You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
हाइवे ठेकों पर पाबंदी से लाखों की जान बचेगी
- Author, भरत शर्मा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
सुप्रीम कोर्ट ने हाइवे किनारे चलने वाले ठेकों पर पाबंदी लगा दी है. 31 मार्च, 2017 के बाद इन ठेकों के लाइसेंस रिन्यू नहीं किए जाएंगे.
इन हादसों को रोकने को लेकर जागरुकता पैदा करने वाले लोग लंबे वक़्त से हाइवे किनारे बनीं शराब की दुकानें बंद करने की मांग कर रहे थे.
उम्मीद जताई जा रही है कि इस फ़ैसले से हाइवे पर होने वाले सड़क हादसों और उनमें मारे जाने वाले लोगों की संख्या में कमी आएगी.
हर साल लाखों की जान लेते हैं सड़क हादसे
कुछ महीने पहले सड़क परिवहन मंत्रालय की ओर से जारी 'रोड एक्सिडेंट्स इन इंडिया 2015' रपट जारी की थी, जिसके आंकड़े होश उड़ाने के लिए काफ़ी हैं.
इस रिपोर्ट के मुताबिक साल 2015 में सड़क हादसों की संख्या 2014 की तुलना में 2.5 फ़ीसदी बढ़कर पांच लाख का आंकड़ा पार कर गई.
रिपोर्ट के अनुसार सड़क हादसों की सबसे बड़ी वजह ड्राइवरों की गलती है.
2015 में हर दस में से आठ हादसे ड्राइवर की गलती की वजह से हुए और 62 फ़ीसदी मामलों में इसका कारण ओवरस्पीडिंग था.
ड्राइवर की गलती और शराब
ज़ाहिर है ओवरस्पीडिंग के मामले में कई बार वजह शराब का सेवन निकलती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक शराब पीने का ड्राइविंग पर गहरा असर पड़ता है.
नशे की वजह से अलर्टनेस का स्तर काफ़ी गिर जाता है और मांसपेशियों की प्रतिक्रिया में कहीं ज़्यादा वक़्त लगता है. इसके अलावा शराब आंखों की रोशनी पर भी गहरा असर डालती है.
साल 2015 में भारत में हादसों में क़रीब डेढ़ लाख लोग मारे गए, जबकि पांच लाख से अधिक ज़ख़्मी हुए. आंकड़े बताते हैं कि प्रति 100 हादसों में मरने वाले लोगों की दर 29.5 है.
सड़क हादसों का शिकार होने वाले लोगों में सबसे बड़ी संख्या नौजवानों की है. दुर्घटनाओं में मारे गए लोगों में से 54.1 फ़ीसदी 15-34 आयु वर्ग से हैं.
आंकड़ों की तह में जाएं तो पता चलता है कि पिछले साल हर रोज़ 1374 हादसे हुए, जिनमें हर दिन 400 कीमती जानें चली गईं, यानी हर घंटे 57 हादसे और 17 लोगों की मौत. ये आंकड़ा वाक़ई डरावना है.
जान के अलावा रकम का नुकसान
तमिलनाडु, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, केरल और उत्तर प्रदेश में 80 फ़ीसदी से ज़्यादा सड़क हादसे और मौतें होती हैं.
इस समस्या को लेकर काम कर रहे सेव लाइफ़ फ़ाउंडेशन के मुताबिक भारत को हर साल इन हादसों की वजह से 4.07 लाख करोड़ की चपत लगती है.
ऐसे में संभावना है कि हाइवे किनारे बने हज़ारों-लाखों ठेकों पर रोक लगने से कीमती जानें बचाई जा सकेंगी और साथ ही देश की जेब को लगने वाली चपत पर भी असर होगा.