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नीतीश कुमार का बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा
नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने राज्य के प्रभारी राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी से मुलाकात कर इस्तीफ़ा सौंपा है.
राज्यपाल से मुलाकात करने के बाद नीतीश कुमार ने मीडिया से कहा, "मौजूदा माहौल में मेरे लिए नेतृत्व करना मुश्किल हो गया है. अंतरात्मा की आवाज़ पर कोई रास्ता नहीं निकलता देखकर ख़ुद ही नमस्कार कह दिया. अपने आप को अलग किया."
नीतीश कुमार ने ये भी बताया कि उनके इस्तीफ़े को राज्यपाल ने मंज़ूर कर लिया है और अगली व्यवस्था तक उन्हें कार्यभार संभालने को कहा है. उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीतीश कुमार को इस्तीफ़ा देने पर बधाई दी है.
नीतीश ने यह क़दम लालू प्रसाद के बेटे और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर सीबीआई की तरफ़ एफआईआऱ दर्ज किए जाने के बाद उठाया. नीतीश कुमार ने कहा कि उन्होंने तेजस्वी से इस्तीफ़ा नहीं मांगा था, लेकिन चीज़ों पर उस पक्ष की ओर से सफ़ाई भी नहीं दी गई.
नीतीश के इस्तीफ़े की ख़ास बातें
- 20 महीने से भी ज़्यादा समय से सरकार चलाया. गठबंधन धर्म का पालन करते हुए चुनाव के दौरान जिन बातों की चर्चा की उसी के मुताबिक काम करने की कोशिश की. जितना संभव हुआ मैंने काम करने कोशिश की.
- 20 महीने बाद जो चीज़ें उभकर सामने आईं उस माहौल मेरे लिए काम करना संभव नहीं था. हमने कभी किसी का इस्तीफा नहीं मांगा. लालू जी से भी बातचीत होती रही. तेजस्वी भी मिले. हमने यही कहा था कि जो आरोप लगे हैं उसके बारे में बताइए. आम जन के बीच जो अवधारणा बन रही है उसमें सफ़ाई देने की ज़रूरत थी. हमने अपनी तरफ़ से बहुत कोशिश की.
- हमने इस मसले पर राहुल जी से भी बात की. उन्होंने ऑर्डिनेंस फाड़ा था. हमने कहा कि कोई रास्ता निकालिए. लालू जी के साथ कोई संवादहीनता नहीं थी. वहां से उम्मीद थी कि संकट में हैं तो उनकी रक्षा कीजिए. यह कोई संकट नहीं था क्योंकि ख़ुद से लाया गया था. मुझे लगा कि वह कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं. ऐसी स्थिति में मेरे लिए सरकार चलाने का कोई आधार नहीं था.
- मैंने कौन सा प्रयत्न नहीं किया. मैंने नोटबंदी का समर्थन किया. उसके लिए मेरे बारे में क्या-क्या नहीं कहा गया. धन-संपत्ति ग़लत तरीक़े से अर्जित करने का कोई मतलब नहीं है. कफ़न में कोई जेब नहीं होती है. कोई लेकर नहीं जाता है. विपक्षी एकता का समर्थक रहा हूं. लेकिन किस बात के लिए विपक्षी एकता. हमारे बारे में क्या-क्या नहीं कहा गया. मैं इन सारी चीज़ों को झेलता रहा हूं. हम इस परिस्थिति में क्या कर सकते हैं. सिर्फ़ प्रतिक्रियावादी एजेंडा से काम नहीं चलने वाला है.
- मैंने अपनी अंतरात्मा की आवाज़ पर इस्तीफा दे दिया. देखा कि कोई रास्ता नहीं है तो नमस्कार किया. लगा कि काम नहीं कर सकते हैं तो ख़ुद को सत्ता से अलग कर लिया. मैंने त्यागपत्र दे दिया है. आगे क्या होगा, कब होगा, कैसा होगा सब भविष्य पर छोड़ दिया जाए.
- 20 महीना हमने ठीक से सरकार चला दिया. हालांकि कई तरह की कठिनाइयों को हम झेलते रहे. अब तो पूरा का पूरा डिस्कोर्स बदल गया. बिहार के हित में जो होगा हम करेंगे.
तेजस्वी पर आरोप के बाद इस्तीफ़ा
पिछले महीने सीबीआई ने भ्रष्टाचार के मामले में लालू यादव और उनके परिवार के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी.
बिहार में तेजस्वी यादव को लेकर जारी तनाव के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जेडीयू विधायक दल की बैठक बुलाई थी. इस बैठक के बाद नीतीश कुमार राज्यपाल से मिलने गए और अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया.
नीतीश कुमार ने भारतीय जनता पार्टी से गठबंधन बनाने से इनकार नहीं किया है, उन्होंने कहा, "अगर बिहार के हित में हुआ तो विचार करेंगे."
इससे पहले आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने कहा था कि नीतीश कुमार ने तेजस्वी यादव को इस्तीफ़ा नहीं देने के लिए कहा है. तेजस्वी यादव ने भी यही बात दोहराई थी. लेकिन इसके कुछ घंटे बाद ही नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया.
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