‘जैसे उसने मेरे शौहर को मारा, उसे भी वैसी मौत मिले’

    • Author, रवि प्रकाश
    • पदनाम, हल्दीपोखर (जमशेदपुर) से, बीबीसी हिंदी के लिए

'बताइए हम कैसे जिएंगे. कैसे पालेंगे अपनी बेटियों को. बड़ा परिवार है. कमाने वाले मेरे शौहर अकेले थे.'

'आप देखे हैं उ (वह) फोटो. वीडियो. सोचिए, उनलोगों ने कैसे मेरे शौहर को मारा है. कितना तड़प-तड़प कर मरे होंगे मेरे शौहर. कितना याद किए होंगे हमको. वे सउदिया में ही ठीक थे. बेकार इहां (यहां) आए. जिसने भी उनका कत्ल किया है, अल्लाह उसको भी वैसी ही मौत दे. उसी दरिंदगी से मारे.'

बीबीसी से यह कहते हुए नाजनीन परवीन दहाड़ मारकर रोने लगती हैं.

दरअसल, झारखंड के कोल्हान प्रमंडल में गुरुवार को बच्चा चोरी की अफ़वाहों के बीच दो जगहों पर उग्र भीड़ ने छह लोगों की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी.

ग्रामीणों को शक था कि मारे गए लोग बच्चा चोर गिरोह के सदस्य हैं.

इसके चार दिन पहले भी जादूगोड़ा में इसी तरह की अफ़वाह के बाद भीड़ ने दो अन्य लोगों को पीट-पीटकर मार डाला था.

नाजनीन के पति सज्जाद को भीड़ ने पास के गांव शोभापुर में पीट-पीट कर मार डाला था.

इस हमले में अपनी जान गंवा चुके चारों लोग हल्दीपोखर गांव के रहने वाले थे. इस कारण हल्दीपोखर में लोग रतजगा कर रहे हैं.

यहां अभूतपूर्व तनाव है. यह गांव जमशेदपुर से करीब 22 किमी दूर कव्वाली थाने का हिस्सा है. जबकि, जिस गांव शोभापुर में यह वारदात हुई, वह यहां से महज 12 किमी दूर सरायकेला खरसांवा जिले की सरहद में है.

हल्दीपोखर के ग्रामीणों ने भीड़ द्वारा मारे गए चारों लोगों की लाश लेने से इंकार कर दिया है. इनके विरोध के कारण पुलिस इनका पोस्टमार्टम कराने में भी नाकाम रही.

प्रशासन का विरोध

यहां के मुखिया सैयद जबीउल्लाह ने बीबीसी को बताया, "कल और आज गांव में लोगों की बैठक हुई. इसमें फैसला लिया गया कि जबतक सरकार मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये का मुआवजा और परिवार के किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी नहीं देती, गांव वालों का विरोध जारी रहेगा. अगर प्रशासन ने शीघ्र ही हत्यारों को गिरफ्तार नही किया, तो हम अपने विरोध को और धार देंगे."

उन्होंने बताया कि गांव के लोगों ने कल जुमे की नमाज भी काला बिल्ला लगाकर पढ़ी.

इस बीच पूर्वी सिंहभूम के डीडीसी सूरज कुमार व ग्रामीण एसपी शैलेंद्र बरनवाल को हल्दीपोखर में तीव्र विरोध का सामना करना पड़ा.

जैसे ही उनलोगों ने ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की, भीड़ हल्ला करने लगी. मृतकों के परिजनों ने उनके द्वारा मुआवजे के तौर पर लाए गए 2-2 लाख रुपये के चेक को भी लेने से मना कर दिया.

पूर्वी सिंहभूम के डीसी अमित कुमार भी इमारते शरिया के प्रतिनिधियों को लेकर देर रात हल्दीपोखर पहुंचे लेकिन ग्रामीणों ने उन्हें भी बैरंग लौटा दिया.

25 लाख की मांग

इस घटना में मारे गए शेख नईम की बेटी को हर पंद्रह दिन पर डायलिसिस कराना पड़ता है. उनका भरा-पूरा परिवार है. उनके चाचा रफीक आलम ने बीबीसी को बताया कि नईम के तीन बच्चे अनाथ हो गए हैं.

वे जिंदा थे, तो बिजनेस कर परिवार को पालते थे. उनके पिता भी बुजुर्ग हैं. अब उनके घर में कमाने वाला कोई सदस्य नहीं है. ऐसे में मुख्यमंत्री द्वारा घोषित 2 लाख रुपये के मुआवजे से क्या होगा. सरकार 25 लाख का मुआवजा दे और नईम की पत्नी को सरकारी नौकरी.

रफीक आलम ने मुझसे बातचीत में उस वीडियो में शेख नईम के होने की पुष्टि की, जो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है. इसमें वे हमलावरों से खुद को छोड़ देने की अपील करते दिख रहे हैं.

इस बीच एडीजी (आपरेशंस) आर के मल्लिक ने बीबीसी को बताया है कि बच्चा चोरी की कोई रिपोर्ट किसी थाने मे दर्ज नही करायी गयी है. यह महज एक अफवाह है. पुलिस इसकी बारीकी से जांच कर रही है.

गुरुवार को शोभापुर और बागबेड़ा में हुई दो घटनाओं में भीड़ द्वारा मारे गए सात लोगों के मामले में पुलिस ने जांच प्रारंभ कर दी है. शीघ्र ही हम इस मामले में गिरफ्तारी भी करेंगे.

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