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क्या विदेशों में भी है वीआईपी कल्चर?
- Author, रेहान फज़ल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
जब भारत सरकार ने ऐलान किया कि लाल बत्ती के वीआईपी कल्चर को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जा रहा है, तो इसका पूरे भारत में ज़बरदस्त स्वागत हुआ.
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने तो मंत्रिमंडल बैठक समाप्त होते ही अपनी गाड़ी से लाल बत्ती हटवा दी. लेकिन बहुत से लोगों को पता नहीं है कि नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री मार्क रेते सालों से अपने घर से दफ़्तर साइकिल से जाते रहे हैं.
नीदरलैंड्स की गिनती दुनिया के सबसे अमीर देशों में होती है और कुल घरेलू उत्पाद में उसका स्थान दुनिया में 16वाँ है. ये काम रेते अपने देश में ही नहीं करते हैं बल्कि विदेशी दौरों में भी उनकी पूरी कोशिश होती है कि वो साइकिल पर चलने की ये परंपरा जारी रखें.
पिछले साल जब वो इसराइल के दौरे पर गए तो लोग ये देख कर दंग रह गए जब वो अपने होटल से वार्तास्थल तक साइकिल से पहुंचे. और तो और चार साल पहले जब हालैंड के नए राजा विलेम एलेक्ज़ैंडर ने कार्यभार संभाला तो शाही दंपत्ति को कई बार औपचारिक समारोहों में साइकिल पर जाते देखा गया.
एक और यूरोपीय देश स्वीडन के प्रधानमंत्री ओलेफ़ पाम की उस समय हत्या कर दी गई थी जब वो फ़रवरी, 1986 में सिनेमा हॉल से एक पिक्चर देख कर पैदल वापस अपने घर लौट रहे थे.
इस घटना के 17 साल बाद, 11 सितंबर 2003 को, स्वीडन की विदेश मंत्री अना लिंड को भी एक डिपार्टमेंटल स्टोर में ख़रीदारी करते हुए एक शख्स ने चाकू मार दिया था. लेकिन इसके बाद भी महत्वपूर्ण व्यक्तियों की सुरक्षा को लेकर वहाँ कोई जुनून नहीं देखा जाता.
दुनिया के सबसे ताकतवर समझे जाने वाले देश अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने कार्यकाल के दौरान कई बार वाशिंगटन और दूसरे शहरों के प्रमुख रेस्तराओं में खाना खाया है. वो कई बार वाशिंगटन के 'बेंस चिली बोल' में अपने परिवार के साथ खाना खाते देखे गए हैं.
अपनी वियतनाम की सरकारी यात्रा के दौरान ओबामा ने अपनी गाड़ियों का काफ़िला रुकवा कर हनोई के एक मामूली रेस्तराँ में प्लास्टिक के स्टूल पर बैठ कर वहाँ के मशहूर व्यंजन 'बन शा' का आनंद लिया था.
क्या इस बात की कल्पना भी की जा सकती है कि भारत के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री कनाट प्लेस के किसी रेस्तरां में खाना खाएंगे ?
लेकिन ऐसा नहीं हैं कि भारत में हमेशा से वीआईपी कल्चर रहा हो. भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के साथ कोई लाव-लश्कर नहीं चलता था. सिर्फ मोटर साइकिल पर सवार होकर एक सुरक्षाकर्मी पायलट के तौर पर चला करता था.
नेहरू के बाद इंदिरा गाँधी की कार के साथ भी सिर्फ़ एक अतिरिक्त कार चलती थी और सड़क पर चलने वालों के लिए ये देखना आम बात होती थी कि भारत की प्रधानमंत्री अपनी कार में फ़ाइलों को पढ़ती हुई चली जा रही है.
कुलदीप नैयर अपनी आत्मकथा 'बियॉन्ड द लाइंस' में लिखते हैं कि एक बार भारत के तत्कालीन गृह मंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के पास अपनी गाड़ी रुकवा कर गन्ने का रस पिया था.
