सहारनपुर हिंसाः जो बातें अब तक पता हैं

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पांच मई को ठाकुरों और दलितों के बीच शुरू हुई जातीय हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है. इस सप्ताह मंगलवार को बसपा प्रमुख मायावती के दौरे के बाद वहां फिर से हिंसा भड़क गई जिसमें एक दलित की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए हैं.
सहारनपुर से 25 किलोमीटर दूर शिमलाना गांव में पांच मई को महाराणा प्रताप जयंती का आयोजन था, जिसमें शामिल होने के लिए पास के शब्बीरपुर गांव से कुछ लोग शोभा यात्रा निकाल रहे थे. विवाद की शुरुआत इसी घटना से हुई.
इसके बाद भड़की हिंसा में ठाकुर जाति के लोगों ने दलितों के घरों में तोड़फोड़ और आगजनी की. तब से इलाके में तनाव बरक़रार है. तब से लेकर अब तक सहारनपुर में क्या कुछ हुआ, आईए जानते हैं.

5 मई, शब्बीरपुर गांव
शिमलाना में आयोजित महाराणा प्रताप जयंती में शामिल होने जा रहे युवकों की शोभा यात्रा पर दलितों ने आपत्ति जताई और पुलिस बुला लिया.
विवाद इतना बढ़ा कि दोनों तरफ से पथराव होने लगा, इस दौरान ठाकुर जाति के एक युवा की मौत हो गई, हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण दम घुटना बताया गया.
इसके बाद शिमलाना गांव में जुटे हज़ारों लोग क़रीब तीन किलोमीटर दूर शब्बीरपुर गांव आ गए.
भीड़ ने दलितों के घरों पर हमला कर 25 घर जला दिए. इस हिंसा में 14 दलितों को गंभीर चोटें आईं. पुलिस ने दोनों पक्षों के 17 लोगों को गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया.
दलित समुदाय के लोगों का कहना है कि उनके मुहल्ले में स्थित रैदास मंदिर में अंबेडकर की मूर्ति लगाने को लेकर गांव के ठाकुर समुदाय ने विरोध जताया था और प्रशासन की इजाज़त न मिलने के कारण मूर्ति नहीं लग पाई थी.
सहारनपुर की सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षिका नीलम गोपाला के मुताबिक, दलितों में इस बात को लेकर रोष था और जब शोभा यात्रा उनके मुहल्ले से होकर निकली तो उन्होंने इसका विरोध किया.
9 मई, सहारनपुर
इस घटना से आक्रोषित दलित युवाओं के संगठन भीम आर्मी ने 9 मई को सहारनपुर के गांधी पार्क में एक विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया.
इस प्रदर्शन में सहारनपुर ज़िले से क़रीब हज़ार प्रदर्शनकारी इकट्ठा हो गए लेकिन प्रशासन की इजाज़त न होने के कारण पुलिस ने इसे रोकने की कोशिश की.
भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आज़ाद ने बीबीसी को बताया कि प्रशासन की ओर से अनुमति न मिलने के कारण प्रदर्शनकारियों में आक्रोश बढ़ा और कई जगहों पर भीड़ और पुलिस में झड़पें हुईं.
इस दौरान एक पुलिस चौकी फूंक दी गई, एक बस को जला दिया गया और कई वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया.
पुलिस ने इस मामले में भीम आर्मी और उसके संस्थापक चंद्रशेखर पर मुकदमे दर्ज किए गए.

सहारनपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सुभाष चंद्र दुबे के अनुसार, भीम आर्मी के सदस्यों पर कुल 16 मुकदमे दर्ज हैं जिनमें चंद्रशेखर का नाम भी शामिल है.
इनमें से 10 मुकदमे उन पत्रकारों ने दर्ज कराए जिनकी मोटरसाइकिलें क्षतिग्रस्त की गईं.
21 मई, जंतर मंतर, दिल्ली
चंद्रशेखर के मुताबिक नौ मई के प्रदर्शन में क़रीब 37 दलित कार्यकर्ताओं पर मुकदमें दर्ज कर पुलिस ने जेल भेजा है, जबकि क़रीब 300 अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है.
शब्बीरपुर और सहारनपुर की घटना के विरोध में भीम आर्मी ने 21 मई को दिल्ली के जंतर मंतर पर एक प्रदर्शन आयोजित किया था.
इससे एक दिन पहले बीबीसी को दिए साक्षात्कार में चंद्रशेखर ने कहा था कि वो इस प्रदर्शन में सरेंडर करेंगे, हालांकि उन्होंने ऐसा किया नहीं.
जंतर मंतर पर भीम आर्मी के हज़ारों प्रदर्शनकारी पहुंचे और यहां नौ मई के बाद पहली बार चंद्रशेखर सार्वजनिक रूप से सामने आए और भाषण दिया.
23 मई, शब्बीरपुर

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इसके तीन दिन बाद बसपा प्रमुख मायावती शब्बीरपुर के पीड़ित दलित परिवारों को देखने गईं.
मायावती सड़क मार्ग से सहारनपुर पहुंचीं और दलित परिवारों से मुलाक़ात की.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, मायावती की सभा से लौट रहे दलितों पर ठाकुर समुदाय के लोगों ने हमला किया, जिसमें एक 24 साल के दलित युवक की मौत हो गई और दो गंभीर रूप से घायल हो गए.
24 मई, सहारनपुर

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तनाव और हिंसा पर काबू न पाने के कारण सहारनपुर के दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, एसएसपी और जिलाधिकारी को उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने निलंबित कर दिया और कमिश्नर को भी हटा दिया.
ताज़ा हिंसा भड़कने पर उत्तर प्रदेश सरकार ने मायावती के दौरे को ज़िम्मेदार बताया.
पीटीआई ने यूपी पुलिस प्रमुख सुलखान सिंह के हवाले से कहा है, "मैं राजनेताओं को सहारनपुर का दौरा करने की इजाज़त नहीं भी दे सकता हूं."
इलाक़े में तनाव बरक़ार है और सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गये हैं.
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