'अच्छे दिन मतलब मियां लोगों को ठीक कर देंगे': पूर्व सांसद मोहम्मद अदीब

- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
"इस देश की मिट्टी आरएसएस वालों को ज़्यादा दिनों तक बर्दाश्त नहीं करेगी, ये देश जीतेगा, इस तरह की वहशियाना हरकतों पर हम सब जीतेंगे. हिंदुस्तान जीतेगा."
स्वराज अभियान के संयोजक योगेंद्र यादव ने लिंचिंग की घटनाओं के ख़िलाफ़ हरियाणा के मेवात समाज की ओर से जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन में अपनी बात इन शब्दों में रखी.
योगेंद्र यादव ने कहा, "गो के नाम पर हत्या पर प्रधानमंत्री के बयान में न सच्चाई थी, न संवेदना है और न संकल्प है. अगर सच्चाई होती तो प्रधानंत्री कुबूल करते कि मेरे देश में और बीजेपी के राज में हत्याएं हो रही हैं. अगर संवेदना होती, दिल में दर्द होता तो प्रधानंत्री पीड़ितों के परिवारों से मिलते, अफ़सोस ज़ाहिर करते. अगर संकल्प होता तो कहते कि जिन्होंने ये हरकत की है उन्हें चुन-चुनकर सज़ा दिलवाउंगा."
योगेंद्र यादव ने कहा, "जिस बयान में सच्चाई, संवेदना और संकल्प ही न हो क्या किसी के ज़ख़्म पर ये बयान मलहम का काम करेगा? नहीं." प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि गोरक्षा के नाम पर हिंसा स्वीकार्य नहीं है.
प्रदर्शन में शामिल राज्यसभा के पूर्व सांसद मोहम्मद अदीब ने कहा कि टेलीविज़न ने एक हिंसक तबका तैयार कर दिया है.
केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए मोहम्मद अदीब ने कहा, "आज देश में ना सामान बिक रहा है न नौकरियां मिल रही हैं. कहा जा रहा है कि अच्छे दिन आएंगे. अच्छे दिनों का मतलब है मियां लोगों को ठीक कर देंगे, मुल्क बर्बाद कर देंगे."

हाल के दिनों में लिंचिंग यानी भीड़ के हाथों निर्दोष लोगों के क़त्ल की घटनाओं को लेकर ग़ुस्सा बढ़ता जा रहा है.
पहले मुसमानों ने ईद की नमाज़ काली पट्टी बांधकर पढ़ी. उसके बाद #NotInMyName के तहत दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में प्रदर्शन हुए और अब मेवात समाज ने ये प्रदर्शन किया है.
रविवार को हुए प्रदर्शन में क़रीब दो हज़ार लोग शामिल थे जिनमें अधिकतर युवा थे. इनमें से कई मेरठ और मुरादाबद जैसे शहरों से आए थे.
इस संवाददाता ने जितने भी युवाओं से बात की उनका कहना था, "अब मुसलमानों के सब्र का बांध टूट रहा है. यदि ऐसी घटनाएं होती रहीं तो देश के अंदरूनी हालात ख़राब हो सकते हैं."
एक युवा ने कहा, "आप अंदाज़ा लगाइये कि यदि भटके हुए मुसलमान युवाओं ने हमलावरों को उन्हीं के अंदाज़ में जवाब देना शुरू कर दिया तो क्या होगा?"

प्रदर्शन के आयोजकों में से एक क़ासिम मेवाती ने कहा, "हर ईद पर सरकार हमारे घर एक लाश भेज रही है. पिछली ईद पर हमें डींगरहेड़ी (गाय खाने के आरोपों के चलते एक महिला और बच्ची के साथ सामूहिक गैंगरेप और हत्या) का मामला दिया, इस ईद पर जुनैद दे दिया. रमज़ान में पहलू ख़ान का क़त्ल कर दिया."

गोरक्षा के नाम पर होने वाली हिंसा के ख़िलाफ़ प्रधानमंत्री के बयान को राजनीतिक स्टंट बताते हुए क़ासिम कहते हैं, "एक ओर पीएम बयान देते हैं और दूसरी ओर अलीमुद्दीन का क़त्ल हो जाता है, इसका मतलब है कि ये बयान राजनीतिक स्ंटट के अलावा कुछ भी नहीं है."
वहीं रमज़ान मेवाती कहते हैं, "अभी हम सांकेतिक तौर पर जंतर-मंतर आए हैं लेकिन यदि ये वारदातें नहीं रुकी तो पूरे देश में इस हिंसा के ख़िलाफ़ एक व्यापक आंदोलन होगा."