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद प्रधानमंत्री बने राजीव गाँधी के ज़माने में सुरक्षा व्यवस्था बहुत मज़बूत कर दी गई थी. लेकिन इसके बावजूद जब राजीव के निवास पर एक बैठक आधी रात तक खिंच गई तो उन्होंने गृह सचिव आर डी प्रधान को अपनी जीप पर बैठाया और खुद ड्राइव करने लगे.
आर डी प्रधान अपनी किताब 'वर्किंग विद राजीव गांधी' में लिखते हैं, "मैं समझा कि राजीव मुझे गेट तक छोड़ने जा रहे हैं. लेकिन उन्होंने कार गेट से बाहर निकाल कर पूछा, बताइए आपका घर किस तरफ़ हैं? मैंने उनके दोनों हाथ पकड़ लिये और कहा कि आप अगर एक इंच भी आगे बढ़े तो मैं चलती जीप से कूद जाउंगा. तब जा कर राजीव गांधी माने."
लेकिन इसके बाद तो हालात बदलते चले गए. एक अनुमान के अनुसार इस समय भारत में कुल वीआईपी की संख्या पाँच लाख 79 हज़ार से ऊपर है जबकि ब्रिटेन में सिर्फ़ 84, फ़्रांस में 109 और चीन में मात्र 425 वीआईपी हैं.
भारत में राजनेताओं के अलावा नौकरशाह, जज, सैनिक अधिकारी और यहाँ तक कि फ़िल्म कलाकार भी वीआईपी स्टेटस पाने की होड़ में शामिल हैं. सेना के अफ़सरों की देखादेखी अब पुलिस अधिकारी भी अपनी कार पर स्टार लगाने लगे हैं. सेना में ब्रिगेडियर स्तर का अधिकारी भी एस्कॉर्ट कार के साथ चल रहा है.
बहुत दिन नहीं हुए जब मैंने खुद अपनी आँखों से ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर की कार को लंदन की ट्रैफ़िक लाइट पर रुक कर बत्ती हरी होने का इंतज़ार करते देखा है.
मुझे याद है जब उनका प्रधानमंत्री के रूप में पहला दिन था तो एक शख्स ने सुबह-सुबह उनके निवास स्थान 10 डाउनिंग स्ट्रीट की घंटी बजाई थी और ब्लेयर की पत्नी चेरी ब्लेयर ने जम्हाई लेते हुए ख़ुद दरवाज़ा खोला था और वहाँ मौजूद सैकड़ों टेलिविज़न कैमरों ने वो दृश्य कैद किया था.
अभी ज्यादा दिन नहीं हुए जब पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन अपने प्रधानमंत्रित्व काल के आख़िरी दिन खुद अपने हाथों से ट्रक पर अपना टेलीविज़न लादते देखे गए थे.
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के साथ मेट्रो पर सवारी करते देखे गए है लेकिन उसको ज़्यादा से ज़्यादा एक फ़ोटो अपॉरचुनिटी ही कहा जा सकता है. लेकिन ब्रिटेन के प्रधानमंत्री और मंत्री अक्सर मेट्रो पर सवारी कर अपने दफ़्तर पहुंचते हैं.
एक बार तो हद ही हो गई जब डेविड कैमरन ने मेट्रो पर उनके साथ सफ़र कर रही एक महिला के बच्चे की तारीफ़ कर दी.
वो महिला उन्हें पहचान नहीं पाई और अपने पति से पूछ बैठी कि ये शख़्स कौन हैं जो मेरे बेटे की इतनी फ़राग़दिली से तारीफ़ कर रहा है. जब उसके पति ने कहा कि ये ब्रिटेन के प्रधानमंत्री हैं तो वो बहुत शर्मिंदा हुई और उसने कैमरन से माफ़ी मांगी.
पिछले साल जब कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने चुनाव जीता तो उन्होंने मॉन्ट्रियल के एक मेट्रो स्टेशन पर जा कर आम लोगों का अभिवादन किया था.
भारत में इस तरह की चीज़ों को आने में अभी समय लगेगा. लाल बत्ती का हमेशा के लिए जाना अच्छी शुरुआत है लेकिन अभी इस दिशा में बहुत कुछ होना बाकी है.
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