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मुसलमान ही नहीं, हिंदू भी बने थे झारखंड में उन्मादी भीड़ के शिकार
- Author, रवि प्रकाश
- पदनाम, जमशेदपुर से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
झारखंड में बच्चा चोरी की अफ़वाह में 18 मई को सात लोगों की हत्या को कुछ लोग सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि हक़ीकत कुछ और ही है. भीड़ ने जिन लोगों की हत्या की है उनमें तीन हिन्दू युवक हैं और चार मुस्लिम. दरअसल बच्चा चोरी को लेकर जिनके भी बारे में अफ़वाह फैली, उन्हें निशाना बनाया गया.
मुस्लिमों के अलग से प्रदर्शन के कारण भी यह अफ़वाह फैली कि हत्याओं के पीछे सांप्रदायिक कारण मौजूद हैं. लेकिन हक़ीक़त ये है कि उन्मादी भीड़ के हमले में हिंदू और मुसलमान दोनों समुदायों के लोग निशाना बने.
गंगेश गुप्ता पर हमला
18 मई की रात बागबेड़ा के नागडीह गांव में बच्चा चोरी की अफ़वाह में मारे गए गंगेश गुप्ता की पेंट की दुकान थी.
लोग बारीडीह बाज़ार स्थित उनकी दुकान से पेंट ख़रीदकर अपने घरों को रंगते थे, लेकिन एक अफ़वाह पर उन्मादी भीड़ ने उन्हें अपना निशाना बना दिया.
गंगेश की उम्र महज़ 22 साल थी. वह अपने मां-बाप के इकलौते बेटे थे. अब उनके घर में सिर्फ़ दो बहने हैं. बहनों का रोते-रोते बुरा हाल है.
पूरे परिवार ने पिछले तीन दिनों से कुछ भी नहीं खाया है.
उनके चाचा जीतेंद्र गुप्ता ने बीबीसी से कहा, ''उसकी मौत से तो घर का चिराग ही बुझ गया. हादसे के वक़्त उनके मां-बाप गोरखपुर में थे. वे गंगेश की दोनों बहनों के साथ गोरखपुर के कानापार में रहते हैं.''
उन्होंने कहा, ''अब वे लोग जमशेदपुर आ चुके हैं पर ख़ामोश हैं. उन्हें अपने जवान बेटे की हत्या ने तोड़कर रख दिया है. हमने सोचा था कि गंगेश की दुकान थोड़ी और चल जाए तो उसकी शादी करेंगे पर अब मौत का मातम है.'
गंगेश के दोस्तों की 'हत्या'
गंगेश के दो दोस्त विकास और गौतम कुमार वर्मा की भी उसी भीड़ ने हत्या कर दी. दोनों सगे भाई थे.
भीड़ इतनी पागल थी कि उसने इनके साथ जा रही उनकी दादी रामसखी देवी को भी नहीं बख़्शा. उन्हें इतना पीटा कि वह उनकी हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है.
विकास वर्मा के भाई उत्तम वर्मा भी घटना के वक़्त उनके साथ थे. वह किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से भाग निकले और पुलिस को इसकी सूचना दी.
वह इस घटना के इकलौते चश्मदीद हैं, जो बोल पाने की हालत में हैं.
उत्तम वर्मा ने बीबीसी को बताया, ''वहां क़रीब दो हज़ार लोग थे. सबने हमें घेर लिया और बच्चा चोर-बच्चा चोर कह कर चिल्लाने लगे. मेरे दोनों भाइयों और गंगेश गुप्ता को पोल से बांधकर पीटने लगे.''
उत्तम ने कहा, ''मेरी दादी को कुछ दूर ले जाकर पीटा. वो हाथ जोड़कर सबको छोड़ देने की अपील करती रहीं, लेकिन भीड़ पर इसका असर नहीं हुआ. हमसे आई कार्ड भी मांगा. कुछ भी समझ नहीं आ रहा था.''
उन्होंने बताया कि इसकी सूचना मिलते ही पुलिस वहां पहुंची. तब तक दोनों भाई जिंदा थे. उन्हें गांव के लोगों ने बंधक बना रखा था.
पुलिस ने जब उन्हें छुड़ाने की कोशिश की तो पुलिस पर भी हमला कर दिया गया. इसमें डीएसपी समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए.
जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम) के एसपी अनूप टी मैथ्यू ने बताया कि इस मामले में नागाडीह गांव के मुखिया राजाराम हेम्ब्रम और ग्राम प्रधान भीष्म के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कराई गई है. सबलोग फ़रार हैं और पुलिस इनकी तलाश कर रही है.
कड़ी सुरक्षा के बीच पुलिस ने रविवार को विकास और गौतम के शवों का पोस्टमॉर्टम कराया. देर शाम तक इनकी अंत्येष्टि कर दी जाएगी.
घर वालों ने पहले इनका पोस्टमॉर्टम कराने से इनकार कर दिया था. वे मुख्यमंत्री को बुलाने की मांग कर रहे थे.
इस बीच मुख्यमंत्री रघुवर दास ने लोगों से अफ़वाह पर ध्यान नहीं देने की अपील की है. पुलिस ने अख़बारों में इसका विज्ञापन भी प्रकाशित कराया है.
18 मई को हुई दो अलग-अलग घटनाओं में भीड़ ने बच्चा चोरी की अफ़वाह में कुल 7 लोगों की हत्या कर दी थी.