आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने कब और क्या-क्या कहा?

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आधार परियोजना पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो सकती है.

इसी 27 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने आधार पर एक फ़ैसले में कहा था कि इसे सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के लिए अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता है.

हालांकि कोर्ट ने ये भी कहा कि बैंक खाते खोलने जैसी दूसरी सुविधाओं के लिए आधार को अनिवार्य करने से सरकार को नहीं रोका जा सकता है.

पिछले कुछ सालों से आधार की अनिवार्यता के ख़िलाफ़ कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई हैं और कुछ मामलों में इन पर सुनवाई जारी है.

आइए एक नज़र डालते हैं, अब तक आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने कब और क्या-क्या कहा?

23 सितंबर, 2013

(संविधान पीठ में अंतिम सुनवाई तक) "कुछ विभागों ने आधार को अनिवार्य घोषित करने वाले सर्कुलर जारी किए हैं. इस तथ्य के बावजून आधार कार्ड नहीं बनवाने लोगों को इसका कोई नुक़सान नहीं होना चाहिए."

26 नवंबर, 2013

राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश आधार केस में पार्टी बने.

24 मार्च, 2014

"...आधार नंबर न होने की सूरत में किसी व्यक्ति को ऐसी किसी सुविधा से वंचित नहीं रखा जाएगा जिसका वह अन्य स्थिति में हकदार होता. आधार अनिवार्य नहीं है- ये बताने के लिए सरकारी विभाग अपने फ़ॉर्म्स/सर्कुलर्स में संशोधन करें.

16 मार्च, 2015

"... हम उम्मीद करते हैं कि केंद्र और राज्य सरकारों को 23 सितंबर, 2013 को दिए गए इस कोर्ट के आदेश का पालन करना चाहिए."

11 अगस्त, 2015

  • भारत सरकार रेडियो और टीवी सहित इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया में बड़े पैमाने पर प्रचार करना चाहिए कि किसी नागरिक के लिए आधार कार्ड प्राप्त करना अनिवार्य नहीं है.
  • किसी ऐसी सुविधा के लिए आधार कार्ड देना शर्त नहीं होगा जो सामान्य स्थिति में एक नागरिक को हासिल होती हैं.
  • (पीडीएस और एलपीजी पर छूट)... सार्वजनिक वितरण प्रणाली और खासतौर पर खाद्यान्न, रसोई ईंधन जैसे केरोसिन के अलावा किसी और मकसद से प्रतिवादी (केंद्र और राज्य सरकार) इसका इस्तेमाल नहीं करेंगे. आधार कार्ड का इस्तेमाल एलपीजी वितरण योजना में भी किया जा सकता है.
  • आधार कार्ड जारी करते वक्त किसी व्यक्ति के बारे में यूनिक आइडेंटिफ़िकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईएइ) द्वारा प्राप्त की गई जानकारी का इस्तेमाल किसी अन्य मकसद से नहीं किया जाएगा. आपराधिक जांच के मामलों में कोर्ट के आदेश से ऐसा किया जा सकता है.

15 अक्टूबर, 2015

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम (मनरेगा), राष्ट्रीय सामाजिक सहयोग कार्यक्रम (वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, विकलांगता पेंशन), प्रधानमंत्री जनधन योजना, और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन से जुड़ी सुविधाओं को अपवादों की सूची में रखा गया.

हम भारत सरकार को हिदायत देते हैं कि 23 सितंबर, 2009 से इस कोर्ट के सभी पहले के आदेशों का सख्ती से पालन किया जाएगा.

हम ये भी स्पष्ट करेंगे कि आधार कार्ड योजना पूरी तरह से स्वैच्छिक है और जब तक कोर्ट इस पर कोई अंतिम आदेश नहीं दे देती है, इसे अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता है.

14 सितंबर, 2016

15 अक्टूबर 2015 के आदेश को दुहराते हुए कोर्ट ने कई छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए आधार को अनिवार्य करने के केंद्र और राज्य सरकारों के फ़ेसलों को पलट दिया.

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