कैसे रुकेगी आपके आधार डेटा की चोरी?

आईआईटी खड़गपुर के छात्र रहे 31 साल के अभिनव श्रीवास्तव पर बंगलुरु में क़रीब 40,000 आधार कार्ड की जानकारी चोरी करने की आरोप लगा है. इसके लिए उन्होंने ख़ुद के डेवलप किए हुए मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया.

आधार से जुड़े डेटा को चुराए जाने के बढ़ते मामलों को देखते हुए बीबीसी ने कुछ साइबर एक्सपर्टों से बात करके डेटा चोरी के तरीकों और उससे जुड़े ख़तरों के बारे में जानने की कोशिश की है.

साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट नितिन भटनागर के मुताबिक, ई-हॉस्पिटल वेरीफिकेशन ऐप के बैंकेड सर्वर को हैक करके डेटा चोरी को अंज़ाम दिए जाने की आशंका ज़्यादा है. इसकी वजह एप्लिकेशन की कमजोर सिक्योरिटी है.

एप्लिकेशन की कमजोर सिक्योरिटी का फ़ायदा उठाकर हैकर ने अपने ऐप को लिंक कर दिया और आसानी से डेटा हासिल कर लिया.

उन्होंने कहा, ''ये हैंकिंग ई-वेरीफिकेशन एप्लिकेशन के सर्वर में सेंध लगाकर की गई है. यहां मरीजों के आधार नंबर, मोबाइल नंबर, नाम और ईमेल आईडी तक मौजूद होते हैं. सर्वर में घुसने के बाद ये जानकारी चुराना आसान है.''

आधार कार्ड की डीटेल को सुरक्षित रखने को लेकर भटनागर ने कहा कि इसके लिए सरकार को जागरूक होने की ज़रूरत है.

उन्होंने कहा, ''सरकार जो भी एप्लीकेशन डेवलप कराती है, उनके लिए सिक्योरिटी वैलिडेशन को ज़रूरी बनाया जाए. हर ऐप की सिक्योरिटी को परखने के बाद उन्हें जारी किया जाए.''

डेटा मास्किंग

साइबर एक्सपर्ट का मानना है कि डेटा चोरी को रोकने के लिए सबसे पहले डेटा डिस्कवरी ज़रूरी है.

उन्होंने कहा, ''जिन एजेंसियों के पास आधार डेटा रखने की ज़िम्मेदारी है उन्हें पहले ये देखना होगा कि सिस्टम में कहां-कहां आधार या दूसरे कार्ड का डेटा रखा गया है और कितना डेटा है.''

डेटा डिस्कवरी के बाद उस पर कंट्रोल लगाने पड़ेंगे कि डेटा चोरी न हो. नितिन भटनागर बताते हैं कि इसके लिए सबसे अच्छा उपाय डेटा मास्किंग है.

''आधार डेटा अगर क्लियर नंबर में है तो उसे मास्क करके सेव किया जाए ताकि अगर सर्वर हैक करके कोई डेटा का एक्सेस ले लेता है तो वह सारी जानकारी नहीं हासिल पाए.''

आधार सिक्योरिटी को लेकर नितिन बताते हैं कि इसके लिए पेमेंट सिक्योरिटी सिस्टम जैसा तरीका अपनाना पड़ेगा. जैसे पेमेंट सिक्योरिटी कंपनियां डेटा सुरक्षित रखने के लिए काम करती हैं.

ईको सिस्टम

साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट पवन दुग्गल का मानना है कि आधार को सुरक्षित बनाने के लिए सबसे पहले इसके ईको सिस्टम को सुधारना होगा.

उन्होंने कहा, ''जहां-जहां आधार डेटा दर्ज़ है, जहां इस्तेमाल हो रहा है उनकी सुरक्षा को मज़बूत करना ज़रूरी है क्योंकि डेटा चोरी होने की आशंका ज़्यादा है.''

दुग्गल बताते हैं कि जुलाई में संसद में दिए गए जवाब में सरकार ने कहा है कि आधार का डेटा क़रीब 200 सरकारी वेबसाइट्स से लीक हुआ है. यानी इनकी सिक्योरिटी को मज़बूत करना ज़रूरी है.

आधार डेटा की सुरक्षा को लेकर उन्होंने कहा कि आधार डेटा को लेकर बना कानून भी इतना मजबूत नहीं है. उसमें संशोधन की ज़रूरत है.

उन्होंने बताया कि आधार नंबर के ज़रिए जानकारी चोरी करना आसान है, इससे बचने के लिए डेटा सिक्योरिटी को पुख़्ता करना होगा.

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