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मोदी से मिलते वक़्त प्रियंका चोपड़ा की ड्रेस ग़लत थी: शायना एनसी
जब किसी महिला सिलेब्रिटी को कपड़े को लेकर सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जाता है तो एक महिला नेता को कैसा लगता होगा?
हाल ही में बॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा और दीपिका पादुकोण को ऑनलाइन बदतमीजी का सामना करना पड़ा था. बीबीसी हिन्दी के लिए हिना कुमावत ने मुंबई में बीजेपी नेता शायना एनसी से यही सवाल पूछा. इस मामले में शायना ने बीबीसी हिन्दी से अपनी राय विस्तार में बतायी. पढें, उन्हीं के शब्दों में-
भारत एक रूढ़िवादी समाज है. हमें नहीं भूलना चाहिए कि इसके अपने कायदे क़ानून हैं. सोशल मीडिया अपनी बात और विचार रखने का एक प्लेटफ़ॉर्म ज़रूर है लेकिन यहां आपके सारे प्रशंसक ही नहीं होते.
यहां आपके प्रशंसक हैं तो निंदक भी हैं. इसलिए आपको तारीफ़ और आलोचना दोनों के लिए तैयार रहना चाहिए. आपके प्रशंसक आपके बारे में हर चीज़ को जानना चाहते हैं. वो इसीलिए आपसे जुड़ते भी हैं. इसी प्रक्रिया में आपके प्रशंसक कई बार अजीब व्यवहार कर बैठते हैं.
उनके मन में जो चीज़ें दबी होती हैं वो जाने-अनजाने में सामने आ जाती हैं. वो भाषा के स्तर पर भी कई बार अश्लीलता के रूप में दिख जाती हैं.
किस मौके पर क्या पहनें?
सोशल मीडिया एक वर्चुअल दुनिया है जहां आप लोगों के बारे में बहुत कुछ जान नहीं सकते. ऐसे में कोई महिलाओं के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करता है तो उसकी शिनाख़्त मुश्किल है.
प्रियंका किस कपड़े में प्रधानमंत्री से मिलेंगी या दीपिका क्या पहनकर फ़ोटोशूट कराएंगी इसे प्रशंसक या निंदक नहीं तय कर सकते. कोई किस कपड़े में तस्वीर डाल रहा है यह उसका व्यक्तिगत मामला है.
हालांकि किस मौके पर क्या पहनना चाहिए इसकी समझ भी सिलेब्रिटीज में होनी चाहिए. ऐसा बिल्कुल नहीं है कि हर बार प्रशंसक ही ग़लत होते हैं.
क्या प्रियंका साड़ी नहीं पहनती हैं? ज़ाहिर है कि प्रियंका कई मौक़ों पर साड़ी पहनती हैं. ऐसा वह प्रधानमंत्री से मिलते वक़्त भी कर सकती थीं. साड़ी तो हमारी राष्ट्रीय पोशाक की तरह है. साड़ी नहीं तो कुर्ता भी पहना जा सकता था. वह दूसरी भारतीय पोशाक भी पहन सकती थीं.
मेरा व्यक्तिगत मानना है कि प्रियंका यहां ग़लत थीं. मैं भी फ़ैशन डिजाइनर रही हूं. मुझे पता है कि साड़ी की अंतरराष्ट्रीय पहचान बन चुकी है. आप भारतीय होकर भारतीय पोशाक की उपेक्षा करेंगे तो ज़ाहिर है ऐसे में प्रशंसकों के ग़ुस्से का सामना करना पड़ सकता है.
धर्म का कपड़ों से लेना देना नहीं
हालांकि हम इसके लिए किसी को ट्रोल नहीं कर सकते हैं. धर्म का कपड़ों से कोई लेना देना नहीं है. इसलिए रमज़ान में फातिमा क्या पहनती हैं यह उनका ही चुनाव होगा. कई बार देखा जाता है कि महिलाओं की पोशाक पर लोगों की नज़र कुछ ज़्यादा ही रहती है.
कोई क्या पहने इसे लेकर हम किसी को डिक्टेट नहीं कर सकते. सानिया ने रमज़ान में फ़ोटो खींची या पहले खींची इससे किसी को क्यों समस्या होनी चाहिए? दीपिका को कितना ज़्यादा कपड़े पहनने चाहिए इसे प्रशंसक नहीं तय कर सकते.
महिलाएं कपड़े पहनने के मामले में किसी की क्यों सुनेंगी. वे इस मामले में बिल्कुल आज़ाद हैं.
किसी को ट्रोल करना बिल्कुल ग़लत है लेकिन प्रशंसक से आहत होना भी बहुत सही नहीं है. आप सोशल मीडिया पर हैं तो वहां हर तरह के लोग मिलेंगे. वे आपके हिसाब से व्यवहार नहीं करेंगे. हमें हर मत को स्वीकार करना चाहिए लेकिन अभद्र भाषा को नहीं.
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