'मुसलमान भाइयों को हलाल गोमांस चाहिए तो बीजेपी ख़िलाफ़ नहीं है'

    • Author, प्रगित परमेश्वरन
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

उत्तर प्रदेश में भाजपा की दमदार जीत के बाद एक बार फिर से 'गोमांस' और 'बूचड़खानों' का मुद्दा गरमाया हुआ है.

एक तरफ उत्तर प्रदेश और दूसरे भाजपा शासित राज्यों में भाजपा 'गोमांस' पर लगी पाबंदियों को कड़ाई से पालन करने के लिए कोशिश कर रही है. तो वहीं दूसरी ओर केरल के मालापुरम संसदीय क्षेत्र में हो रहे उपचुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार उत्तम क्वालिटी का गोमांस मुहैया करने का वादा कर रहे हैं.

44 साल के एन श्रीप्रकाश मालापुरम से बीजेपी के उम्मीदवार हैं. वो बीजेपी के ज़िला उपाध्यक्ष भी हैं.

उन्होंने क्षेत्र की जनता से वादा करते हुए कहा है कि अगर वो जीतते हैं तो वो क़ानून के दायरे में रहते हुए उत्तम क्वालिटी का गोमांस उपलब्ध करवाएंगे और एयर कंडिशन वाले सभी सुविधाओं से संपन्न बूचड़खाने खुलवाएंगे.

उन्होंने कहा, "अगर मेरे मुसलमान भाइयों को अच्छा हलाल गोमांस चाहिए तो बीजेपी इसके ख़िलाफ़ नहीं हैं. पार्टी के बारे में ग़लत बताया जा रहा है कि पार्टी अल्पसंख्यों की खाने-पीने की आदतें बदलने चाहती है. हमारा कोई इस तरह का एजेंडा नहीं है."

उन्होंने अपने एक बयान में कहा कि उनका जोर मालापुरम संसदीय क्षेत्र के सभी बूचड़खानों को साफ-सुथरा रखने के ऊपर था.

उन्होंने बूचड़खानों को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की हाल में कार्रवाई पर पूछे सवाल के जवाब में यह बात कही थी.

उन्होंने कहा, "मेरा जोर बूचड़खानों को साफ-सुथरा करने की ज़रूरत के ऊपर था ना कि गोमांस को लेकर. उत्तर प्रदेश में बंद हुए बूचड़खानों को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में मैंने कहा था कि अगर मैं जीतता हूं तो मैं साफ-सुथरे बूचड़खानों में उत्तम किस्म का गोमांस मुहैया करूंगा."

उत्तर प्रदेश के फ़ैसले पर उनका कहना है, "बीजेपी किसी ख़ास तरह के खाने के ख़िलाफ़ नहीं है. उत्तर प्रदेश में यह मुहिम इसलिए शुरू की गई है क्योंकि वहां बिना लाइसेंस के बूचड़खाने चल रहे थे. अवैध बूचड़खानों को बंद करने की मांग पर सरकार आंखें मुंद कर नहीं रह सकती है."

उन्होंने आगे कहा, "ऐसा नहीं है कि इससे कुछ गरीब लोग बेरोजगार हो जाएंगे. हमें उनका मार्गदर्शन करना है और बूचड़खानों को लेकर हमें कुछ मापदंड तय करने हैं. हम इस मामले में कोई समझौता नहीं कर सकते हैं."

एन श्रीप्रकाश राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ से जुड़े रहे हैं.

पार्टी के नेताओं का दावा है कि इस बार बीजेपी को मालापुरम में पिछली बार से छह गुणा अधिक वोट आने वाले हैं.

आलोचकों का कहना है कि बीजेपी ने कन्हालीकुट्टी जैसे कद्दावार नेता के ख़िलाफ़ एक ऐसा उम्मीदवार खड़ा किया है जिसे 'ज्यादा लोग नहीं जानते' हैं.

कन्हालीकुट्टी इंडियन यूनियन ऑफ़ मुस्लिम लीग के उम्मीदवार हैं.

लेकिन बीजेपी के नेता एन श्रीप्रकाश की जीत को लेकर आशवस्त है. वो इंडियन यूनियन ऑफ़ मुस्लिम लीग के साथ मुकाबला बताते हैं.

बीजेपी नेता के सुरेंद्रन का कहना है, "मार्क्सवादियों ने फैसल नाम के एक कमजोर उम्मीदवार को मैदान में उतारा है. यह यूडीएफ के साथ उनके समझौतावादी रैवये को दिखाता है. पर्दे के पीछे होने वाले ऐसे नाजायज़ गठबंधन से कुछ नहीं होने वाला है. आने वाले दिनों में केरल में यह दिखेगा."

उन्होंने इस बात से भी इंकार किया कि मालापुरम मुस्लिम बहुल इलाका होने की वजह से बीजेपी के लिए अभी भी टेढ़ी खीर है.

उन्होंने कहा, "हमने उत्तर प्रदेश में इस सोच को टूटते हुए देखा है. बीजेपी को मुस्लिम विरोधी के तौर पर पेश करने की तरकीब अब काम नहीं करने वाली है."

श्रीप्रकाश के मुताबिक़ जनता ने यूडीएफ़ और एलडीएफ़ को कई बार मौके दिए हैं लेकिन वो इस संसदीय क्षेत्र में विकास लाने में नाकामयाब रहे हैं.

वो कहते है, "मतदाताओं का पता है कि बीजेपी की केंद्र में सरकार है इसलिए वो क्षेत्र में बदलाव लाने में सक्षम है. अल्पसंख्यक राजनीति अब नहीं चलने वाली है."

कुछ राज्यों में गोमांस के बूचड़खानों पर लगे प्रतिबंध के बारे में उनका कहना है कि इसके पीछे कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है.

मालापुरम मुस्लिम बहुल क्षेत्र है. 12 अप्रैल को यहां उपचुनाव होने वाले हैं.

इंडियन यूनियन ऑफ़ मुस्लिम लीग के सांसद ई अहमद की मौत के कारण यह उपचुनाव हो रहे हैं.

ई अहमद 2014 में हुए आम चुनाव में 1.94 लाख वोट से चुनाव जीते थे.

इंडियन यूनियन ऑफ़ मुस्लिम लीग के राज्य महासचिव केपिए माजिद का कहना है, "क्या बीजेपी मालापुरम की जनता का मज़ाक उड़ा रही है. इस तरह के आधारहीन और हताशा भरी बातों से पता चलता है कि पार्टी का कोई आधार नहीं है. मालापुरम की जनता इतनी बेवकूफ नहीं है जो इसतरह के मूर्खतापूर्ण वादों के झांसे में आ जाए."

सीपीएम बीजेपी के दावों को बकवास बता रही है.

पार्टी के एमएलए एएन शमशीर का कहना है कि बीजेपी इन वादों को भजाने की कोशिश में लगी हुई है.

हालांकि इस ज़िले की जनता गोमांस पर छिड़ी इस बहस से ज्यादा इत्तेफाक रखती नज़र नहीं आ रही है.

मालापुरम संसदीय क्षेत्र के एक मतदाता शाहजहां के मोइदीन कहते है, "बड़ी ताज्जुब की बात है कि कोई भी पार्टी मालापुरम के मुद्दों को नहीं उठा रही है. उत्तर प्रदेश के बूचड़खानों और गोमांस के मुद्दों को उठाने का क्या मतलब है? इन उम्मीदवारों को मीडिया का ध्यान अपनी ओर केंद्रित करने के बजाए क्षेत्र के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)