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झारखंड: दाल में काला है, कौन सा नमक डाला है
- Author, रवि प्रकाश
- पदनाम, रांची से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
झारखंड सरकार इन दिनों नमक को लेकर परेशान है. इस 'झारखंड नमक' के कारण लोगों की दाल काली हो जा रही है.
शिकायतों से तंग आकर सरकार ने इसकी जांच के आदेश दिए हैं. अफसर अब यह जांचने में लगे हैं कि इसके डालते ही दाल और सब्जियां काली क्यों हो जा रही है. कहीं इस नमक में कोई गड़बड़ी तो नहीं.
झारखंड के खाद्य व आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने बीबीसी से बातचीत में स्वीकार किया कि इस नमक के कारण लोगों की दाल काली हो जा रही है.
उन्होंने बताया कि शिकायतों के बाद इसकी आपूर्ति पर रोक लगा दी गयी है. अब हम पुराना नमक ही भेज रहे हैं, जिसमें सिर्फ़ आयोडिन है.
मंत्री सरयू राय ने कहा, "मैंने विभागीय सचिव को कहा है कि वे नए सिरे से टेंडर निकालें. यह देखा जाए कि नमक के फोर्टिफिकेशन में तय मानदंडों का पालन किया गया है या नहीं. इस नमक में आयरन भी मिलाया गया है. ताकि बीपीएल परिवार की गर्भवती महिलाओं व बच्चों में आयरन की कमी दूर की जा सके. अंत्योदय कार्डधारी परिवारों को यह नमक सिर्फ़ एक रुपये प्रति किलो की दर से दिया जाता है."
नमक का गुजरात कनेक्शन
जब मैंने उनसे पूछा कि इसकी आपूर्ति किन कंपनियो ने की थी. सरयू राय ने कहा- "पांचों प्रमंडलों के लिए अलग-अलग कंपनियों से नमक की खऱीदारी की गई. यह विभागीय अफसरों के जिम्मे है कि वे कंपनी का चयन कर उससे खरीदारी करें."
हालांकि, झारखंड नमक के पैकेट पर जिस कंपनी का नाम अंकित है, वह गुजरात की है.
सरकारी स्तर पर रोक के बावजूद राशन दुकानदारों के पास बड़ी मात्रा में पुराना स्टॉक पड़ा है. टांगर (चान्हो) के सरकारी राशन डीलर नीतेश कुमार भी इनमें शामिल हैं.
उन्होंने बताया कि नए नमक की आपूर्ति नहीं होने के कारण वे लोगों को पुराना वाला पैकेट ही दे रहे हैं. बकौल नीतेश, उन्हें लोगों ने बताया है कि वे इस नमक का उपयोग पालतू पशुओं के खाने में कर रहे हैं.
जुबां पर नहीं लागा...
टांगर की बल्की उराइन ने बताया कि उन्होंने इस नमक का उपयोग करना छोड़ दिया है. उन्होंने बीबीसी से कहा, "डर लगता है कि इससे कही तबीयत न ख़राब हो जाए. जब पहले इससे खाना बनाए तो दाल और सब्जी सब काली हो गई."
इसी गांव की गंगी देवी ने बताया कि नमक को पानी में डालने से शीशे के महीन टुकड़े भी निकलते हैं. अब वे बाजार से 10 रुपये प्रति किलो वाला नमक ख़रीद रही हैं.
35 लाख बीपीएल परिवार
2012-13 में तत्कालीन योजना आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक़ झारखंड में 35 लाख परिवार गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर करते हैं. यह संख्या राज्य के कुल 69 लाख परिवारों की आधी से थोड़ी अधिक है.
इन्हीं 35 लाख बीपीएल परिवारों के लिए सरकार 'झारखंड नमक' बनवा रही है. इसके डबल फोर्टिफिकेशन के बाद इसमें आयरन की मात्रा 850 पीपीएम से अधिक है.
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