योगी आदित्यानाथ के ख़िलाफ़ दंगा मामले में आगे क्या?

    • Author, फ़ैसल मोहम्मद अली
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

उत्तर प्रदेश सरकार की ना के बाद सामाजिक कार्यकर्ता परवेज़ परवाज़ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ख़िलाफ़ अदालत में संशोधित अर्ज़ी दाख़िल करने जा रहे हैं.

गुरुवार को राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद अदालत ने परवेज़ परवाज़ से केस में एक संशोधित अर्ज़ी देने का हुक्म दिया.

सुनवाई में मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने अदालत से कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री पर 2007 गोरखपुर दंगा मामले में मुक़दमा चलाने की इजाज़त नहीं दे सकती है.

सबूतों पर सवाल

गोरखपुर के परवेज़ परवाज़ सुनवाई के समय ख़ुद भी इलाहाबाद हाई कोर्ट में मौजूद थे. परवेज़ अपने वकील फ़रमान सिद्दीक़ी से सलाह-मशविरा कर रहे हैं और मई के चौथे हफ़्ते तक कोर्ट में नई अर्ज़ी दाख़िल कर देंगे.

उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले में सबूत के तौर पर सौंपे गए वीडियो की प्रमाणिकता पर भी सवाल खड़े किए हैं.

परवेज़ परवाज़ कहते हैं, "योगी के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाए जाने की इजाज़त कई साल पहले 2014 में ही मांगी गई थी लेकिन उस समय की समाजवादी पार्टी की सरकार इस पर बैठी रही और इस बीच जिन पर दंगा भड़काने का आरोप था वो सूबे के मुखिया बन बैठे."

परवाज़ का ये भी कहना था कि दिल्ली के लैब से करवाई गई फॉरेंसिक रिपोर्ट पर अगर प्रशासन को किसी तरह का संदेह था तो इस बात को पहले उठाया जाना चाहिए था.

पेशे से पत्रकार रहे, लेकिन आजकल बेरोज़गार' 62 साल के परवाज़ हताश नहीं और उन्हें इन हालात में भी अदालत में रोशनी दिखती है, जो इंसाफ़ करना चाहती है.

'जिसकी लाठी, उसकी भैंस'

वो बताते हैं कि किस तरह 2007 से लेकर जब वो दंग भड़काने के लिए एफ़आईआर दाख़िल करने हाई कोर्ट गए थे, अदालतों ने उन्हें राहत दी और प्रशासन पूरे मामले को लटकाता रहा.

वो बताते हैं, "पहले बहुजन समाज पार्टी के समय केस लंबे वक़्त तक क्राइम-ब्रांच-सीआईडी के पास अटका रहा, और फिर जब मौक़ा योगी आदित्यनाथ के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने की इजाज़त का आया तो अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी सरकार उसे दबाए बैठी रही."

ये मामला मज़हब और जाति के नाम पर दो समुदायों में नफ़रत फैलाने का है जिसमें योगी आदित्यनाथ और चार दूसरे लोगों के ख़िलाफ़ आरोप लगाए गए हैं.

परवेज़ कहते हैं कि अब योगी राज्य के मुख्यमंत्री बन गए हैं तो ये जिसकी लाठी उसकी भैंस वाला मामला बन गया है.

मुक़दमे की अगली सुनवाई 7 जुलाई को होगी.

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