You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
'आरक्षण हटाओ लेकिन पहले ख़त्म हो जाति व्यवस्था'
गुजरात के उना में दलितों की पिटाई के खिलाफ़ विरोध से प्रकाश में आए दलित नेता जिग्नेश मेवानी का मानना है कि आरक्षण ख़त्म होना चाहिए लेकिन चूंकि जाति व्यवस्था उससे भी पुरानी है तो पहले उसे ख़त्म किया जाए.
जिग्नेश मेवानी ने कहा कि वो किसी राजनीतिक पार्टी के साथ नहीं जुड़ने जा रहे हैं.
पिछले साल उना कांड के खिलाफ़ दलितों को इकट्ठा करने वाले जिग्नेश मेवानी का कहना है कि संघ परिवार के हिंदू राष्ट्र बनाने के एजेंडे में मुसलमानों और दलितों को निशाना बनाया जा रहा है.
बीबीसी हिंदी के साथ बातचीत में जिग्नेश मेवानी कई मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी. यहां पढ़ें.
- सहारनपुर में दलित-ठाकुर तनाव- शब्बीरपुर में दलितों का साफ़ तौर पर कहना है कि रविदास के मंदिर में डॉ अबंडकर की मूर्ति लगाए इसमें ठाकुरों को आपत्ति क्यों हो, जुलूस लेकर निकले ठाकुरों की दलितों को उकसाने की मंशा थी तब जाकर हिंसा हुई. ठाकुर युवक की मौत दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक मौत दम घुटने से हुई. कोई ये नहीं पूछ रहा कि रविदास मंदिर के बाहर तलावरें लेकर ठाकुर समुदाय के लोग क्या कर रहे थे.
- दलितों की सुरक्षा- उत्तर प्रदेश में और इस देश में कानून का राज होता या संविधान पूर्ण रूप से लागू होता तो भीम आर्मी या किसी संगठन की ज़रूरत नहीं होती, इसका मतलब है कि दलित सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं.
- दलित नेताओं की भूमिका को लेकर जिग्नेश कहते हैं कि दलित आंदोलन और दलित राजनीति में बहुत गड़बड़ है, बड़े दलित नेता हिंदू राष्ट्र बनाने पर तुले कैंप में जाकर बैठे हैं. बसपा प्रमुख मायावती चुनाव में मिली हार में खोई हुई हैं, उन्हें खुलकर सामने आना चाहिए, शब्बीरपुर जाकर पीड़ितों से मिलना चाहिए, सड़कों पर उतरकर दलित आंदोलन खड़ा करें.
- आरक्षण ख़त्म हो, लेकिन पहले जाति व्यवस्था ख़त्म हो. आरक्षण को लेकर पटेल और गुर्जर लोग जो मांग कर रहे हैं, युवाओं की मांग ये होनी चाहिए कि रोज़गार पैदा कीजिए. आरक्षण पर राजनीति करने वालों को ये समझना चाहिए कि जाति आधारित अत्याचार पर कोई बात नहीं करता.
- दलित आंदोलन पूरी तरह से बिखरा हुआ है इसलिए सड़कों पर एक मज़बूत दलित आंदोलन नहीं दिख रहा, वेमुला और उना कांड के बाद हज़ारों दलित सामने आए. संघ परिवार के हिंदू राष्ट्र बनाने की राजनीति के कारण मुस्लिम और दलितों को निशाना बनाया जा रहा है.
- दलित हिंदू नहीं है. दलित मंदिर भी जाते हैं, पूजा भी करते हैं लेकिन वे वर्ण व्यवस्था से बाहर हैं, वो अति शूद्र समझे जाते हैं, इसलिए उन्हें हिंदू धर्म की संस्कृति को छोड़ देना चाहिए. उन्हें अपने उत्थान के बारे में सोचना चाहिए.
- 2017 के विधानसभा चुनाव में गुजरात का दलित बीजेपी के साथ नहीं जाएगा और अब दलित हिंदूत्व के एजेंडे में शामिल नहीं होगा.
- दलित आंदोलन जाति निर्मूलन की लड़ाई है और दलितों को भी बाकी शोषित, पीड़ित वर्गों से जुड़ना चाहिए. ये आंदोलन जाति आधारित नहीं बल्कि आर्थिक मुद्दों के आधार पर होना चाहिए.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)