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हाइवे पर रेप, डकैती, हत्याएं क्यों नहीं रुकतीं?
- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
बुधवार देर रात ग्रेटर नोएडा के पास यमुना एक्सप्रेस वे पर जो घटना हुई उसे देखते हुए ये सवाल एक बार फिर उठने लगे हैं कि हाइवे पर चलना कितना सुरक्षित है?
जेवर से बुलंदशहर जा रहे एक परिवार को कुछ हथियारबंद लोगों ने रोक लिया. परिवार के मुखिया की गोली मारकर हत्या कर दी और महिलाओं के साथ गैंगरेप किया गया.
पुलिस क़रीब एक घंटे बाद घटनास्थल पर पहुंची.
पिछले साल 31 जुलाई को रात ढाई बजे बुलंदशहर के पास दिल्ली कानपुर हाइवे पर भी ऐसी ही घटना हुई थी और लूटपाट के बाद परिवार के पुरुष सदस्यों को बंधक बनाकर मां और बेटी दोनों के साथ बलात्कार किया गया था.
हाइवे पर आए दिन इस तरह की घटनाएं क़ानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं और पुलिस के लिए भी एक बड़ी चुनौती हैं. साथ ही ये घटनाएं जल्दी और सुरक्षित तरीक़े से यात्रा करने के रास्ते के रूप में बनने वाले हाइवे की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े होते हैं.
उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (क़ानून व्यवस्था) आदित्य मिश्रा ने इस बारे में बीबीसी से ख़ास बातचीत में कहा, "यात्रियों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी पुलिस की ही है. पुलिस ज़िम्मेदारी निभाती भी है, फिर भी यदि इस तरह की वारदातें हो जाती हैं तो इसमें ग़लती भी पुलिस की है और हम इसे दूर करने की कोशिश कर रहे हैं."
हाइवे सुरक्षा के लिए उठाए गए क़दम
आदित्य मिश्रा ने बीबीसी को कि अब तक हाइवे पर यात्रियों की सुरक्षा उठाए गए क़दमों के बारे में बताया-
- कंट्रोल रूम की 100 नंबर की गाड़ियां हाइवे पर जगह-जगह रहती हैं जो फ़ोन करने के 15 मिनट के भीतर पीड़ित व्यक्ति के पास पहुंचने की कोशिश करती हैं.
- हाइवे पेट्रोल की भी गाड़ियां होता हैं जो हाइवे पर ही चलती रहती हैं और देखती हैं कि कहीं कोई दुर्घटना या आपराधिक कृत्य तो नहीं हो रहा है. इस पेट्रोलिंग के ज़रिए संदिग्ध और असामाजिक तत्वों पर भी नज़र रखी जाती है.
- स्थानीय थानों की ज़िम्मेदारी होती है कि अपनी ओर से इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कुछ और भी क़दम उठाएं. पेट्रोलिंग की देख-रेख स्थानीय पुलिस और थानों के ही ज़िम्मे होती है.
- रात में पुलिस पेट्रोलिंग ज़्यादा होती है और गर्मियों के दिनों में इसमें और बढ़ोतरी की जाती है.
- यात्रियों से भी ये उम्मीद की जाती है कि वो पुलिस की इस कार्यप्रणाली के प्रति जागरूक रहें और कोशिश करें कि सुनसान जगहों पर गाड़ियों को न रोकें.
- हाइवे पर जगह कंट्रोल रूम और पुलिस सुविधा के अलावा तमाम चेतावनी भरे साइन बोर्ड भी लगे रहते हैं ताकि यात्रियों को कोई परेशानी न हो.
क्यों बढ़ती हैं वारदात की घटनाएं?
- घटनाएं अक़्सर सुनसान जगहों पर होती हैं, ऐसी जगहों पर यात्रियों को भी सावधानी रखनी चाहिए. पुलिस को भी इन्हें चिह्नित करके यहां ख़ास इंतज़ाम करने चाहिए. हाइवे पर पुलिस बल की संख्या बढ़ाने पर भी विचार हो रहा है.
- 100 नंबर की सुविधा भी है लेकिन यह सुविधा तभी मिल सकती है जब पीड़ित व्यक्ति फ़ोन करने की स्थिति में हो. बुधवार की घटना में तो पीड़ित लोग 40 मिनट तक फ़ोन ही नहीं कर पाए.
- हाइवे पर लोग मदद के लिए जल्दी आगे नहीं आते क्योंकि उन्हें रुकने में डर लगता है कि पीड़ित व्यक्ति सच में पीड़ित है या फिर वो ख़ुद किसी बड़े वारदात को अंजाम देने की फिराक में है.
- गर्मी में लोग अक़्सर रात को यात्रा करते हैं और रात में ऐसी दिक़्क़तें ज़्यादा आती हैं लेकिन इनसे निपटने के लिए पुलिस नए सिरे से रणनीति बना रही है.
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