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बीबीसी विशेष: 'जय भीम' के चार युवा स्वर
बाबा साहेब अंबेडकर की 125वीं सालगिरह के अवसर पर बहुजन समाज का प्रतिरोध नए नायकों और प्रतीकों के रूप में हमारे सामने आ रहा है.
उना का जवाब, सैराट और कबाली जैसी फिल्मों की कामयाबी, रोहित वेमूला के बाद देश भर में अंबेडकरवादी समूहों की लगातार बढ़ती सक्रियता और विकसित होते नए सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों के बीच बहुजनों के आइकन बन रहे हैं, उभर रहे हैं.
बीबीसी हिंदी पर शुरू होने वाली एक विशेष सिरीज़ के ज़रिए जानिए चार युवाओं- जिग्नेश मेवाणी, शीतल साठे, भंवर मेघवंशी और सूरजपाल राक्षस- के बारे में.
शीतल साठे, संस्कृतिकर्मी हैं. सतारा, महाराष्ट्र में रहती हैं. पति जेल में हैं. दलित और स्त्री सवाल पर देश के प्रमुख स्वरों में गिनी जा रही हैं.
भंवर मेघवंशी राजस्थान के भीलवाड़ा में रहते हैं. सामाजिक कार्यकर्ता और स्वतंत्र पत्रकार हैं.
सूरजपाल राक्षस पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 'भीम ज्ञान चर्चा' के प्रमुख कार्यकर्ता हैं. गांव-गांव तक वैचारिक और सांस्कृतिक अंबेडकरवाद पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं.
जिग्नेश मेवानी गुजरात के उना आंदोलन के नायक के तौर पर उभरे है और अंबेडकरवादी आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं.
हमारी कोशिश रहेगी कि बीबीसी हिंदी के ज़रिए हम आपको इनके काम और व्यक्तित्व के बीच की कडियों को जोड़कर दिखा सकें.
इस सिरीज़ में हम इस बात की भी पड़ताल करेंगे कि आज के बहुजन आंदोलन को दिशा देने में इनकी क्या भूमिका बनती दिख रही है.
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