You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
नज़रिया: अब केजरीवाल सरकार के लिए भी ख़तरे की घंटी!
- Author, अरविंद मोहन
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
दिल्ली नगर निगम के चुनाव के नतीजे हैरानी वाले नहीं है. इससे ये लगता है कि मोदी की हवा अभी भी चल रही है.
बीजेपी ने सिर्फ इतना ही किया है कि 10 साल की सत्ता विरोधी लहर को उन्होंने अपने सारे पार्षदों के टिकट काट कर नए उम्मीदवार उतारे.
एक दूसरा रिस्क उन्होंने मनोज तिवारी को कमान देकर लिया.
वो दिल्ली के लिए नए हैं और बीजेपी का पारंपरिक वोटर पंजाबी और बनिया वोटर है. ऐसे में एक नए चेहरे को लाना एक प्रकार का रिस्क ही था.
ये दो काम ही बीजेपी ने अपनी ओर से किया, बाकी काम अपने आप हो गया या केजरीवाल ने खुद कर दिया, जिससे बीजेपी आसानी से जीत गई.
दिल्ली नगर निगम
हालाँकि जिस स्तर पर एग्ज़िट पोल से शोर मच रहा था, वैसा नतीजा तो नहीं आया.
केजरीवाल ने कुछ ग़लतियां कीं. उनकी सबसे बड़ी ग़लती तो यही थी कि जिस चुनाव में उन्हें ख़ुद को कोई मुद्दा नहीं बनाना चाहिए था, उन्होंने बनाया.
उन्होंने बीजेपी नेता विजेंद्र गुप्ता के साथ अपनी तस्वीर छापी और बेहतर प्रशासन के दावे किए.
जबकि दिल्ली के नगर निगम में 10 साल के सत्ता विरोधी लहर और गंदगी आदि को मुद्दा नहीं बना पाए.
अंततः ये केजरीवाल के लिए काफ़ी महंगा पड़ा. सिर्फ इतना ही नहीं है, संभव है कि उनकी सरकार के लिए भी ख़तरा पैदा हो जाए.
राजनीतिक विकल्प
ये भी हो सकता है कि उनकी पार्टी और उनके नेतृत्व पर भी ख़तरा आ जाए और जहां से आप ने शुरुआत की थी, वो सफ़र पांच साल भी पूरा न कर पाए.
आम आदमी पार्टी के भविष्य पर भी सवाल खड़ा हो गया है क्योंकि जिस तरह के आंदोलन से पार्टी निकली थी और जो वायदे किए थे, वैसा कुछ सामने नहीं दिखा.
ये स्वाभाविक है कि आंदोलन और व्यवहार में अंतर हो जाता है और उसके वाजिब कारण होते हैं. व्यावहारिक दिक्कतों के लिए माफी भी मांगी जा सकती है.
एक तरफ़ राजनीतिक विकल्प देने के दावे करना, लोगों से राय मांगने के लिए जनसभाएं करना, दूसरी तरफ़ सारे फैसले एक व्यक्ति द्वारा लिये जाने का तर्क नहीं दिया जा सकता.
(बीबीसी संवाददाता अमरेश द्विवेदी से बातचीत पर आधारित.)
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)