मध्य प्रदेश : अब मुसलमान भी बन सकेंगे पुरोहित

महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान

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    • Author, शुरैह नियाज़ी
    • पदनाम, भोपाल से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

मध्य प्रदेश में अब कोई भी पुरोहित का कोर्स कर पूजा-पाठ करा सकेगा.

प्रदेश सरकार एक साल के इस कोर्स की शुरुआत जुलाई से करने जा रही है. इस कोर्स में किसी जाति या धर्म की बाध्यता नहीं होगी.

कोर्स का संचालन स्कूल शिक्षा विभाग के महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान के ज़रिए किया जाएगा.

प्रायोगिक शिक्षा

इस संस्थान के संचालक प्रभात आर तिवारी ने बताया, '' इसका पाठ्यक्रम तैयार हो चुका है. इसी साल से इसे चालू कर दिया जाएगा. हमारा ज़ोर बच्चों को प्रायोगिक शिक्षा देने पर ज्यादा होगा.''

सरकार के इस कदम का ब्राहमण समाज विरोध करने जा रहा है.

महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान के निदेशक प्रभात आर तिवारी.

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पिछले साल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अनुसूचित जाति विभाग को एक योजना पर काम करने को कहा था, जिसके ज़रिए दलित समुदाय के युवाओं को पंडिताई और पुरोहित बनने का प्रशिक्षण दिया जाना था.

सरकार की मंशा दलित समुदाय के युवाओं से ब्राहमणों की तरह पूजा, पाठ, यज्ञ हवन और अन्य मांगलिक कार्य करवाने की थी.

सरकार की इस योजना के ख़िलाफ प्रदेश ब्राहमण लामबंद हो गए थे और पूरे प्रदेश में प्रदर्शन हुए थे. इसके बाद सरकार को अपने कदम पीछे ख़ींचने पड़े थे.

ब्राह्मणों का विरोध

अपना विरोध जताते ब्राह्मण समाज के लोग.

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बुंदेलखंड युवा सर्व ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष भारत तिवारी कहते है, " हम इसका विरोध करेंगे. हम समाज को बताएंगे कि किस तरह से सरकार समाज के ख़िलाफ षड्यंत्र कर रही है. यह ब्राहमण समाज को कमज़ोर करने की कोशिश है."

स्वामी स्वरूपानंद ने भी सरकार की इस योजना को पूरी तरह से ग़लत बताया था. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा था कि सरकार सनातन धर्म की परंपराओं को किसी भी तरह से तोड़ने की कोशिश न करे.

महर्षि पतांजलि संस्कृत संस्थान के संचालक कहते है, " इसके विरोध का सवाल ही नहीं उठता. इस तरह के कोर्स का संबंध विशेष तौर पर धर्मों से नहीं है. यह सब तर्क पर आधारित है.''

वो कहते हैं कि पुरोहित के तौर पर जब आप कोई काम करवाते हैं तो आपके पास पर्याप्त ज्ञान होना चाहिए यही महत्वपूर्ण है.

मध्य प्रदेश सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते ब्राह्मण समाज के सदस्य.

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लेकिन अब नए सिरे से इस कोर्स पर विवाद बढ़ने की उम्मीद है. ब्राहमण समाज के युवा सरकार की इस कोशिश से ख़ासे नाराज़ हैं.

अमिताभ पाण्डेय कहते हैं, " पुरोहिताई ऐसा काम नहीं है कि कोई भी कर ले. प्राचीन काल से हिंदू धर्म में ब्राह्मण इसे करते चले आ रहे हैं. अब जहां तक सवाल है किसी भी धर्म के लोगों को इसमें प्रवेश देने का तो उसे किसी भी तरह से उचित नहीं कहा जा सकता.''

इस कोर्स में दाखिले के लिए ज़रूरी योग्यता कम से कम 10वीं पास होना है. इसकी फ़ीस 25 हज़ार रुपए सालाना है.

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