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नीतीश कुमार: छठी बार शपथ, तीन इस्तीफ़े
कहते हैं कि राजनीति में इस्तीफ़े का हथियार बहुत कम खाली जाता है. कई बार इस्तीफ़ा दिया जाता है और कई बार इस्तीफ़ा लिया भी जाता है.
भ्रष्टाचार के आरोपों के मद्देनज़र जब मीडिया में जेडीयू के हवाले से तेजस्वी यादव के इस्तीफ़े की मांग उठ रही थी तभी नीतीश ने मुख्यमंत्री पद से तीसरी बार इस्तीफ़ा देकर सबको चौंका दिया.
नीतीश ने गुरुवार को छठी बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.
27 जुलाई, 2017 को छठी बार शपथ
बिहार की राजनीति में 'सुशासन बाबू' के नाम से मशहूर रहे नीतीश कुमार ने गुरुवार को इस बार छठी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.
नीतीश ने मोदी विरोध के नाम पर 16 जून, 2013 को बीजेपी के मंत्रियों को गठबंधन सरकार से बर्खास्त कर दिया था.
इस बर्खास्तगी के ठीक चार साल बाद सुशील मोदी ने नीतीश कुमार की कैबिनेट में उपमुख्यमंत्री पद पर तेजस्वी यादव की जगह ली.
20 नवंबर, 2015 से 26 जुलाई, 2017
भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ वोटों के बिखराव को रोकने के लिए कांग्रेस, जनता दल यूनाइटेड और कांग्रेस ने एक महागठबंधन बनाया.
नीतीश कुमार ने 21 महीने तक ये सरकार चलाने के बाद ये कहते हुए बुधवार को इस्तीफ़ा दे दिया कि इस माहौल में काम करना मुश्किल है.
22 फरवरी, 2015 से 19 नवंबर, 2015
मई, 2014 के लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के ठीक एक दिन बाद नीतीश कुमार ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया.
तब नीतीश ने मुख्यमंत्री पद के लिए जीतनराम मांझी को चुना.
लेकिन मांझी और नीतीश के बीच सियासी फासला इस हद तक बढ़ गया कि नीतीश उन्हें हटाकर फिर से सत्ता में वापस आ गए.
26 नवंबर, 2010 से 17 मई, 2014
ये चुनाव नीतीश कुमार और बीजेपी के गठबंधन की फिर से जीत का चुनाव था. पांच साल सरकार में रहने के बाद दोनों दलों के गठबंधन ने सत्ता में वापसी की थी.
तब ये कहा गया कि बीजेपी और जेडीयू का गठबंधन न केवल राजनीतिक तौर पर मजबूत है बल्कि उसकी सामाजिक ज़मीन भी पुख्ता है.
24 नवंबर, 2005 से 24 नवंबर, 2010
नीतीश कुमार की जेडीयू और भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन को पहली बार जनादेश मिला.
3 मार्च, 2000 से 10 मार्च, 2000 (केवल सात दिनों के लिए)
अगस्त, 1999 के गायसल (किशनगंज, बिहार) रेल हादसे के बाद नीतीश कुमार ने रेल मंत्री के पद से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफ़ा दिया था.
तब ये कहा गया कि लाल बहादुर शास्त्री के बाद नैतिक आधार पर इस्तीफा देने वाले नीतीश दूसरे रेल मंत्री हैं.
हालांकि इसके साल भर बाद ही 2000 में समता पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन को बहुमत न होने के बावजूद तत्कालीन राज्यपाल सुंदर सिंह भंडारी ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिला दी.
बहुमत नहीं होने की वजह से नीतीश की सरकार सात दिनों तक ही चली और उन्होंने इस्तीफा दे दिया. मुख्यमंत्री के रूप में ये उनका पहला इस्तीफ़ा था.
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