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कैसी होती है नौटंकी में नाचने वाली लड़कियों की ज़िंदगी?
नौटंकी भारत की सबसे पुरानी लोक कलाओं में से एक है. छोटे क़स्बों और शहरों में ये कला ख़ासी लोकप्रिय है.
फ़ोटोग्राफर उदित कुलश्रेष्ठ बता रहे हैं कि स्मार्टफ़ोन पर आसानी से उपलब्ध मनोरंजन के दौर में ये कला कैसे बची हुई है.
पारंपरिक पशु मेलों में आज भी नौटंकी और नाच देखने के लिए भीड़ उमड़ती है. हाल ही में बिहार के सोनपुर में लगे मशहूर पशु मेले में कम से कम ऐसी आठ नौटंकी या डांस कंपनियों ने अपनी प्रस्तुति दी.
टिकट आमतौर पर 100 रुपए से लेकर 500 रुपए तक के होते हैं और अगर नाचने वाले चर्चित हों तो बहुत जल्द ही ख़त्म भी हो जाते हैं.
नौटंकी कलाकार आम तौर पर पौराणिक कथाओं या चर्चित लोक कथाओं की कहानी पर आधारित प्रस्तुतियां ही देते हैं. कहानी को डांस, संगीत और नाटक के ज़रिए कहा जाता है.
प्रस्तुति आम तौर पर बेहद हल्के माहौल में होती है और लोग डांस या नाटक को दोबारा करने की मांग भी करते रहते हैं. नौटंकी में ज़्यादातर लड़कियां काम करती हैं जो अपने ही सहयोगियों के बनाए गानों पर नाचती हैं.
स्टेज पर रॉकस्टार की तरह जाने से पहले ये कलाकार मंच के पीछे पर्दे से बने छोटे से मेकअप रूम में तैयार होती हैं.
संगीता कहती हैं कि वो ग़रीबी की वजह से ये काम करती हैं. "मेरे पास खाने को कुछ नहीं था. फिर मैंने नाचना शुरू कर दिया. लेकिन अब मुझे नाचना पसंद है, अब मेरे पैर नहीं रुकते."
वो कहती हैं कि उन्होंने नाचना बॉलीवुड फ़िल्मों को देखकर और अपने साथी डांसरों से सीखा है.
वो कहती हैं कि कभी-कभी ये काम गंदा हो जाता है. कभी-कभी प्रस्तुति शाम को 5 बजे से अगले दिन सुबह तक चलती है. सोनपुर मेले में एक प्रस्तुति के दौरान कई बार शराब के नशे में धुत दर्शकों ने संगीता को छूने की कोशिश की.
34 वर्षीय मौसमी सरकार, एक दशक से अधिक से नौटंकी में प्रस्तुति दे रही हैं. वो कहती हैं कि उनकी कला उन्हें दुबई और नैरोबी जैसी जगहों तक ले गई है.
वो कहती हैं, "मुझे अपने समूह के साथ यात्रा करना अच्छा लगता है. मैंने सरकारी कार्यक्रमों में भी प्रस्तुति दी है"
हालांकि मौसमी का कहना है कि इस काम से जो पैसा वो कमाती हैं उससे घर चलाना मुश्किल है.
वो बताती हैं, "मैं रोज़ाना दो हज़ार रुपए कमाती हूं. सरकार हमारे बच्चों को नौकरी दे और जब हम रिटायर हों तो पेंशन दे."
नाचने वाली इन महिला कलाकारों को आमतौर पर एक कलाकार के रूप में सम्मान नहीं मिलता है.
अमित कुमार सिंह ने तीन साल पहले चांदनी से शादी की थी और उन्हें इसके लिए अपनी पारिवारिक संपत्ति पर हक़ छोड़ना पड़ा. अब वो नौटंकी में ही छोटे-मोटे काम करते हैं.
अमित कहते हैं, "मैं एक संपन्न परिवार से हूं लेकिन चांदनी से शादी के बाद उन्होंने मुझसे संपर्क तोड़ लिया. आज मेरे पास कुछ नहीं है."
लेकिन नौटंकी प्रस्तुतियों का समापन हमेशा शांति से नहीं होता. कई बार नशे में धुत्त लोग आपस में उलझ जाते हैं और कुर्सियां तक तोड़ देते हैं.
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