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आधार कार्ड पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले में क्या है
आधार नंबर को लेकर सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम फ़ैसले के मुख्य बिंदू ये हैं -
- इनकम टैक्स रिटर्न में आधार नंबर को सरकार ने अनिवार्य करने का प्रावधान किया है जिसका सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धांतत: समर्थन किया है.
- सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश में कहा है कि जिनके पास आधार नंबर है वो टैक्स रिटर्न फ़ाइल करते वक्त उसका ज़रूर उल्लेख करें.
- कोर्ट के आदेश के मुताबिक जिनके पास आधार नंबर नहीं है उन्हें संविधान पीठ का अंतिम फ़ैसला आने तक परेशान होने की ज़रूरत नहीं.
- इस साल के बजट में सरकार ने इनकम टैक्स ऐक्ट की धारा 139AA में प्रावधान किया था कि एक जुलाई के बाद टैक्स रिटर्न भरने पर आधार का उल्लेख अनिवार्य होगा.
- ये मामला फ़िलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है. कई याचिकाएं हैं. संविधान पीठ का अंतिम फ़ैसला आना बाकी है.
- सुप्रीम कोर्ट ने आधार नंबर की वजह से डेटा लीक संबंधी लोगों की चिंता को सही ठहराते हुए सरकार से उसपर उचित कदम उठाने को कहा है.
डेटा लीक
भारत की सर्वोच्च अदालत ने आधार नंबर को पैन नंबर से जोड़े जाने के सरकारी आदेश का समर्थन किया है, लेकिन ये भी कहा है कि जिन लोगों के पास आधार कार्ड नहीं है उन्हें फ़िलहाल चिंता करने की ज़रूरत नहीं है.
अदालत का कहना है आधार नंबर अनिवार्य नहीं है, लेकिन जिनके पास ये है उन्हें इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय इसका इस्तेमाल ज़रूर करना चाहिए.
कोर्ट ने ये भी कहा है कि लोगों ने डेटा लीक होने को लेकर जो चिंताएं ज़ाहिर की हैं सरकार को उसके बारे में भी क़दम उठाना चाहिए.
संवैधानिक पीठ के फ़ैसले का इंतज़ार
सुप्रीम कोर्ट ने इनकम टैक्स की धारा 139AA के उस प्रावधान को अनिवार्य बनाने का सिद्धांतत: समर्थन किया है जिसमें कहा गया है कि इनकम टैक्स रिटर्न भरने के लिए आधार अनिवार्य है.
हालांकि कोर्ट का कहना है कि जब तक संविधान पीठ इस प्रावधान को चुनौती देनेवाली मुख्य याचिका पर अंतिम फ़ैसला नहीं ले लेती, इसे अनिवार्यत: लागू नहीं किया जा सकता.
इस बारे में कई याचिकाएं दाखिल की गई हैं जिनमें इनकम टैक्स एक्ट के उस प्रावधान को चुनौती दी गई है जिसमें आधार को आयकर रिटर्न भरने और पैन कार्ड हासिल करने के लिए अनिवार्य बनाया गया था.
याचिकाओं में इस प्रावधान की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है.
चार मई को जस्टिस ए के सीकरी और अशोक भूषण की बेंच ने फ़ैसले को सुरक्षित रख लिया था जिसमें इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 139AA को चुनौती दी गई थी. इन प्रावधानों को इस साल के बजट और फ़ाइनेंस एक्ट 2017 के तहत जोड़ा गया था और इन्हें एक जुलाई से लागू होना था.
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