चुका है कि बीते तीन सालों की हमारी सफ़लताओं के बावजूद, मैं अपने ऊपर लग रहे आधारहीन व्यक्तिगत हमलों का बचाव करते हुए सीइओ के रूप में कंपनी को लाभ नहीं पहुंचा सकता."
कौन हैं नंदन निलेकणी?
आईटी क्षेत्र में अपना करियर शुरू करने वाले नंदन निलेकणी ने 1980 के दशक में नारायण मूर्ति के साथ मिलकर इंफ़ोसिस की स्थापना की थी.
औपचारिक रूप से 2009 तक वो कंपनी से जुड़े रहे और सीईओ से लेकर विभिन्न पदों पर काम किया.
इसके बाद यूपीए सरकार के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के प्रस्ताव पर वो कंपनी से इस्तीफ़ा देकर यूनीक आइडेंटिफ़िकेशन अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन रहे. उन्हें कैबिनेट रैंक का दर्जा दिया गया था.
कहा जाता है कि आधार नंबर के वे मुख्य शिल्पकार थे. आधार को अनिवार्य बनाने के उनके प्रस्ताव का विरोध भी हुआ और इसके लिए वो यूपीए शासन के दौरान काफ़ी चर्चा में भी रहे.
2014 के आम चुनावों में उन्होंने अपने गृह जनपद बेंगलुरु से चुनाव लड़ने के लिए यूनीक आइडेंटिफ़िकेशन अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया से इस्तीफ़ा दे दिया.
हालांकि ये चुनाव वो बीजेपी के अनंत कुमार से हार गए.
देश में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार ने भी 2016 में उनकी मदद ली थी.
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